महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेने की जरूरत है : ममता बनर्जी

Updated at : 03 Oct 2018 1:44 AM (IST)
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महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेने की जरूरत है : ममता बनर्जी

कोलकाता : महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर बेलियाघाटा में आयोजित एक कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हमारे देश के लिए गर्व हैं, उनके त्याग व आंदोलन को कभी देश भूल नहीं सकता. उनके जीवन-दर्शन से हम सबको प्रेरणा लेने की जरूरत है. भले […]

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कोलकाता : महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर बेलियाघाटा में आयोजित एक कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हमारे देश के लिए गर्व हैं, उनके त्याग व आंदोलन को कभी देश भूल नहीं सकता. उनके जीवन-दर्शन से हम सबको प्रेरणा लेने की जरूरत है. भले ही उस समय की राजनीति व आज की राजनीति में काफी फरक है.
उस समय देश पराधीन था. आज देश स्वाधीन हो चुका है, देश के लिए प्राणों की आहूति देनेवाले महान नेता व विद्वान आज नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्श, उनके सिद्धांत आज भी जीवित हैं. जब गांधी चले थे, तो पूरा देश भी उनके साथ चला था. वे एक प्राण-पुरुष थे. अपने भाषण में भाजपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी का अर्थ है, आंदोलन, त्याग, सर्वधर्म परायणता लेकिन आज कुछ लोग सामाजिक नेटवर्क पर पोस्ट जारी करके या सभा में भाषण देकर यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि वे गांधी के सिद्धांतों व पदचिह्नों पर ही चल रहे हैं.
जब गांधी जिंदा थे, तब उनके आदर्शों को भले कभी माना ही न हो लेकिन आज ऐसा दिखाने की कोशिश करते हैं. उनको पहले गांधी-दर्शन को गहराई से समझना होगा, तभी उनकी जयंती मनाने की सार्थकता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि कई लोगों को यह जानकारी नहीं है कि 15 अगस्त, 1947 को जिस दिन देश स्वाधीन हुआ, उस समय गांधी कहां थे. उस समय गांधी बंगाल के इसी बेलियाघाटा स्थित गांधी भवन में ही विराजमान थे.
देश में कोई साम्प्रदायिक दंगा या अशांति न हो, इसके लिए वे यहां सेतु बन कर बैठे हुए थे. नेताजी सुभाषचंद्र बोस उनको जाति नायक, जाति जनक कहकर पुकारते थे. गांधी को महात्मा नाम रवींद्रनाथ ठाकुर ने ही दिया था. साबरमती आश्रम भी गांधी के लिए ही जाना जाता है लेकिन बेलियाघाटा का गांधी भवन भी कम ऐतिहासिक नहीं है. इस हेरिटेज को अब धरोहर संपत्ति के रूप में सरकार ने अधिग्रहण किया है. इसके पुनर्रुद्धार के लिए सरकार साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च करेगी.
यहां नये रूप में म्यूजियम, संग्रहशाला बनाया जायेगा. गाधी के नाम से कलकत्ता विश्वविद्यालय एक चेयर भी शुरू कर रहा है. साथ ही उच्च शिक्षा विभाग एक गांधी मेधा स्कॉलरशिप भी शुरु कर रहा है. तमलुक में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय बनाया जायेगा. इसका आज शिलान्यास किया गया है. यहां सभी विषय लेकर छात्रों को पढ़ने का मौका मिलेगा. इस विश्वविद्यालय के साथ गांधी का नाम जुड़ा रहेगा. मुख्यमंत्री का कहना है कि पाठ्यक्रम में गांधी, नेताजी, रवींद्रनाथ, विवेकानंद, नजरुल, रामकृष्ण, भगत सिंह आदि पढ़ कर ही सिलेबस पूरा होता है.
आगे भी बंगाल के साहित्य व संस्कृति में गांधी का नाम रहेगा. बंगला में विद्यार्थियों की भाषा चाहे कोई भी हो लेकिन इन युवाओं को तैयार करने में हमारे शिक्षकों का कोई जवाब नहीं है. बंगाल की खासियत यही है कि यहां धर्म या जाति के नाम पर किसी को खरीदा या तोड़ा नहीं जा सकता है. मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि स्वामी विवेकानंद की तरह ही गांधी का भी प्रचार राज्य में होगा. 10 अक्तूबर को सरकार की ओर से एक सार्वजनिक रैली राज्य में आयोजित की जायेगी. जैसे गांधी ने दांडी अभियान शुरू किया था. वैसे ही उनकी याद में डांडी अभियान किया जायेगा.
महात्मा गांधी के नाम पर विवि की आधारशिला रखी
हल्दिया : पूर्व मेदिनीपुर के महिषादल ब्लॉक के कपासऐड़ा के बामुनिया मौजा में महात्मा गांधी के नाम पर विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गयी. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रिमोट पद्धति से बेलियाघाटा के गांधी भवन से आधारशिला रखी. बामुनिया में इसके लिए एक कार्यक्रम का भी आयोजन महिषादल पंचायत समिति ने किया था.
दीघा सफर के दौरान गत वर्ष ही पूर्व मेदिनीपुर में पृथक विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की थी. जुलाई महीने में जिले के दौरे के बाद राज्य के उच्च शिक्षा विभाग से विश्वविद्यालय की जमीन की मांग करते हुए चिट्ठी पहुंची थी. बामुिया मौजा में 20 एकड़ की जमीन विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए हल्दिया उन्नयन पर्षद ने दिया था. उसी जमीन पर नये विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए आधारशिला रखी गयी.
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