एसआईआर में कई अहम मुद्दे बेअसर, तृणमूल-भाजपा के लिए अस्तित्व की लड़ाई

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SIR Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया ने तमाम चुनावी मुद्दों को पीछे छोड़ दिया है. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का पूरा फोकस इस बार एसआईआर पर ही है. ममता बनर्जी से लेकर अभिषेक बनर्जी तक, सड़क से लेकर संसद तक इसी मुद्दे पर बात हो रही है.

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SIR Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे. मौजूदा चुनाव अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच होने की संभावना बनती दिख रही है. इस मुकाबले में वामदल और कांग्रेस हाशिये पर जा चुके हैं. भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा तृणमूल के सहयोगी के तौर पर दार्जिलिंग की 3 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है.

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सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए तृणमूल ने उतारे नये चेहरे

लगातार 15 साल से बंगाल की सत्ता पर काबिज तृणमूल कंग्रेस ने इस बार सत्ता-विरोधी लहर से बचने के लिए नये चेहरों को मैदान में उतारा है. 74 विधायकों के टिकट काट दिये हैं. 2021 के चुनाव में तृणमूल ने 48.02 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 215 सीटें जीतीं थीं. भाजपा को 38 प्रतिशत वोट मिले थे. उसने 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी. 2016 के मुकाबले बीजेपी ने बड़ी छलांग लगायी थी. जब भाजपा ने 3 सीटें जीतीं थीं, तब उसे महज 10.2 प्रतिशत वोट मिले थे. 2021 में उसके वोट में करीब 28 प्रतिशत का इजाफा हुआ.

भवानीपुर में मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने बंगाल के लीडर ऑफ ऑपोजीशन शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतार दिया है. 2021 में ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से उपचुनाव जीतकर विधायक बनीं थीं. तब तृणमूल कांग्रेस तो पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटी थी, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी से 1,956 वोटों से हार गयीं थीं.

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2026 चुनाव में एसआईआर बना बड़ा मुद्दा

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वजह से 2026 के बंगाल चुनाव की तैयारी काफी प्रभावित हुई है. पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची, 28 फरवरी को जारी की गयी थी. उसमें मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गयी. इस सूची से 62 लाख से ज्यादा नाम हटा दिये गये थे. चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है, लेकिन 60 लाख नामों पर अभी तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इनके दस्तावेजों की जांच जारी है.

32 लाख वोटर का न्यायिक अधिकारियों ने किया निपटारा

न्यायिक अधिकारियों ने 60 लाख में से 32 लाख मामलों का निपटारा कर लिया है. इसमें से 40 फीसदी नाम कटने की संभावना है. इससे राज्य में एक अभूतपूर्व अनिश्चितता का माहौल है. एसआईआर के मुद्दे पर चल रहे टकराव ने अन्य सभी मुद्दों को पीछे छोड़ दिया है. तृणमूल इस मुद्दे को हथियार बनाकर मैदान में उतरी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हों या अभिषेक बनर्जी, सभी की सभाओं में ज्यादातर बातें एसआईआर पर ही हो रही है.

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मुस्लिम वोट पर भी रहेगी नजर

अगर मुकाबला कड़ा हुआ, तो वामपंथी दल कुछ चुनिंदा सीटों पर रिजल्ट को प्रभावित कर सकते हैं. उनका आईएसएफ से कुछ सीटों पर समझौता हुआ है. इस बार मुस्लिम वोटों पर सबकी नजरें टिकी हैं. तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने आम जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया है. उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. ऐसे में मुस्लिम समुदाय का वोट किधर जायेगा, इसका आकलन करने में पार्टियां जुटी हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

विशेषज्ञों का कहना है कि अभी चुनाव प्रचार लंबा चलेगा. इसलिए पश्चिम बंगाल विधासनभा चुनाव में कुछ चौंकाने वाले नतीजे भी देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.

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