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पीड़िता के पिता ने कहा, मुख्यमंत्री सच बोल रहीं या नहीं, जनता करे फैसला

Updated at : 11 Sep 2024 11:10 PM (IST)
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पीड़िता के पिता ने कहा, मुख्यमंत्री सच बोल रहीं या नहीं, जनता करे फैसला

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन आरोपों को खारिज कर दिया है कि उन्होंने आरजी कर अस्पताल में दुष्कर्म-हत्या की पीड़िता जूनियर महिला डॉक्टर के परिवार को पैसे देने की पेशकश की थी. इस विवाद पर पीड़िता के पिता ने बुधवार को कहा कि वह यह फैसला आमलोगों पर छोड़ते हैं कि मुख्यमंत्री सच बोल रही हैं या नहीं.

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कोलकाता.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन आरोपों को खारिज कर दिया है कि उन्होंने आरजी कर अस्पताल में दुष्कर्म-हत्या की पीड़िता जूनियर महिला डॉक्टर के परिवार को पैसे देने की पेशकश की थी. इस विवाद पर पीड़िता के पिता ने बुधवार को कहा कि वह यह फैसला आमलोगों पर छोड़ते हैं कि मुख्यमंत्री सच बोल रही हैं या नहीं.

महिला डॉक्टर के पिता ने दावा किया कि घटना के बाद जब ममता बनर्जी उनके घर आयीं थी, तो उन्होंने मुआवजे की पेशकश की थी और बाद में सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि उनकी सरकार उनकी बेटी की याद में कुछ बनाने के लिए उन्हें 10 लाख रुपये देने को तैयार है.

महिला डॉक्टर के पिता ने कहा है कि उनकी बेटी की मौत के बाद जिस दिन मुख्यमंत्री उनके घर आयीं, उन्होंने उन्हें मुआवजा देने की पेशकश की. बाद में, एक कार्यक्रम में, उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि उनकी सरकार उनकी बेटी की याद में कुछ बनाने के लिए उन्हें 10 लाख रुपये दे सकती है. मृतका के पिता ने कहा है कि अब वह यह आमलोगों पर छोड़ते हैं कि वे यह तय करें कि वह (मुख्यमंत्री) सच बोल रही हैं या नहीं.

सीएम ममता बनर्जी ने किया आरोपों को खारिज

ममता बनर्जी ने सोमवार को उन आरोपों को खारिज कर दिया था कि उन्होंने पीड़िता के माता-पिता को पैसे देने की पेशकश की थी. मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह चिकित्सकों का एक मंच था, जिसने मांग की थी कि राज्य सरकार परिवार को मुआवजा दे. मुख्यमंत्री ने कहा था : मैंने पीड़ित डॉक्टर के परिवार को कभी पैसे देने की पेशकश नहीं की. यह बदनामी के अलावा कुछ नहीं है. मैंने डॉक्टर के माता-पिता से कहा था कि अगर वे अपनी बेटी की याद में कुछ करना चाहते हैं, तो हमारी सरकार उनके साथ है. मुझे पता है कि कब क्या कहना है.

बड़े उद्देश्य के लिए लड़ रहे डॉक्टर : पीड़ित परिवार

यह पूछे जाने पर कि क्या वे जूनियर चिकित्सकों के पिछले 33 दिनों से काम बंद रखने का समर्थन करते हैं, जिसके कारण राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गयी हैं, पीड़िता के पिता ने कहा : हम मरीजों की पीड़ा और परेशानी समझ सकते हैं, लेकिन आपको यह भी समझना होगा कि डॉक्टर एक बड़े उद्देश्य के लिए लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि डॉक्टर का काम मरीजों का इलाज करना, उनका ऑपरेशन करना है. लेकिन अब वे सड़कों पर उतर आये हैं और उनके आंदोलन को सभी का समर्थन मिल रहा है, चाहे उनकी सामाजिक स्थिति कुछ भी हो. हम उनका तहे दिल से समर्थन करते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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