चक्रधरपुर ट्रेन हादसे में हुगली के चार निवासी भी जख्मी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 31 Jul 2024 1:12 AM
हुगली जिला प्रशासन ले रहा उनकी खोज-खबर
हुगली. झारखंड के चक्रधरपुर में हुए रेलव हादसे में हुगली के चार लोग भी जख्मी हुए हैं. हुगली जिला प्रशासन उनकी खोज ले रहा है. जिलाधिकारी मुक्ता आर्य के निर्देश पर घायल लोगों की खोज-खबर बीडीओ और एसडीओ रैंक के अधिकारी कर रहे हैं. जिलाधिकारी ने बताया कि चार घायलों में बलागढ़ खामारगाछी के एक दंपती, गुप्तिपाड़ा का एक व्यक्ति और धनियाखाली के मर्चेंट नेवी का जवान भी है. उसका नाम सुरंजनित घोष है. हादसे में घायल होने के बावजूद भी उन्होंने घायलों को ट्रेन की बोगी से निकालने में मदद की. 35 वर्षीय सुरंजनित घोष मुंबई में कार्यरत हैं. धनियाखाली के बीडीओ राजा ऋषि ने उसके घर पर जाकर उनके परिजनों और उसके पिता विश्वनाथ घोष से बातचीत की और हर तरह से सहायता का भरोसा दिया. बीडीओ के साथ घायल सुरंजनित घोष की बात हुई है. वह मुंबई न जाकर घर लौट रहे हैं. घायलों में बरुण दास, जो बलागढ़ थाना के गुप्तिपाड़ा 2 जीपी के निवासी भी हैं, वे इसी ट्रेन में थे. हालांकि, वह सुरक्षित हैं. उन्हें हल्की चोट आयी है. वह ट्रेन से गुप्तिपाड़ा वापस लौट रहे हैं. जिलाधिकारी ने बताया कि ट्रेन दुर्घटना में बलागढ़ के खामारगाछी के रहनेवाले दंपती, श्यामाप्रसाद हाल्दार और अंजना हाल्दार, हावड़ा गामी मुंबई एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे. उनका घर हुगली के बालागढ़ के खामारगाछी मुक्तकेशीतला में है. अंजना हाल्दार चंदननगर कमिश्नरेट में कार्यरत हैं और अपने इलाज के लिए मुंबई जा रही थीं. ट्रेन दुर्घटना की खबर सुनकर यात्रियों के परिवारों में चिंता फैल गई. बलागढ़ के खामारगाछी मुक्तकेशीतला में है. अंजना हाल्दार के परिजनों से पत्रकारों ने बातचीत की. श्यामाप्रसाद हाल्दार के भाई, रामप्रसाद हाल्दार ने बताया कि दुर्घटना के बाद उनके भाई ने उन्हें फोन कर सूचित किया. अंजना डर और घबराहट में जोर-जोर से रो रही थीं. रामप्रसाद ने कहा कि लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं के कारण ट्रेन यात्रा भयावह बन गयी है. श्यामाप्रसाद हाल्दार ने फोन पर बताया कि सुबह 3.30 बजे अचानक जोरदार झटके और तेज आवाज के साथ ट्रेन का डिब्बा झुक गया. वे बी-2 कोच में थे और ट्रेन के कुल 18 डिब्बे पटरी से उतर गये थे. चक्रधरपुर के पास उस लाइन के बगल में एक और लाइन बन रही थी, जिसके नीचे एक गहरा गड्ढा था. अगर ट्रेन वहां गिर जाती, तो हताहतों की संख्या बहुत अधिक हो सकती थी. श्यामाप्रसाद ने बताया कि मुंबई एक्सप्रेस बायीं ओर की लाइन पर जा रही थी, जबकि दायीं ओर की लाइन पर एक मालगाड़ी खड़ी थी. उस मालगाड़ी पर प्लास्टिक की चादर ढकी हुई थी, जो उड़ कर मुंबई एक्सप्रेस के इंजन के सामने आ गयी. कुछ दिखायी न देने के कारण संभवतः चालक ने ब्रेक लगाया.
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