राज्य स्वास्थ्य विभाग की पहल : बाल यौन उत्पीड़न की पहचान पर चिकित्सकों को प्रशिक्षण

Published by : GANESH MAHTO Updated At : 24 Dec 2025 1:35 AM

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इसमें जिला अस्पतालों और ब्लॉक प्राइमरी हेल्थ सेंटर में कार्यरत चिकित्सकों को बाल यौन उत्पीड़न की पहचान, जांच और कानूनी प्रक्रिया से अवगत कराया गया.

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जिला व ब्लॉक स्तर के डॉक्टरों को दी गयी पॉक्सो मामलों की जानकारी

कोलकाता. बाल अवस्था में लड़कियों के साथ-साथ लड़कों का भी यौन उत्पीड़न होता है और यह एक गंभीर सामाजिक व कानूनी विषय है. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार को चिकित्सकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इसमें जिला अस्पतालों और ब्लॉक प्राइमरी हेल्थ सेंटर में कार्यरत चिकित्सकों को बाल यौन उत्पीड़न की पहचान, जांच और कानूनी प्रक्रिया से अवगत कराया गया.

पॉक्सो एक्ट और सख्त सजा की जानकारी

राज्य के हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर निदेशक प्रो डॉ कौस्तव नायक ने बताया कि पॉक्सो एक्ट को पहले से अधिक सख्त किया गया है. बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों में न्यूनतम सात से दस साल की जेल हो सकती है, जबकि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के साथ अपराध पर 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी जिला और सब-डिविजनल अस्पतालों में पोस्टर लगाये जायेंगे.

समय पर जांच और जागरूकता पर जोर

डॉ कौस्तव नायक ने कहा कि किसी भी बच्चे के साथ शारीरिक शोषण की आशंका होने पर तुरंत मेडिकल और फोरेंसिक जांच करानी चाहिए तथा पुलिस को सूचना देनी चाहिए. घटना के तीन-चार दिन के भीतर जांच जरूरी है. प्रो डॉ सोमनाथ दास ने बताया कि 72 घंटे बाद सबूत नष्ट होने की आशंका रहती है. जांच से पहले परिवार की सहमति लेना अनिवार्य है. वर्कशॉप में चिकित्सकों को बच्चों के असामान्य व्यवहार को पहचानने और संवेदनशील तरीके से बातचीत करने की भी जानकारी दी गयी.

फोरेंसिक सुविधा की कमी बनी चुनौती

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फोरेंसिक विभाग उपलब्ध होने के कारण वहां विशेषज्ञ जांच करते हैं, लेकिन जिला और सब-डिविजनल अस्पतालों में यह सुविधा नहीं होती. ऐसे मामलों में मेडिकल ऑफिसरों को ही बच्चों के साथ हुए यौन उत्पीड़न की जांच करनी पड़ती है. पर्याप्त प्रशिक्षण के अभाव को देखते हुए स्वास्थ्य भवन में यह शिविर आयोजित किया गया. प्रशिक्षण बांकुड़ा मेडिकल कॉलेज के प्रो डॉ सोमनाथ दास और मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज के प्रो डॉ साहेब शोभन दत्ता ने दिया.

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