इससे एकमात्र भाजपा ही लोगों को बचा सकती है. यह बात ममता और उनकी पार्टी को पूरी तरह पता है. इसलिए वह अनाप-शनाप की बयानबाजी करती हैं, क्योंकि कांग्रेस और वामो ने बंगाल में दम तोड़ दिया है. एकमात्र भाजपा ही उन्हें टक्कर दे रही है. ऐसे में भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है.
वहीं, ममता बनर्जी इस मुद्दे के लिए वाममोर्चा को जिम्मेदार ठहरा रही हैं. उनके मुताबिक उन्होंने कोई अध्यादेश नहीं लाया था, लेकिन इन लोगों ने अफवाह फैलाकर माहौल को गर्म कर दिया है. गौरखालैंड मुद्दे पर इनका स्टैंड शुरू से ही लोगों को बरगलानेवाला रहा है. राज्य सरकार बंगाल का बंटवारा किसी भी कीमत पर नहीं होने देगी. यह राज्य की घोषित नीति है, जबकि वहां हाल ही में हुए नगर निकायों के चुनावों में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा को पता चल गया कि उनका जनाधार खिसक रहा है. इसलिए वह एक मुद्दे की तलाश में थे, जिसे लेकर अब वे फिर से हिंसा फैला सकें. इस मुद्दे को सिर्फ बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है.

