तसलीमा नसरीन को कोलकाता में रहने के लिए मिलेगा घर, शुभेंदु अधिकारी का ऐलान

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कोलकाता में तसलीमा नसरीन को सम्मानित करते बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी.

कोलकाता में तसलीमा नसरीन को सम्मानित करते बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी.

तसलीमा नसरीन का 19 साल का इंतजार खत्म हुआ. वह कोलकाता लौटीं और यहां मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें वो सब कुछ दे दिया, जो वह चाहतीं थीं. सुरक्षा के साथ-साथ कोलकाता में आवास का भी आश्वासन मुख्यमंत्री ने बांग्लादेशी मूल की लेखिका को दिया.

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Taslima Nasrin Returns Kolkata: दो बार निर्वासन का दर्द झेल चुकीं बांग्लादेशी मूल की प्रसिद्ध लेखिका और कवियित्री तसलीमा नसरीन का 19 साल लंबा इंतजार शनिवार को खत्म हुआ. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह जब चाहें, तब कोलकाता आ सकतीं हैं. जितनी बार चाहें, उतनी बार कोलकाता आ सकतीं हैं. उनकी सुरक्षा की जिम्मेवारी राज्य सरकार की होगी. शुभेंदु अधिकारी ने तसलीमा नसरीन के लिए वो सब बातें कहीं, जो बंगाल के 2 पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता बनर्जी नहीं कर सके. अधिकारी ने कोलकाता में नसरीन के लिए आवास के इंतजाम का भी आश्वासन दिया.

शुभेंदु के 6 मिनट का संबोधन और तालियों की गूंज

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 6 मिनट के अपने संबोधन में तसलीमा नसरीन को आश्वस्त किया कि उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही है. मुख्यमंत्री के इतना कहते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा. इसके साथ ही लेखिका के लिए कोलकाता में एक स्थायी आवास की मांग भी लोगों ने उठायी. इस पर चीफ मिनिस्टर ने आश्वासन दिया कि वह तसलीमा नसरीन के लिए कोलकाता में घर की व्यवस्था करेंगे.

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बुद्धदेव और ममता को तसलीमा ने लिखी थी चिट्ठी

अगस्त 2009 में न्यू यॉर्क जाने से पहले तसलीमा नसरीन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को 2 पन्नों का और उनकी उत्तराधिकारी ममता बनर्जी को 1 पन्ने का पत्र लिखकर कोलकाता लौटने की गुहार लगायी थी. हालांकि, दोनों में से किसी ने भी उनके पत्र का जवाब नहीं दिया. शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेशी लेखिका को वह आश्वासन दिया, जो वह चाहतीं थीं.

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‘मैं 19 साल तक कोलकाता से पूछती रही- मेरा कसूर क्या था?’

संबोधन के समय तसलीमा नसरीन कुछ देर के लिए भावुक हो गयीं. उन्होंने कहा- इन 19 सालों में मैं कोलकाता से पूछती रही कि मेरा क्या कसूर था? मुझे क्यों जाना पड़ा? आज मैं कोई जवाब मांगने नहीं आयी हूं. मैं यह कहने आयी हूं कि मैं लौट आयी हूं. मेरी आंखों में आंसू हैं, सीने में बहुत दर्द है, लेकिन प्यार भी है. इस शहर ने मुझे रुलाया, मुझे जाने पर मजबूर किया, लेकिन इतने सालों तक मैंने एक दिन लौटने का सपना संजोकर रखा. 19 साल मेरे जाने और आने के बीच खड़े रहे, लेकिन इस दरवाजे का खुलना साबित करता है कि अन्याय लंबा तो हो सकता है, पर स्थायी कभी नहीं.

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बीजेपी नेताओं की मौजूदगी और बदलती राजनीति

कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित ऐतिहासिक कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता मौजूद थे. इनमें वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता, नगर विकास मंत्री अग्निमित्र पॉल, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कल्याण चक्रवर्ती और पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष तथागत रॉय शामिल थे.

तसलीमा के लिए अग्निमित्रा पॉल ने पढ़ी कविता

कार्यक्रम के दौरान मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बेघर लेखिका के लिए खुद द्वारा रचित एक कविता का पाठ किया. वहीं, स्वपन दासगुप्ता ने दिल्ली में तसलीमा के पड़ोसी रहने के दिनों को याद किया. इस समारोह के साथ ही कोलकाता में तसलीमा नसरीन को अपना घर मिलने और शहर द्वारा उन्हें एक बार फिर से अपनाये जाने की नयी उम्मीद जगी है.

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किसने किया था सम्मान समारोह का आयोजन?

कार्यक्रम राज्य का आयोजन सरकार ने नहीं, लेखिका की वापसी के लिए संघर्ष कर रहे विभिन्न संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों के एक समूह ने किया था. मंच से उन्हें यह भरोसा दिया गया कि अब कोलकाता में उनका स्वागत है. वे यहां निर्भीक होकर रह सकती हैं.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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