सिलीगुड़ी : चेतावनी के बावजूद जर्जर पुल से गुजर रहे भारी वाहन

Updated at : 12 Sep 2018 9:03 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : चेतावनी के बावजूद जर्जर पुल से गुजर रहे भारी वाहन

भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्ता नहीं दे पा रहा प्रशासन मोहन झा सिलीगुड़ी : कमजोर सेतु का बोर्ड लगाये जाने के बाद भी फूलबाड़ी व घोषपुकुर को जोड़नेवाले महानंदा बैरेज सेतु से दिन-रात भारी वहन गुजर रहे हैं और हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं. लेकिन सबकुछ जानते हुए भी जिला प्रशासन और भारतीय राष्ट्रीय […]

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भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्ता नहीं दे पा रहा प्रशासन
मोहन झा
सिलीगुड़ी : कमजोर सेतु का बोर्ड लगाये जाने के बाद भी फूलबाड़ी व घोषपुकुर को जोड़नेवाले महानंदा बैरेज सेतु से दिन-रात भारी वहन गुजर रहे हैं और हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं. लेकिन सबकुछ जानते हुए भी जिला प्रशासन और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) बेबस हैं, क्योंकि वे कोई वैकल्पिक रास्ता (डाइवर्जन) उपलब्ध कराने में अक्षम हैं. सिलीगुड़ी से सटे फूलबाड़ी स्थित महानंदा बैरेज पर बना सेतु क्षतिग्रस्त हो गया है. इसका निर्माण वर्ष 1980 में हुआ था. पूर्वोत्तर भारत के साथ सड़क संपर्क में यह सेतु काफी महत्वपूर्ण है.
निर्माण के बाद सेतु के रखरखाव की जिम्मेदारी महानंदा बैरेज प्रबंधन को सौंपी गयी था. तब इस फूलबाड़ी-घोषपुकुर बाइपास पर वाहनों की संख्या काफी कम थी. उस समय भारी वाहन विधानगर, बागडोगरा होकर राष्ट्रीय राजमार्ग 31-सी व सिलीगुड़ी से फूलबाड़ी होकर राष्ट्रीय राजमार्ग 31 से आते-जाते थे. लेकिन समय के साथ पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वारा माने जानेवाले सिलीगुड़ी शहर के विकास की रफ्तार के साथ जनसंख्या व वाहनों की संख्या भी काफी बढ़ी. शहर में जाम की समस्या बढ़ने से भारी वाहनों के शहर में प्रवेश करने पर पाबंदी लगाया गया.
भारी वाहनों की आवाजाही फूलबाड़ी-घोषपुकुर बाइपास रोड से कर दी गयी. क्षमता से अधिक भारी वाहनों की आवाजाही से इस सड़क पर बना महानंदा बैरेजे सेतु समय से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गया. सेतु के पिलर और गार्टर के बीच में बियरिंग लगी होती है. गार्टर सहित पूरे सेतु का भार इन बियरिंग पर होता है. भारी वाहनों के गुजरने पर यह शॉकर की तरह काम करती है. महानंदा बैरेज पर इस सेतु के एक पिलर के पर लगी बियरिंग टूट गयी है. करीब छह महीने पहले यह मामला सामने आया था. तब तक सेतु की जिम्मदेरी महानंदा बैरेज प्रबंधन की थी.
बैरेज प्रबंधन ने कुछ मरम्मत करायी, लेकिन बियरिंग की मरम्मत नहीं हुई. बाद में यह सड़क जब एशियन हाइवे का हिस्सा बन गयी तो इस ब्रिज का दायित्व महानंदा बैरेज प्रबंधन ने एनएचएआइ को सौंप दिया. सेतु की क्षतिग्रस्त अवस्था को जानने के बाद एनएचएआइ ने उसके दोनों ओर कमजोर सेतु का बोर्ड लगा दिया है. लेकिन बोर्ड को नजरअंदाज कर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भारी वाहन इस सेतु से होकर गुजरते हैं.
एनएचएआइ के अधिकारी अजित सिंह ने क्षतिग्रस्त बियरिंग को बदलने के लिए सेतु का पूरा डेक उठाना होगा. इसके लिए वाहनों की आवाजाही रोकनी होगी.
अगर मरम्मत होने तक महानंदा बैरेज से भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी जाये तो बागडोगरा, सिलीगुड़ी होकर वाहनों को फूलबाड़ी रूट पर लाना होगा. इससे पहले से ही जाम से त्रस्त सिलीगुड़ी शहर पूरी तरह ठप हो जायेगा. प्रशासनिक और एनएचएआइ सूत्रों के मुताबिक, एशियन हाइवे महासड़क के लिए महानंदा बैरेज पर एक और सेतु निर्माणाधीन है, जिसे पूरा होने में अभी और तीन महीने का समय लगेगा. अजित सिंह ने कहा कि चार से पांच टन भारवाले वाहनों के गुजरने से खतरा कम है. लेकिन इससे अधिक वजनी वाहनों से खतरा हो सकता है.
क्या कहना है जिला अधिकारी का
क्षतिग्रस्त सेतु की पूरी मरम्मत के लिए वाहनों की आवाजाही रोकनी होगी. पासवाले सेतु का निर्माण कार्य पूरा होने तक क्षतिग्रस्त ब्रिज से वाहनों की आवाजाही रोकना संभव नहीं है. भारी वाहनों के लिए ट्राफिक डाइवर्ट किया गया है. अधिक संख्या में भारी वाहनों को शहर के भीतर से होकर गुजारा नहीं जा सकता है. दुर्गापूजा के बाद ब्रिज की मरम्मत कराये जाने की संभावना है.
जयसी दासगुप्ता, जिला अधिकारी, दार्जिलिंग
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