डोकलाम इफेक्ट : दीवाली में चीन के सामानों का कोलकाता में निकल रहा है दिवाला

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Oct 2017 2:42 PM

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कोलकाता: त्योहारों का सीजन चल रहा है. अभी दुर्गा पूजा का लुत्फ उठा कर ठीक से आराम भी नहीं किया कि दीवाली आ गयी. सजे बाजार व बाजारों में बढ़े खरीदारों से महानगर जगमगा रहा है. दीवाली है और घरों को रोशन करनेवाले सामानों की बात न की जाये, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. […]

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कोलकाता: त्योहारों का सीजन चल रहा है. अभी दुर्गा पूजा का लुत्फ उठा कर ठीक से आराम भी नहीं किया कि दीवाली आ गयी. सजे बाजार व बाजारों में बढ़े खरीदारों से महानगर जगमगा रहा है. दीवाली है और घरों को रोशन करनेवाले सामानों की बात न की जाये, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. दीवाली पर बाजार चीनी सामानों से भरे पड़े हैं, लेकिन इस बार हुए डोकलाम मुद्दे के कारण लोगों में चीनी सामानों का वर्चस्व कम देखने को मिल रहा है. चीन के साथ कड़वाहट का असर लोग चीनी सामानों का बहिष्कार कर निकाल रहे हैं. सालों से हम देखते आ रहे हैं कि दीवाली पर चीनी सामानों के अलावा लोग कुछ खरीदने को तैयार ही नहीं थे. मिट्टी के दीये व बर्तनों को खरीदना तो दूर देखने को भी तैयार नहीं थे. यही कारण था कि कुम्हारों व मूर्तिकारों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होने की कगार पर थी, लेकिन इस साल लोग चीनी सामानों को न खरीद कर मिट्टी के सामानों की खरीदारी करने में अपनी रुचि दिखा रहे हैं.

सिर्फ चीनी लाइटें व इलेक्ट्रॉनिक्स सामान ही नहीं, बल्कि चीन से आयातित मूर्तियों की खरीद भी कम देखने को मिल रही है. लोग मूर्तिकारों के हाथों की बनी मूर्तियां ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इसके अलावा सोने, चांदी, कपड़े, पूजन सामाग्री व अन्य सामानों की भी खरीदारी करते नजर आ रहे हैं. दीवाली के अवसर पर हर सामानों में छूट व ऑफरों की बरसात होती है तो लोग इसका भरपूर इस्तेमाल करने से चूक कैसे सकते हैं. दीवाली की खरीदारी लोग पूरे परिवार के साथ बाजार में आ रहे हैं. इसी दौरान लोग लजीज व्यंजनों का जायका लेना भी नहीं भूल रहे हैं. नामचीन व्यंजनों के दुकानों पर लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है.

क्या कहते हैं दुकानदार?
चांदनी चौक स्थित दुकानदार मो. इस्राफिल ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार बाजार मंदा है. लाइटों व अन्य सामानों के खरीद पर काफी गिरावट आयी है. वहीं उन्होंने कि इसके पीछे चीन का भारत के साथ बर्ताव तो जिम्मेदार है ही, लेकिन जीएसटी की मार भी इसमें उतना ही शामिल है.

चीनी लाइट की बिक्री में गिरावट, कारोबारी निराश
कोलकाता: ड्रैगन लाइट (चीन निर्मित लाइट) की बिक्री में गिरावट दर्ज की गयी है. चीन-भारत रिश्तों में बढ़ती तनातनी और डोकलाम विवाद का असर ड्रैगन लाइट की बिक्री पर भी दिखने लगा है. दिवाली के पहले कोलकाता के चाइनिज इलेक्ट्रानिक लाइटों के कारोबारी निराश हैं तथा कारोबार पूरी तरह से मंदा पड़ा है. दीवाली के पहले महानगर में इजरा स्ट्रीट, चांदनी चौक सहित कोलकाता के फुटपाथों पर चाइनिज इलेक्ट्रानिक लाइटों की बिक्री शुरू हो गयी है, हालांकि पिछले वर्ष दीवाली में चीन के उत्पादों के बहिष्कार की हवा चली थी, लेकिन इस वर्ष बाजार में ऐसा कुछ भी नहीं है, लेकिन कारोबारियों का कहना है कि लाइटों की बिक्री व कारोबार मंदा पड़ा है. कलकत्ता इलेक्ट्रिक ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव अरविंद तिवारी बाबा ने प्रभात खबर को बताया कि जीएसटी एवं नोटबंदी के दुष्प्रभाव से बाजार जूझ रहा है. पहले नोटबंदी ने बाजार की कमर तोड़ दी थी. अब जीएसटी से कारोबारी परेशान है. लोग कारोबार क्या करेंगे. जीएसटी के रिटर्न दाखिल करने व उनकी बारीकियों को ही लोग समझ नहीं पा रहे हैं. उनका कहना है कि हालांकि बाजार में स्वदेशी लाइटों की बात कही जा रही है तथा कहा जा रहा हैै कि चीनी लाइटों की जगह स्वदेशी लाइटें की बिक्री बढ़ी है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. बाजार में ज्यादातर चीनी लाइटें ही हैं और उन्हीं को स्वदेशी लाइट के नाम से बेजा जाता है. उन्होंने कहा कि चीनी लाइट के संबंध में एक कहावत काफी प्रचलित है, चले तो चांद तक, नहीं तो रात तक, लेकिन इस बार बाजार से बड़े कारोबारी से लेकर छोटे दुकानदार सभी निराश हैं. चीन लाइटों की बिक्री में 45 फीसदी की गिरावट : एसोचैम इस साल चीनी लाइट्स और गिफ्ट की बिक्री में पिछले साल की तुलना में 40 से 45 फीसदी की कमी आ सकती है. एसोचैम-सोशल डिवेलपमेंट फाउंडेशन के एक सर्वे में कहा गया है कि इसकी जगह देशी सामानों खासकर मिट्टी के दीए और घरों को सजाने-संवारने वाले सामानों की बिक्री बढ़ेगी. साल 2016 में दिवाली के दौरान करीब 6,500 करोड़ रुपये के चीनी उत्पादों की बिक्री हुई थी. सर्वे में कहा गया है कि पिछले साल इन चीनी सामानों की बिक्री कुल बाजार की बिक्री में 30 फीसदी हुई थी. इस साल लोग चाइनीज सामान की जगह देशी सामान खरीदने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं.

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