डुआर्स के आदिवासियों को साथ लेने में जुटा मोर्चा

Published at :10 Aug 2017 8:49 AM (IST)
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डुआर्स के आदिवासियों को साथ लेने में जुटा मोर्चा

सिलीगुड़ी. गोरखालैंड राज्य को लेकर चल रहा आंदोलन एक ऐसे नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है, जो पहाड़ के प्रमुख राजनैतिक दल गोजमुमो के नेतृत्व के लिए भी चुनौतीपूर्ण है. मोर्चा अब राज्य और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए अपने आंदोलन को तराई और डुवार्स क्षेत्र में ले जाना चाह रहा है. लेकिन […]

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सिलीगुड़ी. गोरखालैंड राज्य को लेकर चल रहा आंदोलन एक ऐसे नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है, जो पहाड़ के प्रमुख राजनैतिक दल गोजमुमो के नेतृत्व के लिए भी चुनौतीपूर्ण है. मोर्चा अब राज्य और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए अपने आंदोलन को तराई और डुवार्स क्षेत्र में ले जाना चाह रहा है. लेकिन डुवार्स में मोर्चा की मुहिम तभी सफल होगी जब उसे वहां के आदिवासियों का साथ मिले. इसे देखते हुए मोर्चा ने आदिवासी समुदाय को लुभाने का प्रयास किया है.

कहा है कि गोरखालैंड राज्य गठन होने पर डुवार्स के आदिवासियों के लिए भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत इंडीजेनस ट्राइबल डेवलपमेंट बोर्ड का गठन करेंगे. हालांकि इस प्रस्ताव का समर्थन अभी तक किसी भी आदिवासी संगठन ने खुलकर नहीं किया है. इसके उलट आदिवासी विकास परिषद (आविप) के राज्य अध्यक्ष बिरसा तिर्की ने स्पष्ट शब्दों में मोर्चा का नाम लिए बिना चेतावनी दी है कि यदि 2010 की तरह डुवार्स और तराई को अशांत करने का प्रयास किया गया, तो आदिवासी उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे.उल्लेखनीय है कि 2010 में गोजमुमो के नेतृत्व में डुवार्स और तराई क्षेत्र में गोरखालैंड राज्य गठन के लिए और साथ ही जीटीए में संकोश से लेकर मेची नदी तक के क्षेत्र को जीटीए में शामिल कराने के लिए आंदोलन किया गया था.

उस समय आविप के नेतृत्व में गोरखालैंड आंदोलन के खिलाफ आंदोलन किया गया था. उसी दौरान कई जगह जातीय हिंसा की घटनाएं भी हुईं, जिनमें कई मोर्चा समर्थकों की मृत्यु हो गयी थी. कई लोगों के घर भी जलाये गये थे. 2010 में आदिवासी विकास परिषद के विक्षुब्ध नेता जॉन बारला ने गोरखालैंड आंदोलन का समर्थन किया था. इस मुद्दे पर आदिवासी विकास परिषद में विभाजन की स्थिति भी बन गयी थी. बाद में जॉन बारला अपने समर्थकों के साथ आविप से अलग हो गये थे. लेकिन इस बार जॉन बारला भी खुल कर गोरखालैंड के समर्थन में नहीं आ रहे हैं. इसका एक कारण उनका भाजपा में होना भी हो सकता है.

इस बीच, खुफिया खबरों के मुताबिक गोरखालैंड आंदोलन में विदेशी ताकतों के दखल की खबर से प्रशासन चौंकन्ना है. एक नेपाली नागरिक को सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस गिरफ्तार भी कर चुकी है. पुलिस और शासन-प्रशासन को डर सता रहा है कि आंदोलन सशस्त्र और हिंसक रूप न ले ले.
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और विधायक शंकर मालाकार ने भी पहाड़ के आंदोलन को लेकर चिंता जाहिर की है. उनका कहना है कि यदि जल्द से जल्द इस आंदोलन का कोई राजनैतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन की दिशा व दशा बदल सकती है. इसलिए उन्होंने राज्य व केन्द्र सरकार से राजनैतिक समाधान के लिए पहल करने का अनुरोध किया. उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि दार्जिलिंग का पार्वत्य क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र से करीब है और वर्तमान में सिक्किम के भारत-चीन के बीच तनातनी का माहौल है, इसलिए इस मसले का देशहित में जल्द से जल्द निपटारा होना चाहिए.
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