जम्मू-कश्मीर में पश्चिम बंगाल के रहने वाले दो पैरा कमांडो शहीद

Published by : GANESH MAHTO Updated At : 12 Oct 2025 1:17 AM

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उनका साहस और समर्पण हमें हमेशा प्रेरित करता रहेगा. हम शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं और उनकी भलाई के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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कोलकाता. जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के किश्तवाड़ रेंज में आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान भारतीय सेना के दो वीर जवान शहीद हो गये. दोनों पश्चिम बंगाल के निवासी थे. शहीद लांस हवलदार पलाश घोष (38) और शहीद लांसनायक सुजय घोष (28) दुर्गम पहाड़ी इलाके, खराब मौसम और बर्फीले तूफान के बावजूद डटे रहे और देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गये. भारतीय सेना के चिनार कोर ने इस अभियान की जानकारी साझा करते हुए अपने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी. भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर लिखा कि चिनार कोर, किश्तवाड़ रेंज में अत्यधिक खराब मौसम की स्थिति से जूझ कर आतंकवाद रोधी अभियान चलाते हुए बहादुर लांस हवलदार पलाश घोष और लांसनायक सुजय घोष के सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करता है. उनका साहस और समर्पण हमें हमेशा प्रेरित करता रहेगा. हम शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं और उनकी भलाई के लिए प्रतिबद्ध हैं. किश्तवाड़ रेंज दक्षिण कश्मीर का बेहद कठिन और संवेदनशील इलाका है. पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में आतंकियों की आवाजाही और घुसपैठ की कई कोशिशें हुई हैं. भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्द्धसैनिक बल लगातार आतंकवाद गतिविधियों को रोकने के लिए संयुक्त अभियान चला रहे हैं. घने जंगल, बर्फीले रास्ते और ऊंचे-नीचे पहाड़ी इलाके के बावजूद सैनिकों ने असाधारण साहस का परिचय दिया. सेना के अनुसार, लांस हवलदार पलाश घोष कई सफल अभियानों का हिस्सा रह चुके थे. वहीं लांस नायक सुजय घोष युवा और उत्साही सैनिक थे, जिन्होंने हर ऑपरेशन में अदम्य साहस और समर्पण दिखाया. दुर्गम इलाके और कड़ाके की ठंड के बावजूद सेना ने तलाशी अभियान को अंजाम दिया. दोनों कमांडो पांचवीं पैरा यूनिट से थे. मुर्शिदाबाद के रुकुनपुर गांव के निवासी पलाश दुर्गापूजा की षष्ठी के दिन छुट्टी काटकर फिर से अपने कार्यस्थल पर लौटकर विशेष ऑपरेशन में शामिल हुए थे. उनके बड़े भाई मृगांक घोष ने कहा कि उनके भाई हमेशा ही देश की रक्षा के लिए तत्पर रहते थे. बर्फीले तूफान के बीच दोनों जवान अचानक लापता हो गये थे. सेना ने दोनों की तलाश शुरू की. पलाश को बर्फ में दबा पाया गया, लेकिन उन्हें अस्पताल ले जाने के बाद भी बचाया नहीं जा सका. बाद में सुजय के शव को भी बर्फ से बाहर निकाला गया. वह बीरभूम के राजनगर कुंडिरा के निम्न-मध्यम परिवार से थे. उनके पिता एक किसान हैं और घर पर दादा मौजूद थे. सुजय ने वर्ष 2018 में सेना में भर्ती होकर पैरा कमांडो पांचवें ग्रुप में सेवा दी. दोनों जवानों की असामयिक मृत्यु से बंगाल में शोक की लहर फैल गयी है. उनके परिवार और सेना के सभी साथियों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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