बारिश में डूबती नजर आ रहीं बाजी बाजार की उम्मीदें

Updated at : 25 Oct 2019 12:33 AM (IST)
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बारिश में डूबती नजर आ रहीं बाजी बाजार की उम्मीदें

ग्राहकों की कमी व सरकारी पाबंदी से व्यवसायी चिंतित पटाखों की बिक्री में इस वर्ष 50 फीसदी की आयी गिरावट कोलकाता : दीपावली के मद्देनजर पटाखा बाजार लग गये हैं, लेकिन इस वर्ष मनमुताबिक बिक्री नहीं होने से पटाखा व्यवसायी चिंतित हैं. पटाखा को लेकर कड़े नियम कानून और ऊपर से बारिश से पटाखा व्यवसाय […]

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ग्राहकों की कमी व सरकारी पाबंदी से व्यवसायी चिंतित

पटाखों की बिक्री में इस वर्ष 50 फीसदी की आयी गिरावट

कोलकाता : दीपावली के मद्देनजर पटाखा बाजार लग गये हैं, लेकिन इस वर्ष मनमुताबिक बिक्री नहीं होने से पटाखा व्यवसायी चिंतित हैं. पटाखा को लेकर कड़े नियम कानून और ऊपर से बारिश से पटाखा व्यवसाय काफी प्रभावित हो रहा है. बुधवार से महानगर में लगातार हल्की बारिश हो रही है. इस कारण पाटाखा बाजार में काफी कम ग्राहक पहुंच रहे हैं. महानगर के शहीद मीनार मैदान में बाजी बाजार लगा है. बारिश के कारण मैदान कीचड़ से भर गया है.

इससे ग्राहकों को आवागमन में भी परेशानी हो रही है. इस संबंध में बड़ाबाजार फायर वर्क्स डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबला राय ने बताया कि विस्फोटक और पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव शेफ्टी ऑर्गनाइजेशन सुरक्षा मानक तय करता है. तेज आवाज वाले पटाखों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उक्त ऑर्गनाइजेशन और पटाखा बनानेवालों से बात करनी चाहिए, लेकिन अफसोस की बात है कि प्रशासन उनसे बात ही नहीं करता है. इस वर्ष पटाखों की बिक्री में 50 फीसदी की गिरावट आयी है.

बारिश व सरकारी पाबंदी से व्यवसायी परेशान :

बड़ाबाजार फायर वर्क्स डीलर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव शांतनु दत्ता ने बताया कि मंगलवार को कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निरीक्षण के बाद शाम से बाजार खोल दिया गया, लेकिन बुधवार से लगातार हो रही बारिश से व्यवसायी परेशान हैं. 2017 के बाद से ही पटाखों की बिक्री लगातार कम हो रही है.

गत वर्ष बाजी बाजार में 52 स्टॉल लगाये गये थे. इस वर्ष 39 स्टॉल ही लगे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह पटाखों पर सरकारी पाबंदी है. देश के अन्य राज्यों में 125 डेसिबल तक के क्षमता वाले पटाखे छोड़े जा सकते हैं, लेकिन बंगाल में 90 डेसिबल से अधिक क्षमता वाले पटाखे छोड़ने पर रोक है. नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना लग सकता है. इसलिए लोग डरे हुए हैं.

इस साल बाजार में नये पटाखों की कमी : शिवकाशी, तमिलनाडु के विरुधुनगर जिला का एक शहर है. इसे भारत के पटाखा उद्योग की राजधानी कहा जाता है. यहां लगभग 8,000 बड़े और छोटे कारखाने हैं, जहां से 90 प्रतिशत पटाखों का उत्पादन होता है, लेकिन कानूनी पचड़े के कारण शिवकाशी समेत देशभर में पटाखों का उत्पादन बंद था. इसलिए इस वर्ष बाजार में नये पटाखों की कमी है. हालांकि कुछ व्यवसायी पुराने को ही नया बता कर बेच रहे हैं.

सोमवार तक खुला रहेगा बाजी बाजार :

एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि बाजी बाजार सोमवार तक खुला रहेगा. वहीं प्रशासन के निर्देशानुसार 90 डेसिबल क्षमता वाले पटाखों को बेचा जा रहा है.

जीएमटी ने व्यवसायियों की कमर तोड़ी

स्टॉल नंबर 109 के व्यवसायी एलएस राजा ने बताया कि कोलकाता में दीपावली और शब-ए बारात के अवसर पर लोग पटाखे छोड़ते हैं, लेकिन पटाखों पर जीएमटी लगाये जाने के बाद से ही पटाखों की मांग कमी है. प्रदूषण के नाम पर हम व्यवसायियों को दबाया जा रहा है. क्या केवल दीपावली या शब-ए- बारात पर पटाखों को छोड़ने से प्रदूषण फैलता है?

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