पोस्टल कवर से दुनिया में पहुंचेगी मां बर्गभीमा की महिमा, 51 शक्तिपीठों में एक है यह मंदिर

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 14 Jun 2026 5:54 PM

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मां उग्रतारा की पूजा-अर्चना के बाद पोस्टल कवर जारी करते गणमान्य लोग.

Postal Cover on Bargabhima Temple: पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के प्रसिद्ध बर्गभीमा मंदिर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए भारतीय डाक विभाग की ओर से पोस्टल कवर जारी किया गया है. पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें.

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तमलूक (पूर्व मेदिनीपुर) से रंजन माइती की रिपोर्ट

Postal Cover on Bargabhima Temple: पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक शहर तमलूक की प्राचीन शक्तिपीठ मां बर्गभीमा की महिमा अब देश-विदेशों में गूंजेगी. डाक विभाग ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और विशेष पहल की है. भारतीय डाक विभाग ने बर्गभीमा मंदिर के नाम पर विशेष डाक आवरण (Postal Cover) जारी किया है. इस पहल को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

60 फुट ऊंचा है मंदिर

इतिहास में ताम्रलिप्त के नाम से प्रसिद्ध तमलूक सदियों से धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. इस शहर में मौजूद इस मंदिर की स्थापत्य कला इसे भव्य स्वरूप देती है. लगभग 60 फुट ऊंचा यह प्राचीन देवालय ओड़िशा शैली की वास्तुकला में निर्मित है. मंदिर की बाहरी दीवारों पर टेराकोटा की अद्भुत नक्काशी इसकी ऐतिहासिक समृद्धि की गवाही देती है. प्रत्येक आकृति, शिल्पकला बीते युग की कहानी कहती है.

काले पत्थर से बनी है मां बर्गभीमा की प्रतिमा

मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से निर्मित मां बर्गभीमा की प्रतिमा है, उनकी पूजा उग्रतारा स्वरूप में की जाती है. इतिहास, पुराण और लोकविश्वास के अद्भुत संगम इस मंदिर को केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि आस्था का जीवंत केंद्र बनाता है. वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. पश्चिम बंगाल ही नहीं, देश के अन्य राज्यों और विदेशों से भी भक्त यहां आते हैं. नवरात्र और अन्य धार्मिक पर्वों पर यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है.

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आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास

भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष डाक आवरण मां उग्रतारा की आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास है. डाक आवरण किसी स्थान, विरासत, ऐतिहासिक धरोहर या विशेष सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने का एक प्रतिष्ठित माध्यम माना जाता है. एक बार जारी होने के बाद यह संग्रहकर्ताओं, शोधकर्ताओं और आम लोगों के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचता है. मां बर्गभीमा मंदिर के नाम पर जारी विशेष डाक आवरण तमलूक की पहचान को नयी ऊंचाई देगा.

मां उग्रतारा मंदिर में हुई विशेष पूजा

आवरण को जारी करने से पहले इन्हें मां बर्गभीमा के चरणों में अर्पित किया गया. विधिवत पूजा की गयी. धार्मिक अनुष्ठान के बाद इन्हें आधिकारिक रूप से जारी किया गया. यह दृश्य श्रद्धा और गौरव का अनोखा संगम था, जहां परंपरा और आधुनिक पहचान एक साथ दिखी.

ये लोग थे उपस्थित

इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे. कार्यक्रम में तमलूक के उपमंडल अधिकारी सौभिक मुखर्जी, पूर्व विधायक ब्रह्मामय नंदा, मंदिर के सेवादार, सामाजिक कार्यकर्ता और सैकड़ों भक्त मौजूद थे. सभी ने इसे तमलूक के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया.

डाक आवरण हजारों वर्ष की पहचान का दस्तावेज

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक डाक आवरण नहीं, बल्कि तमलूक की हजारों वर्ष पुरानी पहचान का दस्तावेज है. इससे नयी पीढ़ी भी अपनी जड़ों, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकेगी.

Postal Cover on Bargabhima Temple: क्या होंगे फायदे

  • धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
  • रोजगार के अवसर सृजित होंगे.
  • सांस्कृतिक संरक्षण को बल मिलेगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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