चुनाव आयोग के 4 ऑब्जर्वर्स घोटाले के आरोपी, TMC के दावे से मची खलबली

Updated at : 26 Mar 2026 6:26 PM (IST)
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Bengal Election 2026 Observers Controversy TMC Politics Election Commission of India

तृणमूल कांग्रेस ने ऑब्जर्वर्स की तस्वीरों के साथ उन पर घोटालों में शामिल रहने के आरोप लगाये हैं.

Bengal Elections 2026 Observers Controversy: बंगाल की सत्तारूढ़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के लिए तैनात किये गये 4 जनरल ऑब्जर्वर्स के खिलाफ भ्रष्टाचार में लिप्त होने और भाजपा से संबंध के आरोप लगाये हैं. जानें कौन हैं ये अफसर और क्या है पूरा विवाद.

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Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ‘डोजियर’ खोल दिया है. टीएमसी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (जिन्हें पार्टी वैनिश कुमार कह रही है) पर सीधा हमला बोला है. आरोप लगाया है कि बंगाल में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिन जनरल ऑब्जर्वर्स को तैनात किया गया है, उनका रिकॉर्ड दागदार है. तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि आयोग ने ‘भ्रष्टाचारियों, जमीन घोटाला करने वालों और भाजपा के वफादारों’ को बंगाल में तैनात कर लोकतंत्र का मजाक उड़ाया है.

8000 करोड़ का घोटाला और जमीन की हेराफेरी

तृणमूल कांग्रेस ने 4 अधिकारियों के नाम और उनके पिछले रिकॉर्ड का हवाला देते हुए आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाये हैं. पूरा विवरण इस प्रकार है-

  • धीरज कुमार (गजोले के जनरल ऑब्जर्वर): टीएमसी का आरोप है कि महाराष्ट्र के स्वास्थ्य आयुक्त रहते हुए इन पर 8,000 करोड़ रुपए के एम्बुलेंस टेंडर घोटाले के गंभीर आरोप लगे थे.
  • अजय कटेसरिया (बनगांव दक्षिण के जनरल ऑब्जर्वर): आरोप है कि सतना के कलेक्टर रहते इन्होंने 40 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन अवैध रूप से निजी पक्षों को ट्रांसफर कर दी थी. रीवा कमिश्नर की रिपोर्ट में इन्हें दोषी पाया गया और इनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल है.
  • गंदम चंद्रूडू (बालीगंज के जनरल ऑब्जर्वर): आंध्रप्रदेश में जनजातीय कल्याण निदेशक के कार्यकाल के दौरान इन पर दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज होने का दावा किया गया है.
  • अरिंदम डाकुआ (मध्यमग्राम के जनरल ऑब्जर्वर): टीएमसी का कहना है कि ये ओडिशा के भाजपा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निजी सचिव (PS) रह चुके हैं. पार्टी ने इसे ‘सीधी राजनीतिक नियुक्ति’ करार दिया है.

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भाजपा की भर्ती एजेंसी बना चुनाव आयोग – टीएमसी

टीएमसी ने कहा कि निर्वाचन आयोग अब भाजपा की ‘रिक्रूटमेंट एजेंसी’ की तरह काम कर रहा है. पार्टी ने आरोप लगाया कि मालदा में पहले ही एक वरिष्ठ बिहार भाजपा नेता के पति को पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया जा चुका है. अब ये नये नाम सामने आने से आयोग की मंशा साफ हो गयी है. टीएमसी का सवाल है कि क्या ऐसे ‘दागी’ अफसर बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कर पायेंगे?

वैनिश कमीशन ने बंगाल में घोटालेबाजों, जमीन हड़पने वालों और भाजपा के वफादारों को ऑब्जर्वर बनाकर प्लांट किया है. क्या इन्हीं लोगों के भरोसे बंगाल में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव होंगे? आयोग हर दिन बेशर्मी के नये मानक स्थापित कर रहा है.

तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक बयान

Bengal Elections 2026: चोर को ही पहरेदार बना दिया

बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी ने पुरानी कहावत ‘चोर को पकड़ने के लिए चोर की जरूरत होती है’ का हवाला देते हुए तंज कसा कि यहां तो आयोग ‘मासूमों को परेशान करने के लिए चोरों को तैनात’ कर रहा है. टीएमसी ने इसे ‘बेशर्मी की नयी मिसाल’ बताते हुए मतदाताओं से सतर्क रहने की अपील की है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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