बंद बागानों को स्वनिर्भर समूहों के जरिये करें चालू

Published at :27 Dec 2017 4:19 AM (IST)
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बंद बागानों को स्वनिर्भर समूहों के जरिये करें चालू

प्रस्ताव. आइकार्ड का चाय परिषद व राज्य सरकार से आग्रह बंद बागानों को बांट कर शुरू किया जायेगा काम जलपाईगुड़ी : को-ऑपरेटिव नहीं, अब डुआर्स के बंद चाय बागानों को स्वनिर्भर समूह (एसएचजी) के जरिए चालू किया जाएगा. इस संबंध में एक निजी संस्था ने प्रस्ताव दिया है. आई कार्ड नामक यह निजी संस्था बड़े […]

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प्रस्ताव. आइकार्ड का चाय परिषद व राज्य सरकार से आग्रह

बंद बागानों को बांट कर शुरू किया जायेगा काम
जलपाईगुड़ी : को-ऑपरेटिव नहीं, अब डुआर्स के बंद चाय बागानों को स्वनिर्भर समूह (एसएचजी) के जरिए चालू किया जाएगा. इस संबंध में एक निजी संस्था ने प्रस्ताव दिया है. आई कार्ड नामक यह निजी संस्था बड़े चाय बागानों को बांटकर कई स्वनिर्भर समूह के माध्यम से चालू रखने के लिए भारतीय चाय परिषद व राज्य सरकार से लिखित आवेदन किया. बंद चाय बागान को चालू करने के लिए पूर्व विधायक देव प्रसाद राय के ऑल इंडिया सेंटर फार अर्बन एंड रूरल डेवलपमेंट ने यह पहल की.
मंगलवार को जलपाईगुड़ी चाय नीलाम केंद्र में स्टेक होल्डर मीट ऑन क्लोज्ड टी गार्डेंस शीर्षक पर यह चर्चा हुई. डुआर्स के जलपाईगुड़ी व अलीपुरद्वार के बंद चाय बागानों को किस तरह से चालू किया जाये इसे लेकर बागान के मालिक, विभिन्न श्रमिक संगठन, चाय परिषद के अधिकारियों को लेकर एक बैठक की गई.
वर्तमान में कुमलाई, रेड बैंक, धरनीपुर, सुरेंद्रनगर, बांदापानी, ढेकलापाड़ा बागान बंद है. जलपाईगुड़ी व अलीपुरद्वार के पूर्व विधायक देव प्रसाद राय ने कहा कि ऑल इंडिया सेंटर फार अर्बन एंड रूरल डेवलॉमेंट नामक संस्था सोशल सेक्टर में काम करती है. बंद चाय बागानों को खोलने के लिए बंद टी बोर्ड को प्रस्ताव दिया गया है.
चुंकि ये चाय बागान पंचायत के अंतर्गत आते हैं इसलिए बंद चाय बागानों को छोटे चाय बागानों में तब्दील कर स्वनिर्भर समूह को दिया जा सकता है या नहीं इस पर चर्चा की गई. इस योजना में महिलाओं के पास बागान का मालिकाना होगा और पुरुष बागान में काम करेंगे. इसमें सामाजिक लागत की आवश्यकता नहीं है केवल पीएफ की व्यवस्था ही काफी होगी. इस संबंध में जल्द ही चाय परिषद को रिपोर्ट जमा की जाएगी.
नियम के मुताबिक आगे बढ़ेंगे : डिप्टी डायरेक्टर : मंगलवार को भारतीय चाय परिषद के उत्तर बंगाल के डिप्टी डायरेक्टर चंद्र शेखर मित्र ने बताया कि बंद चाय बागान को खोले जाने को लेकर एक संस्था ने प्रस्ताव दिया है. वे एक रिपोर्ट देंगे इसके बाद हम नियम के मुताबिक आगे बढ़ेंगे. कांग्रेस के एनयूपीडब्लू के राज्य संयुक्त सचिव मनि कुमार दर्नाल ने बताया कि राज्य व केंद्र सरकार इस समय बंद चाय बागान को खोलने को लेकर कोई पहल नहीं कर रही है.
इसलिए यह प्रस्ताव तर्कसंगत है. टी एसोसिएशन आफ नार्थ बंगाल सचिव राम अवतार शर्मा ने बताया कि यह प्रस्ताव कितना लाभदायक होगा इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. कन्फेडरेशन आफ इंडियन स्मॉल टी एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गोपाल चक्रवर्ती ने बताया कि लघु चाय बागानों को टी बोर्ड अनेक सुविधाएं दे रही है. इसलिए बंद बागान को लेकर इस पहल का स्वागत है. हालांकि स्वनिर्भर समूह के माध्यम से बागान संचालित होने पर अन्य सामाजिक सुरक्षा या सुविधाएं समूह के सदस्य या श्रमिकों को नहीं मिलेगी, लेकिन पीएफ की सुविधा होगी. इन विषयों को लेकर चर्चा की जाएगी.
ढेकलापाड़ा से काम शुरू करने का इरादा
एक बंद चाय बागान की कुल जमीन यदि 400 एकड़ है तो इस जमीन को कई भागों में बांटने पर बागान के संचालन में सुविधा होगी. टी बोर्ड से भी सरकारी राशि की मदद मिलेगी. प्रायोगिक तौर पर यह प्रयास किया गया है. चार बागानों का सर्वे किया गया. ढेकलापाड़ा में पहले इस परियोजना के माध्यम से काम शुरू करने का इरादा है. बंद चाय बागान को स्वनिर्भर समूह के माध्यम से खोले जाने पर विकल्प दिशा मिलेगी. देवप्रसाद राय ने बताया कि ढेकलापाड़ा चाय बागान में 35 स्वनिर्भर समूह है.
इन बंद पांच चाय बागानों में से चार चाय बागानों में सर्वे कर पाया गया कि यहां स्वनिर्भर समूह के माध्यम से चाय बागान चलाना संभव है. ढेकलापाड़ा में 400 एकड़ जमीन है. 35 स्वनिर्भर समूह के माध्यम से 400 एकड़ जमीन बांटकर चाय बागान चलाया जा सकता है या नहीं इसे लेकर बातचीत चल रही है. इस संबंध में टी बोर्ड को प्रस्ताव दिया जा रहा है.
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