सरकार ने दिया 176 रुपये न्यूनतम मजदूरी का प्रस्ताव

Updated at : 17 Aug 2018 5:14 AM (IST)
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सरकार ने दिया 176 रुपये न्यूनतम मजदूरी का प्रस्ताव

सिलीगुड़ी : चाय श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर 172 रुपये ठुकराये जाने पर राज्य सरकार ने अब 176 रुपये का प्रस्ताव दिया है. इस पर 20 अगस्त को कोलकाता में न्यूनतम मजदूरी सलाहकार कमेटी की बैठक में चर्चा होगी. उस दिन कोई निर्णय नहीं होने पर चाय श्रमिकों की दैनिक मजदूरी में सितंबर महीने […]

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सिलीगुड़ी : चाय श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर 172 रुपये ठुकराये जाने पर राज्य सरकार ने अब 176 रुपये का प्रस्ताव दिया है. इस पर 20 अगस्त को कोलकाता में न्यूनतम मजदूरी सलाहकार कमेटी की बैठक में चर्चा होगी. उस दिन कोई निर्णय नहीं होने पर चाय श्रमिकों की दैनिक मजदूरी में सितंबर महीने से 10 रुपये की अंतरिम वृद्धि करने का प्रस्ताव भी सरकार ने दिया है. न्यूनतम मजदूरी को लेकर बार-बार फेल हो रही बैठक और राज्य सरकार के रुख पर चाय श्रमिकों के संगठनों के ज्वाइंट फोरम ने विरोध जताया है.
इससे पहले गत 6 अगस्त को सिलीगुड़ी स्थित मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में त्रिपक्षीय बैठक हुई थी, जिसमें राज्य सरकार की ओर से श्रम आयुक्त जावेद अख्तर ने चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 172 रुपये करने का प्रस्ताव दिया था. इसका ज्वाइंट फोरम ने विरोध करते हुए 172 रुपये की तार्किकता साबित करने की मांग सरकार से की. यह बैठक विफल हो गयी और इसके बाद कई चाय बागानों में तीन दिवसीय औद्योगिक हड़ताल भी की गयी.
गुरुवार को शहर के उत्तरबंग मारवाड़ी भवनमें राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक ने चाय उद्योग के मालिक संगठनों के साथ बैठक की. इस बैठक में उन्होंने न्यूनतम मजदूरी के लिए 176 रुपये का प्रस्ताव दिया. उन्होंने कहा कि इस पर 20 अगस्त को कोलकाता की बैठक में चर्चा होगी. तृणमूल के चाय श्रमिक संगठन की ओर से मोहन शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने 176 रुपये न्यूनतम मजदूरी का प्रस्ताव दिया है. साथ ही सितंबर महीने से चाय श्रमिकों के वेतन में 10 रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. हम सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करते हैं.
क्या कहना है ज्वाइंट फोरम का
ज्वाइंट फोरम के संयोजक जिया उल आलम ने कहा कि राज्य सरकार ने न्यूनतम मजदूरी को लेकर अस्थिर स्थिति बना रखी है. न्यूनतम मजदूरी के लिए जो आंकड़ा सरकार पेश कर रही हैं, उसकी तार्किकता की कोई व्याख्या नहीं कर रही है. इसके अतिरिक्त त्रिपक्षीय समझौता वर्ष 2015 के अप्रैल में समाप्त हुआ था. तब से लेकर अब तक का क्या होगा? खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद से बागान मालिकों ने राशन देना बंद कर दिया है. उसके बदले रकम भी नहीं दी जा रही. इन सब मामलों को लेकर सरकार ने चुप्पी साध रखी है.
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