कौन हैं नंदीग्राम के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने ममता बनर्जी को 2 बार हराया और ढाह दिया टीएमसी का अभेद्य किला

Who is Suvendu Adhikari: शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. नंदीग्राम और भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराने वाले शुभेंदु के राजनीतिक सफर, आरएसएस कनेक्शन और टीएमसी छोड़ने की पूरी कहानी पढ़ें.
Who is Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की सत्ता के शिखर पर अब एक नया चेहरा बैठने जा रहा है. शुक्रवार को जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुभेंदु अधिकारी को भाजपा विधायक दल का नेता घोषित किया, तो यह बंगाल की राजनीति में एक नये युग की आधिकारिक शुरुआत थी. शनिवार को शुभेंदु बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे.
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें राज्य के सबसे शक्तिशाली पद तक ले आया है. आखिर शुभेंदु अधिकारी में ऐसा क्या है, जिसने उन्हें भाजपा का ‘पोस्टर ब्वॉय’ बना दिया और कैसे उन्होंने ममता बनर्जी के 15 साल के साम्राज्य को चुनौती दी? आइए, जानते हैं इस ‘भूमिपुत्र’ की पूरी कहानी.
ममता को उन्हीं के घर में दी शिकस्त
शुभेंदु अधिकारी की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी 2 बड़ी जीत की वजह से मजबूत हुई.
- नंदीग्राम का संग्राम (2021): शुभेंदु ने पहली बार ममता बनर्जी को उनके गढ़ नंदीग्राम में हराकर दुनिया को चौंका दिया था.
- भवानीपुर का किला (2026): इस बार उन्होंने ममता बनर्जी को उनके ‘अभेद्य’ कहे जाने वाले घर भवानीपुर में हराकर यह साबित कर दिया कि बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है.
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संघ की शाखा से सियासत के शिखर तक
शुभेंदु अधिकारी का व्यक्तित्व और उनकी जड़ें पूरी तरह से बंगाल की मिट्टी से जुड़ी हैं.
- पारिवारिक पृष्ठभूमि : 15 दिसंबर 1970 को पूर्व मेदिनीपुर के कारकुली में जन्मे शुभेंदु अधिकारी दिग्गज नेता शिशिर अधिकारी के पुत्र हैं. उनकी शुरुआती शिक्षा कोंटाई में हुई और उन्होंने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए किया.
- आरएसएस का प्रशिक्षण : कम ही लोग जानते हैं कि शुभेंदु ने अपने शुरुआती वर्षों में आरएसएस (RSS) की शाखाओं में प्रशिक्षण लिया था, जिसने उनके भीतर अनुशासन और सांगठनिक कौशल भरा.
- शुरुआती राजनीति : उन्होंने 1980 के दशक में कांग्रेस के छात्र संगठन से शुरुआत की और 1995 में पहली बार पार्षद बने. 2007 के नंदीग्राम आंदोलन ने उन्हें बंगाल की राजनीति का ‘स्टार’ बना दिया.
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क्यों बढ़ी ‘दीदी’ से दूरी?
कभी ममता बनर्जी के सबसे खास और उनके उत्तराधिकारी माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी के मोहभंग की कहानी वर्ष 2011 में शुरू हुई थी. ममता ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राजनीति में उतारा, तो शुभेंदु को लगा कि पार्टी में प्रतिभा की जगह परिवारवाद ले रहा है. वे ममता सरकार में परिवहन और पर्यावरण मंत्री रहे, लेकिन 2020 के अंत में उन्होंने टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया. उन्होंने खुद को एक समावेशी नेता से ‘हिंदुत्व ब्रिगेड’ के प्रतीक के रूप में ढाला.
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सड़क से सदन तक संघर्ष करने वाले आंदोलनकारी नेता
शुभेंदु ने विपक्ष के नेता के रूप में खुद को तपाया. विधानसभा में ममता सरकार को घेरने के कारण उन्हें कई बार निलंबित किया गया. फरवरी 2025 में उन्हें 30 दिनों के लिए प्रतिबंधित किया गया था. एसएससी (SSC) भर्ती घोटाला, संदेशखाली कांड और आरजी कर अस्पताल की घटना पर उन्होंने सड़कों पर उतरकर जनता के गुस्से को नेतृत्व दिया.
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Who is Suvendu Adhikari: शाह की शर्तों पर खरे उतरे शुभेंदु
अमित शाह की उन शर्तों पर शुभेंदु पूरी तरह खरे उतरते हैं कि बंगाल का सीएम वही होगा, जो यहां जन्मा हो. बांग्ला में पढ़ा हो और जिसमें बंगाल की संस्कृति रची-बसी हो. शनिवार को जब शुभेंदु अधिकारी शपथ लेंगे, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक साधारण कार्यकर्ता के असाधारण संघर्ष का सम्मान होगा.
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By Mithilesh Jha
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