काकोली घोष से शताब्दी रॉय तक, ममता बनर्जी की सल्तनत खत्म करने वालों की पूरी लिस्ट आयी सामने

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 10 Jun 2026 7:40 PM

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टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी.

TMC Turmoil: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में विद्रोह के बीच बागी खेमे में शामिल होने वाले शीर्ष कद्दावर नेताओं की सूची सामने आ गयी है. काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय और सुखेंदु शेखर रॉय सहित कई बड़े दिग्गजों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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TMC Turmoil: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बगावत ने पार्टी को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है. दिल्ली से कोलकाता तक अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों और 58 से अधिक विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है. इसकी वजह से टीएमसी का वजूद ही संकट में आ गया है.

3 दशक तक ममता के साथ रहे नेताओं ने किया TMC से किनारा

विद्रोह करने वाले ये नेता कोई साधारण नेता या कार्यकर्ता नहीं हैं. ये तृणमूल कांग्रेस के वो कद्दावर चेहरे हैं, जिन्होंने 3 दशक तक ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी को खड़ा किया. आइए, जानते हैं उन प्रमुख दिग्गज नेताओं की पूरी लिस्ट और उनकी संक्षिप्त प्रोफाइल, जिन्होंने टीएमसी की रीढ़ को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है.

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1. डॉ काकोली घोष दस्तीदार (Dr Kakoli Ghosh Dastidar)

बारासात लोकसभा सीट से लगातार 3 बार की सांसद और टीएमसी महिला विंग का सबसे बड़ा चेहरा थीं. डॉ काकोली घोष दस्तीदार इस विद्रोह की मुख्य सूत्रधार और कमांडर-इन-चीफ मानी जा रही हैं. उन्होंने अभिषेक बनर्जी के कॉरपोरेट तानाशाही रवैये के खिलाफ सबसे पहले मोर्चा खोला और दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर टीएमसी के संसदीय दल को दोफाड़ करने में सबसे बड़ी भूमिका निभायी. अभी 20 बागी सांसदों के गुट का नेतृत्व कर रही हैं.

2. शताब्दी रॉय (Satabdi Roy)

बीरभूम संसदीय क्षेत्र से लगातार चौथी बार की लोकप्रिय सांसद और बंगाली सिनेमा की बेहद खूबसूरत और दिग्गज अभिनेत्री शताब्दी रॉय का बागी खेमे में जाना ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत झटका है. अनुब्रत मंडल के जेल जाने के बाद बीरभूम के संगठन को संभालने वाली शताब्दी ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और टिकट बंटवारे में आई-पैक (I-PAC) के अत्यधिक हस्तक्षेप पर तीखा हमला बोलते हुए विद्रोह का झंडा बुलंद किया.

3. जून मालिया (June Malia)

    एक्टर से नेता बनीं जून मालिया ने भी ममता बनर्जी को गच्चा देते हुए बागी सांसदों का समर्थन कर दिया है. पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने कोलाघाट में एक प्रशासनिक बैठक की थी. बैठक में जून मालिया और तृणमूल कांग्रेस के सांसद दीपक अधिकारी उर्फ देव उसमें शामिल हुए थे.

    4. रचना बनर्जी (Rachna Banerjee)

    रचना बनर्जी भी फिल्म जगत से राजनीति में आयी थीं. वह हुगली लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई थीं. कथित तौर पर उन्होंने भी बागियों के खेमे में अपना नाम लिखवा लिया है.

    5. दीपक अधिकारी उर्फ देव (Deepak Adhikari – Dev)

    बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में शुमार दीपक अधिकारी, जिन्हें देव के नाम से जाना जाता है, घाटाल लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. उन्होंने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से दूरी बना ली है. पिछले दिनों मुख्यमंत्री के साथ एक प्रशासनिक बैठक में उनका शामिल होना यह बताता है कि उन्होंने बागी गुट का समर्थन कर दिया है.

    6. शांतनु सेन (Shantanu Sen)

    टीएमसी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शांतनु सेन ने पार्टी से इस्तीफा देकर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती दी. सांसदों ने जब दिल्ली में बगावत का झंडा बुलंद किया, तो शांतनु सेन भी उसमें शामिल हो गये.

    7. सुखेंदु शेखर रॉय (Sukhendu Sekhar Ray)

    तृणमूल कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में एक सुखेंदु शेखर रॉय राज्यसभा के सदस्य हैं. उन्होंने 8 जून को पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया. हालांकि, अभी तक स्पष्ट जानकारी नहीं है कि वह बागी गुट के साथ हैं या नहीं. वह भाजपा में शामिल होंगे या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है. हालांकि, वह कई बार कह चुके हैं कि तृणमूल कांग्रेस को अब कोई नहीं बचा पायेगा.

    8. सुष्मिता देव (Sushmita Dev)

    असम में तृणमूल कांग्रेस ने जिस सुष्मिता देव को अपनी पार्टी का चेहरा बनाया था, उसने भी टीएमसी को टाटा, बाय-बाय बोल दिया है. बुधवार को उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, सुष्मिता ने ममता बनर्जी के बारे में कुछ नहीं कहा, लेकिन इस्तीफे के बाद कहा कि वह दो नाव की सवारी नहीं कर सकतीं.

    9. यूसुफ पठान (Yusuf Pathan)

    बहरमपुर सीट से कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी को हराकर सांसद बने पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान की रहस्यमयी चुप्पी ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की धड़कनें तेज कर दी हैं. ममता की करीबी महुआ मोईत्रा ने यूसुफ पठान को रीढ़विहीन नेता करार देते हुए उन पर जोरदार हमला बोला था. इसलिए आशंका जतायी जा रही है कि यूसुफ भी बागी गुट के साथ हो गये हैं.

    10. शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha)

    आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, जो ममता बनर्जी के लिए खुलकर बैटिंग करते थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों की धज्जियां उड़ाते रहते थे, उन्होंने भी चुप्पी साध रखी है. इसे ममता बनर्जी के लिए बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है. वह न तो ममता के समर्थन में कुछ बोल रहे हैं, न टीएमसी के विरोध में.

    11. अबू ताहिर खान (Abu Tahir Khan)

    मुर्शिदाबाद के बड़े नेता और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अबू ताहिर खान ने भी बागी गुट ज्वाइन कर लिया है.

    12. पार्थ भौमिक (Partha Bhowmik)

    बैरकपुर के सांसद पार्थ भौमिक ने पाला बदल लिया है. ममता बनर्जी को अकेला छोड़ वह काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ चले गये हैं.

    13. बापी हलदार (Bapi Haldar)

    मथुरापुर के सांसद बापी हलदार भी टीएमसी के विद्रोही गुट में शामिल हैं.

    14. मिताली बाग (Mitali Bag)

    आरामबाग की सांसद मिताली बाग अब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को अपना नेता नहीं मानतीं. वह काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले बागी गुट के साथ हो गयीं हैं.

    15. कालीपद सोरेन (Kalipada Soren)

    झारग्राम के कद्दावर नेता और सांसद कालीपद सोरेन ने तृणमूल कांग्रेस को छोड़ने का ऐलान तो नहीं किया है, लेकिन वह विद्रोही गुट में शामिल हैं.

    16. अरूप चक्रवर्ती (Arup Chakraborty)

    बांकुड़ा के टीएमसी नेता अरूप चक्रवर्ती अब एनडीए को समर्थन देने वाले बागी गुट के साथ हैं. इससे ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गयीं हैं.

    17. डॉ शर्मिला सरकार (Dr Sharmila Sarkar)

    बर्धमान पूर्व की सांसद डॉ शर्मिला सरकार ने भी दीदी को टाटा-बाय-बाय बोल दिया है. वह अब बागी गुट के नेताओं के साथ हैं, जिसने नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है.

    18. असित कुमार मल (Asit Kumar Mal)

    बोलपुर के तृणमूल नेता असित कुमार मल भी बागी हो गये हैं. बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी में बगावत के बाद जो नया गुट नयी दिल्ली में तैयार हुआ है, उसके सदस्य असित कुमार मल भी हैं.

    19. जगदीश चंद्र बसुनिया (Jagadish Chandra Basunia)

    कूचबिहार से तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगदीश चंद्र बसुनिया भी बागी हो गये हैं.

    20. माला रॉय (Mala Roy)

    ममता बनर्जी की बेहद करीबी रहीं माला रॉय अब दीदी के साथ नहीं हैं. उन्होंने काकोली घोष दस्तीदार के बागी गुट को ज्वाइन कर लिया है.

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    By Mithilesh Jha

    मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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