शीघ्र जांच, सख्त आइसोलेशन और प्रोटोकॉल आधारित उपचार पर जोर
कोलकाता. राज्य सरकार ने निपाह वायरस के संदिग्ध और पुष्टि हो चुके मामलों के उपचार को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी किये हैं. अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल निपाह वायरस से संक्रमित दो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है.
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में संक्रमण और मृत्यु दर को रोकने के लिए शीघ्र जांच, आइसोलेशन का सख्ती से पालन और प्रोटोकॉल-आधारित चिकित्सा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है. दिशानिर्देश के अनुसार, निपाह वायरस के सभी संदिग्ध मामलों को तुरंत पृथक किया जाना अनिवार्य होगा तथा संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के कड़े उपायों के साथ उनका उपचार केवल निर्दिष्ट स्वास्थ्य केंद्रों में किया जायेगा. दिशा-निर्देशों में निपाह मरीजों की देखभाल में लगे स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गयी है. इसमें उचित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीइ) किट के अनिवार्य उपयोग पर जोर दिया गया है, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके. सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई भी निश्चित या स्वीकृत एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है और सहायक देखभाल ही उपचार का मुख्य आधार बनी रहेगी. हालांकि, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परामर्श के अनुसार, रिबाविरिन नामक एंटीवायरल दवा के उपयोग पर विशेष परिस्थितियों में, खासकर उच्च जोखिम वाले मामलों में विचार किया जा सकता है.
जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने, मामलों की त्वरित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने और संदिग्ध मामलों की समय पर पुष्टि के लिए प्रयोगशालाओं के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिये गये हैं. राज्य सरकार ने कहा है कि निपाह से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए वह पूरी तरह तैयार है और आवश्यक प्रोटोकॉल लागू कर दिये गये हैं.
गौरतलब रहे कि उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल की दो नर्सों में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनका इलाज फिलहाल जारी है.
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