वंदे मातरम को तोड़कर कांग्रेस ने देश विभाजन की नींव डाली
Author Prabhat khabar digital desk
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कोलकाता : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्र गान वंदे मातरम के महज दो छंदों को लेकर और बाकी के छंदों को न अपनाकर देश में तुष्टिकरण की नींव डाली, जो बाद में देश के विभाजन का आधार बना. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेनशन, नयी दिल्ली की ओर से पहले […]
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कोलकाता : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्र गान वंदे मातरम के महज दो छंदों को लेकर और बाकी के छंदों को न अपनाकर देश में तुष्टिकरण की नींव डाली, जो बाद में देश के विभाजन का आधार बना. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेनशन, नयी दिल्ली की ओर से पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक व्याख्यानमाला में वक्तव्य रखते हुए श्री शाह ने कहा कि 1937 में कांग्रेस की प्रांतीय सरकारें बन गयी थी.
उसने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित गीत , ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्र गान की मर्यादा दी. लेकिन इस गान के महज दो छंदों को उन्होंने लिया. कांग्रेस ने अगर यह गलती न की होती तो देश का बंटवारा नहीं होता. वह इतिहास के विद्यार्थी हैं. कई लोग देश के विभाजन के लिए कभी अंग्रेज तो कभी मुस्लिम लीग को जिम्मेदार मानते हैं लेकिन उनके मुताबिक देश विभाजन के लिए वंदे मातरम गान को तोड़ना ही प्रमुख है. यह गीत किसी धर्म से जुड़ा हुआ नहीं था.
यह देश की संस्कृति की अभिव्यक्ति है. व्यक्ति को राष्ट्र के साथ जोड़ने का यह प्रयास था. इसे धर्म के साथ जोड़कर कांग्रेस ने विवाद की शुरुआत की और यही विभाजन की नींव बना. इस रचना को धार्मिकता का रंग देने की कोशिश की. जबकि आजादी का सारा पुण्य कांग्रेस के ही बैंक खाते में जमा हुआ है. वंदे मातरम पर चर्चा करते हुए श्री शाह का कहना था कि आनंदमठ में बंकिम चंद्र का यह गीत किसी साहित्यकार की रचना नहीं हो सकता.
जरूर साहित्यकार में ईश्वर का वास होगा तभी वह ऐसा लिख सकता है. यह आज भी देश में नयी चेतना का संचार करता है. कार्यक्रम में अध्यापिका पूरबी राय, बंकिम चंद्र का जीवन परिचय लिखने वाले अध्यापक अमित्रसूदन भट्टाचार्य, विशिष्ट साहित्यकार बुद्धदेव गुहा व अन्य मौजूद थे.
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