बंगाल में भोजूडीह कोल वॉशरी शुरू, इस्पात उद्योग को मिलेगा देसी कोकिंग कोयला, आयात पर खर्च होने वाले अरबों रुपए बचेंगे

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 27 May 2026 9:12 PM

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Coking Coal Washery West Bengal: कोल इंडिया की इकाई BCCL ने पश्चिम बंगाल में 20 लाख टन क्षमता वाली भोजूडीह कोकिंग कोल वॉशरी का परिचालन शुरू कर दिया है. इससे इस्पात उद्योग को सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी कोयले की आपूर्ति होगी और आयात घटेगा.

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Coking Coal Washery West Bengal: भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक क्षेत्र के लिए पश्चिम बंगाल से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आयी है. कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की प्रमुख इकाई भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने राज्य में अपनी अत्याधुनिक भोजूडिह कोकिंग कोयला वॉशरी में व्यावसायिक परिचालन (Commercial Operations) शुरू करने का औपचारिक ऐलान कर दिया है. 20 लाख टन सालाना क्षमता वाली इस वॉशरी के शुरू होने से अब भारतीय इस्पात (Steel) उद्योग को उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले के लिए पूरी तरह विदेशों पर निर्भर नहीं रहना होगा.

26 मई से भोजूडीह में काम शुरू, इस्पात क्षेत्र को मिली नयी ताकत

बीसीसीएल ने शेयर बाजार (BSE) को दी गयी अपनी आधिकारिक सूचना में पुष्टि की है कि भोजूडीह कोयला वॉशरी ने 26 मई, 2026 से अपना व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है. इस्पात उत्पादन में कोकिंग कोयला एक अनिवार्य कच्चा माल है, जिसकी धुलाई और गुणवत्ता सुधारने में यह नयी सुविधा मील का पत्थर साबित होगी.

  • विदेशी मुद्रा की बचत : वर्तमान में भारत अपनी कोकिंग कोयले की जरूरतों के लिए आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है. स्वदेशी वॉशरी शुरू होने से इस खर्च में बड़ी कटौती होगी.
  • बनाओ, चलाओ और देखरेख करो (BOM) मॉडल : इस वॉशरी का निर्माण और संचालन आधुनिक बीओएम मॉडल के तहत किया गया है, जो कुशलता और गुणवत्ता सुनिश्चित करता है.
  • तीन-उत्पाद तकनीक : यह एक मध्यम क्षमता वाली 3-प्रोडक्ट वॉशरी है, जो कच्चे कोयले को साफ कर उसे इस्पात कारखानों के उपयोग के लायक बनायेगी.

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क्यों खास है भोजूडीह वॉशरी?

पश्चिम बंगाल के औद्योगिक मानचित्र पर भोजूडीह का स्थान हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन इस नयी वॉशरी की शुरुआत ने इसे ग्लोबल स्टैंडर्ड के करीब खड़ा कर दिया है.

  • सालाना 20 लाख टन क्षमता : यह संयंत्र हर साल 20 लाख टन कच्चे कोयले की धुलाई करने में सक्षम है, जिससे गुणवत्तापूर्ण कोकिंग कोयले की निरंतर आपूर्ति बनी रहेगी.
  • आत्मनिर्भरता : यह कदम केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देता है, क्योंकि कोकिंग कोयले का घरेलू उत्पादन बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) के झटकों से भारतीय स्टील सेक्टर सुरक्षित रहेगा.
  • रोजगार के अवसर : वॉशरी के पूर्ण परिचालन से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नये अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

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कोल इंडिया की यह पहल सीधे तौर पर उन देशों के बाजार को प्रभावित करेगी, जहां से भारत भारी मात्रा में कोकिंग कोयला मंगवाता है. बंगाल की मिट्टी से निकलने वाला कोयला जब आधुनिक तकनीक से धुलेगा, तो उसकी राख (Ash Content) कम होगी और कैलोरी मान बढ़ेगा. यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इस्पात निर्माण की लागत को भी कम करेगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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