एनआरसी के जरिये चुनावी लाभ की कोशिश, बंगाल के काफी लोगों का नाम नहीं

Updated at : 25 Aug 2018 1:19 AM (IST)
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एनआरसी के जरिये चुनावी लाभ की कोशिश, बंगाल के काफी लोगों का नाम नहीं

सिलीगुड़ी : असम में एनआरसी के बहाने केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार राजनीति कर रही है. भाजपा आने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव में एनआरसी के बहाने चुनावी लाभ उठाना चाहती है. इसीलिए एनआरसी जिनके नाम शामिल नहीं हैं उनको बांग्लादेशी घुसपैठिए के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. जबकि वास्तविकता यह है […]

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सिलीगुड़ी : असम में एनआरसी के बहाने केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार राजनीति कर रही है. भाजपा आने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव में एनआरसी के बहाने चुनावी लाभ उठाना चाहती है. इसीलिए एनआरसी जिनके नाम शामिल नहीं हैं उनको बांग्लादेशी घुसपैठिए के रूप में प्रचारित किया जा रहा है.
जबकि वास्तविकता यह है कि अपने ही देश के काफी नागरिकों का नाम उसमें शामिल नहीं है. भाजपा ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए देश के ही लाखों नागरिकों को घुसपैठिया घोषित कर दिया है. यह बातें कांग्रेस के लोकसभा सांसद तथा पश्चिम बंगाल कांग्रेस प्रभारी गौरव गोगोई ने कही. वह इन दिनों उत्तर बंगाल के दौरे पर हैं.
वही भाजपा नेताओं का कहना है कि पश्चिम बंगाल से आए लोगों के दस्तावेजों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार से अपील की गई थी. पश्चिम बंगाल सरकार ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की. श्री गोगोई ने कहा कि भाजपा यह स्पष्ट करे कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के किस पदाधिकारी से इस मामले में बातचीत की थी. क्या असम में एनआरसी रिपोर्ट तैयार करने में लगे किसी अधिकारी ने पश्चिम बंगाल से आधिकारिक तौर पर बातचीत की थी. बातचीत अगर हो जाती तो समस्या का समाधान हो जाता.
लेकिन भाजपा तो किसी भी तरह से एनआरसी को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहती थी . श्री गोगोई ने कहा कि साढ़े चार सालों में भाजपा तथा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कुछ भी नहीं किया. बल्कि कांग्रेस की ही अच्छी परियोजनाओं को कबाड़ा कर लागू कर दिया. एनआरसी एक अच्छी परियोजना थी. जिसके जरिए भारतीय तथा विदेशी नागरिकों की पहचान की जानी थी. इसको बेकार कर दिया गया.
इसी तरह से जीएसटी कांग्रेस सरकार की योजना थी .आधार कार्ड योजना भी कांग्रेस की ही थी. आम लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए जीएसटी एवं आधार योजना को लागू किया गया था. भाजपा ने इन दोनों योजनाओं का भी कबाड़ा कर दिया. जीएसटी से आम कारोबारियों को फायदा कम बल्कि नुकसान अधिक हो रहा है. इसी तरह से आधार नहीं होने के कारण काफी लोग परेशान हो जाते हैं.
मोदी सरकार को हटाना बड़ी प्राथमिकता
राज्य में तृणमूल के साथ गठबंधन के संबंध में उन्होंने कहा कि अभी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है. राज्य के कांग्रेस कार्यकर्ता जैसा चाहेंगे वैसा ही निर्णय लिया जाएगा. कांग्रेस का मुख्य मकसद आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से हटाना है. इसके लिए जो रास्ता तय करना पड़े पार्टी उस पर विचार करेगी.संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस विधायक शंकर मालाकार भी उपस्थित थे.
गौरव गोगोई ने भाजपा पर साधा निशाना
शुक्रवार को उन्होंने कांग्रेस कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत की. श्री गोगोई ने कहा कि एनआरसी भाजपा का नहीं बल्कि कांग्रेस का प्रोजेक्ट है. कांग्रेस ने ही असम में भारतीय तथा विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए एनआरसी लागू करने की पहल की थी .तब कांग्रेस का मकसद साफ था. कांग्रेस इस रिपोर्ट के जरिए जरिए भारतीय तथा विदेशी नागरिकों की पहचान अलग अलग करना चाहती थी.
लेकिन असम में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा ने एनआरसी के जरिए राजनीतिक लाभ हासिल करने की योजना बनाई. यही कारण है कि पूरी रिपोर्ट में हेराफेरी कर दी गई है और काफी संख्या में भारतीय नागरिकों को ही अवैध नागरिक घोषित कर दिया गया है. श्री गोगोई ने कहा कि असम में एनआरसी में भारी संख्या में बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि आए लोगों का नाम नहीं है. जबकि इन प्रदेशों के लोग कई वर्षों से असम में रह रहे हैं. अब इनके सामने नागरिकता का संकट मंडराने लगा है.
भाजपा सरकार ने 1200 सौ करोड़ रुपए खर्च कर एनआरसी रिपोर्ट से कुछ भी हासिल नहीं किया है. इसे सिर्फ चुनावी वैतरणी पार करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. यही कारण है कि भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह एनआरसी के जरिए लोगों को धमका रहे हैं. श्री गोगोई ने आगे कहा कि एनआरसी रिपोर्ट को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर भी निशाना साधा जा रहा है. दरअसल भाजपा ऐसा कर अपने आप को बचाने की कोशिश कर रही है. पश्चिम बंगाल के काफी लोग असम में रहते हैं. इनको भी अवैध नागरिक घोषित कर दिया गया है. अब भाजपा नेता इसका दोष पश्चिम बंगाल सरकार पर थोप रहे हैं .
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