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अस्पताल के आउटडोर के बाहर जूनियर डॉक्टरों ने चलाया ‘अभया क्लिनिक’

Updated at : 08 Sep 2024 9:38 PM (IST)
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अस्पताल के आउटडोर के बाहर जूनियर डॉक्टरों ने चलाया ‘अभया क्लिनिक’

आरजी कर अस्पताल की घटना के खिलाफ राज्य भर में न्याय की मांग को लेकर जूनियर डॉक्टर्स आंदोलन में उतरे हैं. वहीं मरीजों को समस्या का सामना ना करना पड़े इसके लिए जूनियर डॉक्टर्स फोरम की तरफ से अस्पताल के आउटडोर के बाहर ‘अभया क्लीनिक’ चलाया गया.

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बांकुड़ा.

आरजी कर अस्पताल की घटना के खिलाफ राज्य भर में न्याय की मांग को लेकर जूनियर डॉक्टर्स आंदोलन में उतरे हैं. वहीं मरीजों को समस्या का सामना ना करना पड़े इसके लिए जूनियर डॉक्टर्स फोरम की तरफ से अस्पताल के आउटडोर के बाहर ‘अभया क्लीनिक’ चलाया गया. सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक यह क्लिनिक चलाया गया. जिसका लाभ बड़ी तादाद में मरीजों ने उठाया. अन्य मेडिकल कालेजों की तरह बांकुड़ा सम्मिलनी मेडिकल कालेज व अस्पताल के जूनियर चिकित्सकों के आंदोलन करने के बावजूद इंडोर समेत आउटडोर परिसेवा में किसी प्रकार की समस्या मरीजों को नहीं होने का दावा पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फोरम की तरफ से किया गया है.

उनका कहना है कि चिकित्सा सेवा न दिये जाने को लेकर लोगो अफवाहें फैलायी जा रही हैं. फोरम के सदस्यों के मुताबिक विगत नौ अगस्त से पांच सितंबर तक आंकड़ों के मुताबिक बांकुड़ा सम्मिलनी मेडिकल कालेज व अस्पताल में 7742 मरीज भर्ती हुए हैं. जिनमें से मेडिसिन विभाग में 2649, सर्जरी में 608, स्त्री व प्रसूति विभाग में 1620, शिशु विभाग में 2236, ऑर्थो, नेत्र व इएनटी में 221 तथा अन्य विभागों में 410 मरीजों ने सेवा हासिल की है. इसके बावजूद लोगों को भ्रमित किया जा रहा है.रविवार के दिन बांकुड़ा मेडिकल कालेज व अस्पताल के आउटडोर के बाहर अन्य दिनों की तरह ही अभया क्लिनिक में सेवा लेने के लिए मरीजों की कतार देखने को मिली. यहां तक जनरल चिकित्सा संबंधी सभी सुविधाएं उपलब्ध करायीं गयीं और दवाएं भी दी गयीं. अभया क्लिनिक को लेकर मरीजों ने खुशी जाहिर की. उनका कहना था कि जो सेवा आउटडोर में मिलती है वहीं सेवा डॉक्टरों ने दी है.

फोरम के सदस्यों का कहना था कि अभया क्लीनिक के माध्यम से मरीजों को सेवा देने का बीड़ा उठाया गया है. जो राज्य स्तर पर हो रहा है. आउटडोर के बाहर क्लिनिक लगायी गयी. अगले दिनों में ग्रामीण इलाकों में जाकर सेवा दी जायेगी. उनकी लड़ाई मरीज या चिकित्सा व्यवस्था के खिलाफ नहीं है. उनकी लड़ाई न्याय के लिए है. उनकी लड़ाई चिकित्सक दीदी के लिए न्याय की है. दोषियों के खिलाफ वे सख्त सजा की मांग कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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