अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को बंगाल का करारा जवाब- मदर टेरेसा नहीं, अब मां काली का शहर है कोलकाता

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 27 May 2026 6:30 PM

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Marco Rubio Kolkata Comment: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा कोलकाता को ‘मदर टेरेसा का शहर’ कहे जाने पर बहस छिड़ गयी है. बंगाल के बुद्धिजीवियों और नयी सरकार के समर्थकों का कहना है कि कोलकाता की असली पहचान मां काली से है. रूबियो को अपना ज्ञान अपडेट करने की सलाह दी गयी है.

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Marco Rubio Kolkata Comment: अमेरिका के नवनियुक्त विदेश मंत्री मार्को रूबियो के एक पुराने संदर्भ को लेकर कोलकाता में नयी बहस छिड़ गयी है. रूबियो ने अपने एक बयान में कोलकाता को ‘मदर टेरेसा का शहर’ कहकर संबोधित किया था. इस पर अब बंगाल के बौद्धिक और राजनीतिक हलकों से तीखी प्रतिक्रिया आ रही है.

मिशनरीज ऑफ चैरिटी बंगाल की पहचान नहीं

जानकारों के साथ-साथ स्थानीय लोगों का कहना है कि रूबियो को अपनी जानकारी अपडेट करने की जरूरत है. पश्चिम बंगाल में हुए हालिया सत्ता और वैचारिक परिवर्तन के बाद अब कोलकाता अपनी प्राचीन आध्यात्मिक जड़ों की ओर लौट आया है. अब यह शहर मिशनरीज ऑफ चैरिटी की बजाय अपनी संरक्षक देवी ‘मां काली’ के शहर के रूप में अपनी वैश्विक पहचान को फिर से स्थापित कर रहा है.

मार्को रूबियो का वो बयान, जिस पर मचा बवाल

अमेरिकी राजनीति के कद्दावर नेता मार्को रूबियो ने भारत के साथ संबंधों और मानवता की सेवा का जिक्र करते हुए कोलकाता को मदर टेरेसा की विरासत से जोड़ा था. हालांकि, यह संबोधन पश्चिमी देशों में दशकों से प्रचलित रहा है, लेकिन आज के बदलते बंगाल में इसे ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ और ‘एकतरफा पहचान’ के रूप में देखा जा रहा है.

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पहचान का संकट और सांस्कृतिक पुनर्जागरण

कोलकाता के लोगों का तर्क है कि मदर टेरेसा का काम महान था, लेकिन इस शहर का इतिहास और आत्मा हजारों साल पुरानी शक्ति उपासना और मां काली से जुड़ी है. राज्य में नयी सरकार के गठन और दक्षिणेश्वर से लेकर कालीघाट तक के जीर्णोद्धार ने इस नैरेटिव को और मजबूत किया है कि कोलकाता की असली पहचान उसकी अपनी संस्कृति है.

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मदर टेरेसा बनाम मां काली : नैरेटिव में बड़ा बदलाव

पिछले कुछ वर्षों में कोलकाता की सार्वजनिक छवि में एक बड़ा बदलाव आया है. दक्षिणेश्वर और कालीघाट मंदिर अब केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बंगाल की अस्मिता के प्रतीक बन गये हैं. पर्यटन विभाग और सांस्कृतिक संस्थाएं अब कोलकाता को ‘काली क्षेत्र’ के रूप में प्रचारित कर रही हैं.

पश्चिमी चश्मे का स्थानीय लोगों ने शुरू किया विरोध

स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि पश्चिम हमेशा भारत को गरीबी और सेवा (जिसका प्रतिनिधित्व मदर टेरेसा करती थीं) के नजरिये से देखना चाहता है, जबकि मां काली शक्ति, न्याय और संहार की प्रतीक हैं, जो उभरते भारत की नयी सोच को दर्शाता है.

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Marco Rubio Kolkata Comment: अमेरिकी विदेश मंत्रालय को ‘फैक्ट चेक’ की सलाह

सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा जोरों पर है कि जब मार्को रूबियो जैसा बड़ा नेता अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बात करता है, तो उसे संबंधित स्थान की वर्तमान भावनाओं का सम्मान करना चाहिए. 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल की राजनीतिक दिशा बदलने के साथ-साथ सांस्कृतिक प्राथमिकताओं में भी बड़ा फेरबदल हुआ है. जानकारों कहते हैं कि जिस शहर का नाम ही कालीकाटा (मां काली के नाम पर) से निकला हो, उसे किसी विदेशी मिशनरी के नाम से पहचानना उसके मूल इतिहास के साथ अन्याय है.

शक्ति की भूमि पर नयी राजनीति

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने भी शक्ति उपासना और स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों को बढ़ावा देने की बात कही है. ऐसे में रूबियो का बयान उन लोगों को रास नहीं आ रहा है, जो बंगाल को ‘क्रांतिकारियों और शक्ति’ की धरती मानते हैं. कोलकाता अब यह संदेश दे रहा है कि यह City of Joy के साथ-साथ City of Shakti भी है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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