केंद्र की सिफारिशों के अनुरूप हैं जीएसटी संशोधन : मंत्री

विधानसभा ने बुधवार को शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन पश्चिम बंगाल वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) संशोधन विधेयक, 2024 को ध्वनिमत से पारित कर दिया.
विधानसभा से जीएसटी संशोधन विधेयक 2024 पारित
संवाददाता, कोलकाता
विधानसभा ने बुधवार को शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन पश्चिम बंगाल वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) संशोधन विधेयक, 2024 को ध्वनिमत से पारित कर दिया. भोजनावकाश के बाद राज्य की वित्त मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य ने यह विधेयक पेश किया. विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ने सदन को बताया कि वस्तु एवं सेवा कर में किये गये संशोधन जीएसटी परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से अनुमोदित सिफारिशों के अनुरूप हैं. उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद, जिसमें सभी राज्यों के प्रतिनिधि हैं, समय-समय पर जीएसटी दरों में बदलाव की जो सिफारिशें करता है. जिसे वास्तविक रूप देने के लिए ही यह विधेयक लाया गया है.
उन्होंने बताया कि संसद से पहले ही इस प्रकार का विधेयक पारित हो चुका है. केंद्र के निर्देशानुसार सभी राज्यों के लिए भी अपनी-अपनी विधानसभा से संशोधन विधेयक को पारित कराना आवश्यक होता है. इसीलिए यह विधेयक लाया गया है. सदन में उन्होंने भाजपा विधायक विश्वनाथ कारक द्वारा संशोधन विधेयक का विरोध करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका विरोध समझ से परे है, क्योंकि केंद्र ने इस संबंध में राज्य की सिफारिश का समर्थन किया है.
उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री की अगुवाई वाली जीएसटी परिषद में सभी राज्यों के प्रतिनिधि हैं. वहीं, मंत्रियों का समूह (जीओएम), जो जीएसटी दर में किसी भी बदलाव की सिफारिशें करने वाला निकाय है, में बंगाल का महत्वपूर्ण स्थान है और हमारे शब्दों और सुझावों को जीएसटी परिषद की बैठकों में शामिल किया गया है. इसलिए, यदि राज्य में भाजपा विधेयक पर कोई आपत्ति उठाती है, तो वे केवल राजनीतिक कारणों से ऐसा करते हैं.
मंत्री ने दावा किया कि बंगाल आज जो सिफारिश करता है, भारत कल उसी पर अमल करता है. उन्होंने कहा कि सिफारिशें पहले ही अन्य राज्यों द्वारा स्वीकार की जा चुकी हैं. उन्होंने कहा कि बंगाल ने जीएसटी अधिनियम 2017 के उद्देश्य और कारणों के कथन के अनुरूप संशोधन किये हैं. संशोधनों से सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को बड़ी मदद मिलेगी. इससे पहले विधेयक का विरोध करते हुए भाजपा विधायक विश्वनाथ कारक ने कहा कि ममता सरकार के शासनकाल में राज्य पर कर्ज का बोझ छह लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक पर 58 हजार रुपये से अधिक का कर्ज है और बंगाल में प्रत्येक बच्चे कर्ज के साथ जन्म लेते हैं, सत्तारूढ़ पार्टी इस बोझ को दूर करने में अपनी विफलता को छिपाने के लिए हर साल इस तरह का विधेयक ला रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योग-धंधे की बजाय राज्य सरकार शराब की बिक्री से पैसा कमाने में अधिक रुचि रखती है. जवाब में मंत्री ने कहा कि विपक्ष गुण-दोष में जाए बिना केवल विरोध करने में लगा हुआ है. विधेयक पर बहस के दौरान वरिष्ठ भाजपा विधायक और जाने-माने अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी की अनुपस्थिति का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि अगर वे मौजूद होते तो बेहतर होता. हम उनके विचारों की अपेक्षा कर रहे थे. शायद उनके पास विधेयक के खिलाफ कुछ नहीं है.
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