कोलकाता माझेरहाट ब्रिज हादसा का आंखों देखा हाल : ...और दहल उठे लोगों के दिल,बाइक छोड़ दौड़ा सूरज

Updated at : 05 Sep 2018 6:33 AM (IST)
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कोलकाता माझेरहाट ब्रिज हादसा का आंखों देखा हाल :  ...और दहल उठे लोगों के दिल,बाइक छोड़ दौड़ा सूरज

मंगलवार को माझेरहाट ब्रिज हादसा बुरी खबर लेकर आया. इस बुरी खबर ने सबको दहला कर रख दिया. हादसे की बुरी खबर पाते ही लोग अपनों की तलाश में मौके पर पहुंचने लगे. मौके पर पहुंचे हमारे संवाददाता ने भी वहां मौजूद कुछेक प्रत्यक्षदर्शियों व राहत कार्य में जुटे लोगों से बातचीत की. अमित शर्मा […]

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मंगलवार को माझेरहाट ब्रिज हादसा बुरी खबर लेकर आया. इस बुरी खबर ने सबको दहला कर रख दिया. हादसे की बुरी खबर पाते ही लोग अपनों की तलाश में मौके पर पहुंचने लगे. मौके पर पहुंचे हमारे संवाददाता ने भी वहां मौजूद कुछेक प्रत्यक्षदर्शियों व राहत कार्य में जुटे लोगों से बातचीत की.
अमित शर्मा
कोलकाता : मंगलवार की शाम साढ़े चार से ज्यादा बज रहे थे. शायद राजेश धानुक ने सोचा भी नहीं होगा कि ठीक उसके सामने माझेरहाट ब्रिज का एक हिस्सा ढह जायेगा, जिसकी थोड़ी दूरी पर ही वह मौजूद था. हादसे को देख सहमे हुए स्थानीय निवासी व प्रत्यक्षदर्शी राजेश ने बताया कि अचानक ब्रिज का एक हिस्सा धराशायी हो गया. वह ठीक ब्रिज के नीचे खड़ा था. जहां ब्रिज गिरा वहां कई मेट्रो परियोजना के कार्य करने वाले श्रमिकों ने अस्थायी झोपड़ियां भी बनायी हैं.

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इतना ही नहीं पास से गुजरने वाली रेल लाइन के किनारे भी झुग्गी-झोपड़ियां हैं. जहां हादसा हुआ, शाम को अक्सर वह वहां जाता है. उसने कहा कि शायद जीवन मेें कुछ अच्छा काम किया होगा कि वह उस दर्दनाक हादसे की चपेट में नहीं आया लेकिन एक दर्दनाक पल का हिस्सा जरूर बना.
बाइक छोड़ दौड़ पड़ा सूरज
अपनी बाइक पर सवार होकर माझेरहाट ब्रिज की ओर बढ़ रहा था सूरज. कुछ ही दूरी पर अचानक ब्रिज का एक हिस्सा ढह गया और वह बाइक सड़क पर खड़ी कर ब्रिज की ओर दौड़ पड़ा. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह कैसे हो गया.
टूटे ब्रिज के हिस्से की ओर से स्थानीय लोगों का जमावड़ा लगा था और वह भी लोगों को बाहर निकालने की कोशिश में जुट गया. सूरज ने बताया कि उसने एक मिनी बस और पांच अन्य वाहनों को नीचे गिरते देखा. वाहनों में स्कूल में पढ़ने वाले कुछ बच्चों को भी देखा. मिनी बस मेें सवार लोग चीख रहे थे. इस हादसे को देख उसने कहा कि शायद ही वह ऐसे भयानक मंजर को भूल पायेगा.
नजीब व उसके साथियों ने नहीं हारी हिम्मत
माझेरहाट ब्रिज के कुछ हिस्से के धराशायी होने के बाद फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के कार्य में जुटे स्थानीय युवक मोहम्मद नजीब और उसके साथियों ने हिम्मत नहीं हारी. ब्रिज के गिरे हुए हिस्से की ओर वे बढ़े.
दो लोगों को बाहर निकाला. नजीब ने कहा कि घटना शाम साढ़े चार बजे के बाद घटी. कैसे अचानक ऐसा हुआ, जैसे समझ में ही नहीं आया. नजीब ने भी आरोप लगाया कि मौके पर पुलिस बाद में पहुंची. जब पहुंची तो राहत कार्य में जुटे स्थानीय लोगों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गयी. लेकिन स्थानीय युवकों ने राहत कार्य में अपने योगदान में कमी नहीं रखी.

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बारिश ने काफी रुलाया
घटना के दौरान मौजूद स्थानीय युवक मोहम्मद शबीर अली ने कहा कि ब्रिज के एक हिस्से के ढहते ही वह और उसके साथी वहां पहुंचे. एक तरफ बारिश ने राहत कार्य मेें काफी रुलाया तो अंधेरे की समस्या भी दिक्कत का सबब बन रही थी. शबीर ने कहा कि वह ब्रिज के ठीक पास था. ब्रिज के नीचे काफी मजदूर कार्य कर रहे थे. काफी व्यस्त ब्रिज है माझेरहाट ब्रिज. ऐसे में इस हादसे ने जैसे झकझोर कर रख दिया है.
और हादसे ने ले लिया आगोश में
शाम करीब 4.40 बजे माझ‍ेरहाट ब्रिज का एक हिस्सा ढह गया और कई लोगों को हादसे ने अपने आगोश में ले लिया. पुलिस के अनुसार घटना के दौरान पांच चार पहिए वाहन, एक मिनी बस और तीन बाइक वहां से गुजर रहे थे.
घटना के बाद कोलकाता पुलिस आपदा प्रबंधन टीम, दमकल विभाग के कर्मी, एनडीआरएफ के जवानों ने संयुक्त रूप से राहत कार्य शुरू किया.
घायलावस्था में करीब 21 लोगों को अस्पताल (सीएमआरआइ में 10, एसएसकेएम में 11) ले जाया गया. एसएसकेएम में इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गयी. खबर लिखे जाने तक उसकी पहचान नहीं हो पायी थी. रात आठ बजे तक ब्रिज के टूटे हिस्से के अंदर कोई वाहन नहीं फंसा था. देर रात तलाशी अभियान जारी रही.
घटनास्थल पर सिविल कोर्ट के जज की गाड़ी
कोलकाता : माझेरहाट दुर्घटना स्थल पर सिविल कोर्ट जज की एक सफेद रंग की गाड़ी पड़ी हुई थी. हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि उक्त गाड़ी में कौन थे? इसके साथ ही घटनास्थल पर मोटर साइकिल सहित अन्य गाड़ियां पड़ी थीं. गाड़ी में सिविल कोर्ट के जज का नेम प्लेट लगा हुआ था. गाड़ी बुरी तरह से दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी.
हाइड्रोलिक क्रेन से निकाला गया कैब
कोलकाता. माझेरहाट ब्रिज दुर्घटना के लगभग चार घंटे के बाद हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त कैब को हटाया गया. इसी गाड़ी में शिशिर अधिकारी सवार थे. राहत कार्य में जुटी टीम का कहना है कि राहत टीम के सदस्य पहले टूटी ब्रिज के ऊपर पड़ी गाड़ियों को हटाने की कोशिश कर रहे हैं तथा तीस फीट गहरा छेद किया गया है. जब मलबे के ऊपर पड़ी गाड़ियों को हटाने के बाद ही मलवे को हटाया जा सकता है.
एनडीआरएफ की टीम बचाव कार्य में जुटी
कोलकाता. माझेरहाट ब्रिज हादसे के बाद एनडीआरएफ की टीम राहत कार्य में जुट गयी है. एनडीआरएफ के महानिदेशक संजय कुमार ने कहा कि अर्थमूवर्स (मलबा हटाने में उपयोग में लायी जाने वाली बड़ी मशीन) का इस्तेमाल किया जा रहा है.
परिवहन विभाग ने चलायी अतिरिक्त बसें
कोलकाता : माझेरहाट ब्रिज के टूटने के बाद दक्षिण कोलकाता के बेहला व बजबज क्षेत्र के लोग परेशान दिखे. उक्त इलाके की परिवहन व्यवस्था काफी प्रभावित हुई. इसे देखते हुए राज्य के परिवहन विभाग ने लोगों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें चलायीं.
परिवहन विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, तारातला से बजबज के लिए पांच बस, टॉलीगंज मेट्रो से बेहला के लिए छह बस, बेहला चौरास्ता से दोस्तीपुर के लिए तीन बस, बेहला से डायमंड हार्बर के लिए तीन बसें चलायी गयीं. इसके साथ ही धर्मतल्ला से बेहला व डायमंडहार्बर के लिए अतिरिक्त बसें रखी गयी हैं.
बाल-बाल बचा हिमांशु
कोलकाता : आर्य परिषद विद्यालय के 11वीं कक्षा का छात्र हिमांशु चौधरी सुबह अपने घर से निकला था, तो सोचा भी नहीं था कि वह इतनी भयावह दुर्घटना का गवाह बनेगा और बाल-बाल बच जायेगा.
दुर्घटना के बाद हिमांशु को एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन आरंभिक चिकित्सा के बाद रात लगभग नौ बजे उसे अस्पताल से छोड़ दिया गया. हिमांशु पूरी दुर्घटना के संबंध में बताता है कि वह माझेरहाट स्टेशन से ट्रेन से उतर कर अपने घर जा रहा था. वह ब्रिज से पैदल ही घर जा रहा था. अचानक ही ब्रिज टूट कर गिर गया. वह भी गिर गया. उस समय वह बहुत ही डर गया था. उसने देखा कि एक मिनी बस गिरी है.
आसपास बाइक पड़ी हुई है. उसके कमर व पीठ में चोट लगी है. उसने कहा कि मेरा घर पास में ही है. परिवार वालों को जब इसकी जानकारी मिली, तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. उसे पीठ व कमर में चोट लगी है. अपने लाडले के सकुशल होने से उसका परिवार बहुत ही खुश था.
ब्रिज टूट रहा था, ड्राइवर चिल्लाया साहब जल्दी भाग जाइये
कोलकाता : माझेरहाट ब्रिज टूटने के समय शिशिर अधिकारी निजी कैब में थे, जब उनका कैब ब्रिज के ऊपर पहुंचा और हिलने लगा, उस समय कैब का ड्राइवर चिल्लाया, साहब ब्रिज गिर रहा है. आप गाड़ी से निकल कर भाग जाइये.
शिशिर अधिकारी दुर्घटना के समय कैब से जा रहे थे. दुर्घटना के अनुभव बताते हुए शिशिर अधिकारी ने कहा : हालांकि वह समझ नहीं पाये थे कि ब्रिज टूट रहा है, लेकिन कैब का ड्राइवर समझ गया था.
उसने अपने भागने की जगह मेरे भागने को प्राथमिकता दी थी, हालांकि मैं उस समय कुछ समझ नहीं पा रहा था कि मैं कहां हूं और किस हालत में हूं. मैं अपने आसपास लोगों को पड़े देख रहा था. लगभग 20 लोग थे. लगभग सभी कराह रहे थे. ज्यादातर लोगों की कमर की हड्डी टूट गयी थी. किसी का पांव टूट गया था. लोग मदद के लिए गुहार लगा रहे थे, लेकिन कोई मदद करने वाला नहीं था, लगभग अाधे घंटे तक पूरी तरह से हेल्पलेस थे.
मेरे पास पड़ा एक व्यक्ति कराह रहा था और मदद की गुहार लगा रहा था. मैंने अपने घर पर फोन किया और उस व्यक्ति को बचाने के लिए कहा, लेकिन मेरे दुर्घटना की सूचना सुनते ही मेरे परिवार वाले परेशान हो गये और मेरे बचाव में लग गये. शिशिर अधिकारी बताते हैं : जब ब्रिज गिरने लगा, तो लगा जैसे धरती हिल रही है.
एकाएक महसूस हुआ कि मैं दो दीवारों के बीच फंसा हुआ हूं. कुछ समझ नहीं पा रहा था कि मैं क्या करूं. लगभग आधे घंटे के बाद स्थानीय लोग व राहत टीम पहुंची और लोगों का बचाव कार्य शुरू हुआ. मुझे एक समय लगा कि मैं भी मर सकता था, लेकिन मैं ठीक ठाक हूं. थोड़ी चोट लगी है.
…और इस बार राहत कार्य का सहारा बनी तकनीक
मनोरंजन सिंह
कोलकाता : मंगलवार की शाम को माझेरहाट ब्रिज का एक हिस्सा धराशायी हो गया. लोगों ने ऐसे भयानक हादसे की कल्पना भी नहीं की होगी. ब्रिज से कई वाहन गुजर रहे थे जबकि नीचे मेट्रो परियोजना के तहत काम करने वाले कुछ श्रमिकों की मौजूदगी थी.
हादसे के बाद कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन टीम, दमकल विभाग के कर्मी, एनडीआरएफ की टीम ने संयुक्त रूप से राहत कार्य शुरू किया. इस बार राहत कार्य में बेहतर तकनीक का सहारा लिये जाते देखा गया.
चार कैमरे की ली गयी मदद : ढहे ब्रिज में फंसे लोगों को ढूंढने के लिये चार कैमरे का इस्तेमाल किया गया. साथ ही तकनीकयुक्त मशीनों का सहारा भी लिया गया. शाम तक करीब 21 लोगों को बाहर निकाल लिया गया.
जुटी रही पांच कंपनियां : एनडीआरएफ के अधिकारी एन उपाध्याय ने बताया कि एनडीआरएफ की पांच कंपनियां राहत कार्य मेें जुटी हुई हैं. रात 10 बजे तक तलाशी अभियान जारी था. उन्होंने कहा कि जब तक पूरी तरह से तसल्ली नहीं हो जाती, अभियान जारी रहेगा.
मौत की परवाह नहीं किया परवेज ने : महानगर के स्टीफन हाउस अग्निकांड में जाबांजी दिखाने वाले परवेज अख्तर ने इस बार भी कुछ ऐसा ही किया. राहत कार्य मेें जुटे परवेज टूटे हुए ब्रिज के बीच पहुंच गये. लोगों को ढूंढने के लिये जान की परवाह किये बगैर 15 फीट नीचे उतर पड़े.
कोलकाता : माझेरहाट ब्रिज दुर्घटना में दबे लोगों की तलाश के लिए पुलिस स्नीफर डॉग की मदद ली गयी. दुर्घटना स्थल से पहले गाड़ियों को हटाया गया. लगभग नौ बजे तक ब्रिज के टूटे हिस्से से गाड़ियों को इलेवेटर क्रेन की मदद से हटाने का काम पूरा हो गया. लगभग पांच इलेवेटर क्रेन की मदद ली गयी.
उसके बाद पुलिस घटनास्थल पर दो स्नीफर डॉग को ले आयी और उसकी मदद से दबे लोगों को खोजने का कार्य शुरू किया. पुलिस को अनुमान है कि दबे मलवे में कुछ लोग हो सकते हैं. राहत टीम ने पहले 30 फीट गहरा छिद्र किया था तथा उससे आवाज लगानी शुरू की थी कि कोई है, आरंभ में दो लोगों की आवाज सुनायी दे रही थी, लेकिन बाद में वह आवाज अानी बंद हो गयी थी.
एसएसकेएम अस्पताल में घायलों का चल रहा इलाज
कोलकाता : माझेरहाट ब्रिज के हादसे में घायल नौ लोगों का इलाज एसएसकेएम में इलाज चल रहा है. इसके साथ ही एसएसकेएम अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में विशेष केबिन तैयार किया गया है, जहां उनका इलाज किया जा रहा है. हालांकि, यहा जानकारी के अनुसार, माझेरहाट दुर्घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एसएसकेएम अस्पताल को सतर्क कर दिया था. साथ ही यहां पर 50 अतिरिक्त स्ट्रेचर की भी व्यवस्था की गयी थी.
एसएसकेएम अस्पताल में घायलों का हाल जानने के लिए राज्य की स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य व सांसद शांतनु सेन वहां पहुंचे. घायलों की स्थिति को लेकर उन्होंने अस्पताल के अधीक्षक रघुनाथ मिश्र के साथ बातचीत की. मंत्री ने घायल लोगों के परिजनों से बातचीत की और उनके रहने के लिए अलग जगह की भी व्यवस्था की है.
आहिस्ता-आहिस्ता खतरे की ओर बढ़ रहा था ब्रिज
कोलकाता : करीब 40 वर्ष पहले बना माझेरहाट ब्रिज आहिस्ता-आहिस्ता अपने अंजाम की ओर बढ़ रहा था. लोक निर्माण विभाग के जिम्मे इसका रखरखाव था. हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि ब्रिज में दरार देखी जा रही थी. इस बाबत कई बार शिकायत की गयी थी. लेकिन हालात नहीं बदले थे.
ब्रिज के ध्वस्त होने के बाद ही दोषारोपण का सिलसिला भी शुरू हो गया है. भले ही लोकनिर्माण विभाग पर ब्रिज के रखरखाव की जिम्मेदारी थी, सरकार की ओर से यह कहना शुरू हो गया है कि करीब ही जोका-बीबीडी बाग मेट्रो रूट के लिए बन रहे माझेरहाट मेट्रो स्टेशन की वजह से बड़े वाइब्रेटर का इस्तेमाल वहां किया जा रहा था. यानी संकेत दिए जा रहे हैं कि ब्रिज ढहने के पीछे यह एक बड़ी वजह हो सकती है.
हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक 40 वर्ष पहले जब यह ब्रिज तैयार किया गया था तब न तो इतनी गाड़ियां थीं और न ही इतने बड़े गुड्स ह्विकल ही थे. इसके अलावा जो हिस्सा ढहा है उसके नीचे खाल है. इसकी वजह से जब ब्रिज बना था तो उस स्थान पर पिलर(खंभों) के बीच की दूरी अन्य स्थान की तुलना में अधिक हो गयी थी. जिससे वह हिस्सा कमजोर था और ब्रिज ढहने के पीछे यह कारण भी प्रमुख हो सकता है.
प्रांतिका ने वीडिया कॉल से दी जानकारी
कोलकाता : सूचना व तकनीक का इस्तेमाल कभी वरदान साबित होती है. प्रांतिका बस में बैठी थी और माझेरहाट ब्रिज से गुजर रही थी. उसी समय दुर्घटना हुई और बस नीचे आ गयी. प्रांतिका भी दुर्घटनाग्रस्त हुई और फिलहाल एसएसकेएम अस्पताल में चिकित्साधीन है.
प्रांतिका की पड़ोसी माधवी बताती हैं कि प्रांतिका ने वीडियो कॉल की और उन्हें दुर्घटना की जानकारी की. वह वीडियो कॉल में देख रही थी कि प्रांतिका दुर्घटना स्थल पर पड़ी हुई है.
उनसे राहत कार्य में जुड़े लोगों को फोन दिया और जब उन्होंने बताया कि वह भवानीपुर में रहती हैं और उन लोगों ने बताया कि वे उसे एसएसकेएम अस्पताल ले जा रहे हैं. उसके बाद वे लोग अस्पताल पहुंच गये.
माझेरहाट दुर्घटना ने विवेकानंद फ्लाईओवर की याद ताजा कर दी
कोलकाता. माझेरहाट पुल ढहने की घटना ने 31 मार्च 2016 की याद ताजा कर दी. उस दिन दुर्घटना में तकरीबन 27 लोग मारे गये थे. मंगलवार को हुई दुर्घटना में कई लोगों के मारे जाने की खबर है. इस पुल का रखरखाव राज्य के लोक निर्माण विभाग के पास है. विभिन्न माध्यमों से लोकनिर्माण विभाग के पास इस पुल की मरम्मत की खबर भेजी गयी थी.
इसकी जर्जर हालत को देखते हुए मीडिया भी इसको अपने सुर्खियों में रखा, लेकिन इसकी सुध लेने की किसी ने कोई जरूरत नहीं समझी. नतीजतन इस हादसे को लापरवाही ने आमंत्रित किया. पुल को दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद तकरीबन आधे घंटे तक कोई राहत दल नहीं पहुंचा. हालांकि स्थानीय लोग मौके पर पहुंचकर अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू कर दिए थे.
बाद में राहत दल पहुंचा. इसके पहले विवेकानंद फ्लाई ओवर को 2008 में प्रस्तावित किया गया था. साल 2009 में इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया.
इसको बनाने का काम हैदराबाद की कंपनी आईवीएरसीएल नामक कंपनी के जिम्मे था. इस कंपनी के कामकाज का इतिहास इस कदर था कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में इसको प्रतिबंधित कर दिया गया है.
बाबवूद इसको बनाने की जिम्मेवारी इसी कंपनी को दी गयी थी. कुछ इसी तरह की लापरवाही माझेरहाट ब्रिज के साथ हुई. इसकी जर्जर हालत की जानकारी स्थानीय लोगोें ने अपने जनप्रतिनिधि के अलावा संबंधित विभागों को भी दी. इस पुल के रखरखाव की जिम्मेवारी राज्य सरकार के अलावा रेल विभाग की भी है.
क्योंकि पुल के नीचे से रेल लाइन गयी है. जिस तरह पुल काफी व्यस्त है उसी तरह रेल यातायात का यह व्यस्त रूट है. बावजूद इसकी सूध लेने के लिए कोई नहीं था. बिल्कुल उसी तरह, जिस तरह विवेकानंद फ्लाईओवर का हादसा हुआ था. इस मामले में ममता बनर्जी ने जांच का आदेश दिया है. मजे की बात यह है कि विवेकानंद फ्लाईओवर की दुर्घटना के बाद भी जांच का आदेश दिया गया था. उक्त जांच रिपोर्ट का क्या हुआ, यह जगजाहिर है.
कोलकाता : माझेरहाट पुल ढहने से चक्र रेल सेवा बाधित
कोलकाता : माझेरहाट रोड ओवर ब्रिज का एक हिस्सा गिरने से जहां जान-माल का नुकसान हुआ, वहीं दक्षिण कोलकाता की ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई. डायमंड हॉर्बर रोड़ के साथ बेहला और मोमेनपुर में गाड़ियों का प्र‌वेश रोक दिया गया वहीं. उधर एहतियात को ध्यान में रखते हुए पूर्व रेलवे प्रशासन में चक्र रेल लाइन पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया. घटना के वक्त 30317 बालीगंज-दत्तपुकुर लोकल वाया सर्कुलर रेल न्यू अलीपुर स्टेशन से रवाना हुई थी, लेकिन तभी उक्त घटना की सूचना मिली.
घटना की सूचना मिलते ही न्यू अलीपुर स्टेशन मास्टर ने घटना की जानकारी तुरंत बालीगंज-दत्तपुकुर लोकल के चालक को दी गयी. घटना की जानकारी मिलते ट्रेन चालक ने तुरंत ट्रेन को रोक दिया. उस वक्त ट्रेन न्यू अलीपुर स्टेशन और माझेरहाट स्टेशन के मध्य थी.
सियालदह-बालीगंज सेक्शन में भी ट्रेन सेवा बांधित :घटना की जानकारी होते ही रेलवे प्रशासन द्वारा सियालदह (साउथ)-बजबज सेक्शन में भी ट्रेन परिचालन बंद कर दिया गया.
घटना के कारण सियालदह(साउथ)-बजबज सेक्शन की चार जोड़ी ट्रेनों का परिचालन रद्द कर दिया गया. घटना के कारण 30711 बालीगंज-दत्तपुकुर लोकल ट्रेन वाया सर्कुलर रेलवे के मार्ग में परिवर्तन करते हुए उक्त ट्रेन को बालीगंज-काकुरगाछी मार्ग से रवाना किया गया.
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