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निपाह के आतंक में भी ‘बादुर बागान’ गुलजार

Updated at : 31 May 2018 2:35 AM (IST)
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निपाह के आतंक में भी ‘बादुर बागान’ गुलजार

सिलीगुड़ी : एक ओर जब पूरे देश में निपाह वायरस ने आतंक मचा रखा है, वहीं सिलीगुड़ी के सटे आसिघर इलाके में लोग निपाह वायरस का वाहक समझे जाने वाले चमगादड़ के साथ मिलजुल कर रह रहे हैं. इस रिहायसी इलाके में बांस, साल व अन्य पेड़ों का एक बागान सा है, जिस पर चमगादड़ों […]

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सिलीगुड़ी : एक ओर जब पूरे देश में निपाह वायरस ने आतंक मचा रखा है, वहीं सिलीगुड़ी के सटे आसिघर इलाके में लोग निपाह वायरस का वाहक समझे जाने वाले चमगादड़ के साथ मिलजुल कर रह रहे हैं. इस रिहायसी इलाके में बांस, साल व अन्य पेड़ों का एक बागान सा है, जिस पर चमगादड़ों ने काफी वर्षों से कब्जा जामाया है.
निपाह वायरस का आतंक यहां के लोगों के मन में भी समाया हुआ है. ऐसे काफी संख्या में चमगादड़ों की उपस्थिति इलाके में होने के बाद भी अब तक निपाह का प्रकोप यहां सामने नहीं आया है. इलाकाई लोगों ने वार्ड पार्षद व बागान मालिक के साथ विचार-विमर्श करने का निर्णय लिया है.
आसिघर इलाका सिलीगुड़ी से सटा हुआ है. आसिघर का कुछ हिस्सा सिलीगुड़ी नगर निगम के 36 नंबर वार्ड के अधीन है. जबकि अधिकांश हिस्सा जलपाईगुड़ी जिला अंतर्गत डाबग्राम-2 नंबर ग्राम पंचायत के अधीन है. सिलीगुड़ी नगर निगम के 36 नंबर वार्ड के अधीन आसिघर मोड़ से 100 मीटर पहले ही बादुरबागान नामक एक स्थान है.
चमगादड़ को बांग्ला में बादुर कहा जाता है. आज से करीब 20 वर्ष पहले यहां बांस, साल व सागौन का काफी बड़ा बागान हुआ करता था. शुरूआत से ही इस बागान पर चमगादड़ों का कब्जा है. हांलाकि जनसंख्या वृद्धि के साथ इस बागान का क्षेत्र धीरे-धीरे छोटा होता चला गया.
काफी लोग बागान मालिक से जमीन खरीद कर बस गये. हांलाकि बागान के नाम पर अभी भी जमीन का एक टुकड़ा है. इस जमीन पर अभी भी बांस, साल व सागौन के साथ फल व फूल के कई अन्य पेड़ भी हैं. इस बागान में चमगादड़ों की संख्या आज भी इतनी है कि पेड़ के पत्तों से ज्यादा इनकी संख्या है.
बागान के चमगादड़ों का आकार भी काफी बड़ा है. यह बागान स्थानीय मंटू राय का है. वह पेशे से सरकारी कर्मचारी हैं. रखथोला मोड़ से आसिघर मोड़ जाने वाली सड़क के किनारे ही उनका मकान है. मकान के पीछे ही बादुर बागान भी है. इस बागान के चारों तरफ काफी आकर्षक व बहुमंजिली इमारतें भी बनी हुयी है.
बागान की अधिकांश जमीन बिकने के बाद आज भी यह बादुर बागान लैंड मार्क है. आसिघर मोड़ से अधिक लोग बादुर बागान के नाम का ही इस्तेमाल करते हैं. बल्कि डाक व कूरियर भी बादुर बागान लैंड मार्क के नाम पर आता है. बादुर बागान के पेड़ों पर दिन भर पैर के बल उल्टे लटके चमगादड़ों को देखा जा सकता है. बड़े-बड़े आकार के चमगादड़ों को देखकर ही दिल सिहर उठता है, जबकि स्थानीय लोगों को इसकी आदत हो चुकी है. इलाकाई लोगों को इन चमगादड़ों से कोई परेशानी नहीं है.
बल्कि ये चमगादड़ रात के समय स्थानीय इमारतों की छतों पर मल आदि का त्याग कर गंदगी फैलाते हैं. लेकिन फिर भी आज तक किसी ने इस बागान को समाप्त कर चमगादड़ों को खदेड़ने की आवाज नहीं उठायी. बागान मालिक ने भी आज तक चमगादड़ों को खदेड़ने की पहल नहीं की. इलाकाई लोगों का कहना है कि आसिघर मोड़ इलाके में पहले काफी बड़ा बागान हुआ करता था.
बागान के पेड़ो पर काफी चमगादड़ों का डेरा था. इलाके में घरों की संख्या बढ़ने से बागान छोटी होती चली गयी. बागान में पेड़ों की संख्या कम होने से काफी चमगादड़ भी कही अन्यत्र चले गये. लेकिन आज भी उस छोटे से बागान में चमगादड़ों का बसेरा है.
बागान की जमीन से लग कर ही मनेश्वर सिंह, मंटू राय, विकास राय आदि का घर है. पोस्ट मैन से रिटायर्ड मनेश्वर सिंह ने बताया कि वे करीब बीस वर्ष पहले यहां आकर बसे थे. उस समय यहां काफी बड़ा बागान था. धीरे-धीरे लोग बसने लगे और बागान छोटा हो गया. बागान के पेड़ो पर काफी संख्या में चमगादड़ों का कब्जा होने की वजह से इस बागान को बादुर बागान नाम दे दिया गया.
छोटा होने के बाद भी बागान की पेड़ो पर चमगादड़ों का बसेरा है. उन्होंने बताया कि बागान के चमगादड़ों से इलाकाई लोगों को कोई परेशानी नहीं है, बस ये अपना मल आदि का त्याग कर मकान की छत व आंगन को गंदा करते हैं.
दिन भर बागान के पेड़ो पर रहते हैं और शाम होते ही चारे की तलाश में निकल जाते हैं. फिर सुबह के चार बजे से पहले वापस लौट आते हैं. वर्तमान समय में निपाह वायरस का आतंक पूरे देश में फैला हुआ है. निपाह का वायरस सुअर व चमगादड़ से फैलता है. चमगादड़ द्वारा खाये हुए फल व उसके मल से निपाह का वायरस फैलता है.
इससे इलाके के लोगों में एक आतंक तो बना हुआ है. लेकिन निपाह का प्रकोप अब तक सामने नहीं आया है. हांलाकि पिछले कई वर्षों से भी इलाकाई लोगों ने चमगादड़ों को खदेरने के लिए कोई पहल भी नहीं किया.
स्थानीय वार्ड पार्षद आलोक भक्ता ने बताया कि यह बादुर बागान काफी पुराना है. इस बागान से चमगादड़ों को खदेरने के लिए बागान की सभी पेड़ो को काटना होगा. हांलाकि अब तक इलाके में निपाह वायरस के पीड़ित होने का एक भी मामला सामने नहीं आया है. फिर भी बागान मालिक व इलाकाई लोगों के साथ विचार-विमर्श किया जायेगा. साथ ही सिलीगुड़ी नगर निगम व वन विभाग से भी विचार कर कदम उठाया जायेगा.
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