बागराकोट चाय बागान, घर नहीं लौट सके 372 चाय श्रमिक

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जलपाईगुड़ी़ : काफी दिनों से बंद पड़े बागराकोट चाय बागान के खोले जाने की घोषणा होने के बाद भी दूर-दूर तक इस बागान के खोले जाने के आसार नहीं दिख रहे है़ हाल ही में कोलकाता में संपन्न राज्य श्रम विभाग,चाय श्रमिक यूनियन के नेताओं और डंकन्स ग्रुप के मालिकों के बीच संपन्न त्रिपक्षीय बैठक […]

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जलपाईगुड़ी़ : काफी दिनों से बंद पड़े बागराकोट चाय बागान के खोले जाने की घोषणा होने के बाद भी दूर-दूर तक इस बागान के खोले जाने के आसार नहीं दिख रहे है़ हाल ही में कोलकाता में संपन्न राज्य श्रम विभाग,चाय श्रमिक यूनियन के नेताओं और डंकन्स ग्रुप के मालिकों के बीच संपन्न त्रिपक्षीय बैठक में एक फरवरी से बागान को खोलने का निर्णय लिया गया था़ इसके साथ ही बागान श्रमिकों के सभी बकाए के भुगतान की घोषणा भी की गयी थी़ इसको लेकर इस चाय बागान में काम करने वाले श्रमिकों में जश्न का माहौल था़ एक फरवरी का दिन बित गया और चाय श्रमिक बागान खुलने का इंतजार करते रह गए़ उसके बाद जो हालात पैदा हो रहे हैं उससे आने वाले दिनों में भी इस बागान के खुलने की कोइ उम्मीद नहीं है़ इसको लेकर यहां के चाय श्रमिक एक बार फिर से हताश है़ हताशा यहां रह रहे सिर्फ चाय श्रमिकों में ही नहीं है,अपितु वह चाय श्रमिक भी हताश हैं जो बागान बंद होने के बाद रोजी रोटी कमाने के लिए अन्य राज्यों में चले गए थे़ यहलोग बागान खुलने के बाद यहां काम करने के लिए लौटने वाले थे़ स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस चाय बागान के 372 चाय श्रमिक दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं.

चाय बागान के खोले जाने की खबर सुनकर यहलोग काफी खुश थे और अपने परिवार वालों के साथ मिलकर इसी चाय बागान में एक बार फिर से काम करने की सोच रहे थे़ इनसभी लोगों ने घर लौटने के लिए ट्रेनों की टिकट भी ले रखी थी़.

चेन्नइ,केरल,मुंबई,दिल्ली आदि स्थानों से यह सभी चाय श्रमिक बागराकोट चाय बागान लौटने वाले थे़ परिवार वालों ने इन्हें आने से मना कर दिया़ यहां रह रहे परिवार वालों को लगता है कि बागान खोलने के नाम पर एक बार फिर से श्रमिकों के साथ मजाक हुआ है. डंकन्स के मालिक चाय बागान चलाना ही नहीं चाहते़ उनकी इच्छा बागान खोलने की नहीं है़ परिवार वालों ने बाहर रह रहे चाय श्रमिकों को समझाया कि लौट कर वापस आना एक बार फिर से भविष्य को अंधकार में धकेलने जैसा है़ परिवार वालों की इस चेतावनी को सुनकर सभी ने अपना बदल दिया और वहलोग अब बागराकोट नहीं आ रहे हैं.

यहां उल्लेखनीय है इस चाय बागान में 1485 स्थायी और 1200 अस्थायी कर्मचारी हैं. इनमें से 372 कर्मचारी रोजगार की तालाश में अन्य राज्यों में चले गए हैं. इसबीच,बागान खुलने की उम्मीद खत्म देखकर इस चाय बागान के और भी कइ श्रमिक रोजगार के तालाश में अन्यत्र जाना चाहते हैं. यह चाय बागान पिछले नौ महीने से बंद है और अबतक भूख और बीमारी की वजह से यहां 36 चाय श्रमिकों की मौत हो चुकी है़

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