भोजपुरी महोत्सव महानगर में 15 को

कोलकाता : स्वास्ति बोले भीखा, वर्तमान में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में रहती हैं हालांकि उनका जन्म मॉरीशस में हुआ था. उन्हें यह तो पता था कि वह मूल रूप से भारतीय हैं लेकिन भारत में कहां की रहनेवाली हैं, यह उन्हें नहीं पता था. विदेशों में बसे भारतीय जब किसी त्योहार को मनाते थे और […]
कोलकाता : स्वास्ति बोले भीखा, वर्तमान में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में रहती हैं हालांकि उनका जन्म मॉरीशस में हुआ था. उन्हें यह तो पता था कि वह मूल रूप से भारतीय हैं लेकिन भारत में कहां की रहनेवाली हैं, यह उन्हें नहीं पता था. विदेशों में बसे भारतीय जब किसी त्योहार को मनाते थे और अपनी भाषा में बातें करते थे तो स्वास्ति खुद को उनसे कटा महसूस करती थीं.
उनके पूर्वज भारत से मॉरीशस आये थे, जिन्हें गिरमिटिया के नाम से जाना जाता था. आखिरकार उन्होंने अपनी जड़ों को तलाशने की ठानी. मॉरीशस के रिकॉर्ड को खंगालने पर पता चला कि 1876 में उनका एक पूर्वज भारत से आया था.
रिकॉर्ड में 14 वर्षीय उक्त पूर्वज का नाम ‘भीखा’ लिखा था. पता भारत के आजमगढ़ का एक गांव था. इसके बाद स्वास्ति भारत के आजमगढ़ पहुंचीं और स्थानीय लोगों की मदद से वह डीएम के पास पहुंच गयीं. डीएम ने नक्शा दिखाकर उन्हें बताया कि उक्त गांव अब बलिया में है.
आखिरकार वह बलिया के सिंकदरपुर ब्लॉक स्थित अपने गांव, देवहा पहुंच गयीं. स्वास्ति कहती हैं कि अपनी मूल जड़ की मिट्टी को देखकर जो खुशी उन्हें हुई वह पहले कभी नहीं हुई थी. अब स्वास्ति न केवल अपने गांव बल्कि भोजपुरी को भी बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं. उन्होंने गिरमिटिया फाउंडेशन की स्थापना की. भारत में दिलीप कुमार गिरि के साथ मिलकर वह इस काम में जुट गयी हैं.
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