गुमला के सदर अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था बदहाल, महिलाओं का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 25 May 2026 7:08 PM

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सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था के विरोध में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन करतीं महिलाएं. फोटो: प्रभात खबर

Gumla News: गुमला सदर अस्पताल की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था के खिलाफ महिलाओं ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है. आंदोलनकारियों ने ब्लड बैंक चालू करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहाली और बेहतर इलाज की मांग उठाई. महिलाओं ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla News: झारखंड के गुमला सदर अस्पताल की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सोमवार से महिलाओं ने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया. झारखंड प्रदेश प्रतिज्ञा महिला एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में महिलाएं सदर अस्पताल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गईं. आंदोलनकारी महिलाओं ने अस्पताल प्रबंधन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और स्वास्थ्य व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग उठाई.

आंदोलन और होगा तेज

आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं देवकी देची ने कहा कि गुमला सदर अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और अस्पताल प्रबंधन जल्द उनकी मांगों को नहीं मानता है तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

अब यहां से हमारी लाश ही उठेगी: देवकी देवी

आमरण अनशन पर बैठीं महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया. जिलाध्यक्ष देवकी देवी ने कहा कि अस्पताल में मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं. गरीब मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं.

शिकायत के बावजूद सुधार नहीं

उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायत और मांग उठाने के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है. ऐसे में महिलाओं ने मजबूर होकर आमरण अनशन का रास्ता अपनाया है. आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

ब्लड बैंक और डॉक्टरों की कमी बना बड़ा मुद्दा

महिला एसोसिएशन ने सदर अस्पताल की कई गंभीर समस्याओं को लेकर आवाज उठाई. आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में अस्पताल में खून की लगातार हो रही कमी को दूर करना और बंद पड़े ब्लड बैंक को तत्काल पूरी क्षमता के साथ चालू करना शामिल है.

डॉक्टरों की जल्द हो बहाली

महिलाओं का कहना है कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है. गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को मामूली इलाज के लिए भी रांची के रिम्स मे रेफर कर दिया जाता है. इससे गरीब मरीजों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है. उन्होंने मांग की कि सभी गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पदों पर जल्द बहाली की जाए ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सके.

ऑफलाइन पर्ची व्यवस्था की भी मांग

आंदोलनकारी महिलाओं ने अस्पताल में ऑफलाइन पर्ची कटाने की सुविधा शुरू करने की भी मांग की. उनका कहना है कि ग्रामीण और गरीब तबके के कई लोग ऑनलाइन व्यवस्था के कारण परेशान होते हैं. महिलाओं ने कहा कि तकनीकी जानकारी के अभाव में मरीजों और उनके परिजनों को घंटों लाइन में लगना पड़ता है. इसलिए ऑफलाइन व्यवस्था बहाल कर लोगों को राहत दी जाए.

सैकड़ों महिलाओं ने आंदोलन को दिया समर्थन

धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं. आंदोलन स्थल पर शोभा देवी, काशी देवी, सुशीला मिंज, समीरा बेक, सलमी मिंज, चंद्रमणि देवी, मार्गरेट कुजूर, मंजुला टोप्पो, विलास देवी, बिरसी देवी, सुखमनी मिंज, रेखा कुजूर और सरिता देवी समेत कई महिलाएं मौजूद रहीं.

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चिकित्सा व्यवस्था में सुधार होने तक आंदोलन

महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि गुमला सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था में सुधार होने तक आंदोलन जारी रहेगा. आंदोलन को लेकर अस्पताल परिसर में दिनभर हलचल बनी रही और मरीजों व परिजनों के बीच भी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चा होती रही.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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