मुद्दे को लेकर अंत तक जाने के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के आश्वासन से जगी नयी उम्मीद

Updated at : 30 Apr 2025 9:54 PM (IST)
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मुद्दे को लेकर अंत तक जाने के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के आश्वासन से जगी नयी उम्मीद

आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पश्चिम बंगाल सिविल सर्विस (एक्जीक्यूटिव) परीक्षा के सिलेबस से हिंदी, उर्दू और संताली भाषा को हटाने के मुद्दे को लेकर अंत तक जाने का आश्वासन से गैर बांग्ला माध्यम विद्यार्थियों की उम्मीद नये सिरे से जग गयी है. नये सिलेबस को केबिनेट मंजूरी मिलने के बाद इसका गैजेट नोटिफिकेशन हुआ और फिर उसे पब्लिक सर्विस कमीशन पश्चिम बंगाल की वेबसाइट पर भी जारी किया जा चुका है.

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आसनसोल.

आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पश्चिम बंगाल सिविल सर्विस (एक्जीक्यूटिव) परीक्षा के सिलेबस से हिंदी, उर्दू और संताली भाषा को हटाने के मुद्दे को लेकर अंत तक जाने का आश्वासन से गैर बांग्ला माध्यम विद्यार्थियों की उम्मीद नये सिरे से जग गयी है. नये सिलेबस को केबिनेट मंजूरी मिलने के बाद इसका गैजेट नोटिफिकेशन हुआ और फिर उसे पब्लिक सर्विस कमीशन पश्चिम बंगाल की वेबसाइट पर भी जारी किया जा चुका है. इसके बावजूद सांसद इस मुद्दे को लेकर आगे बढ़ रहे हैं.

प्रभात खबर अखबार इस मुद्दे पर हर पहलू को सामने ला रहा है. इसी कड़ी में प्रभात खबर की पहल पर बुधवार को हिंदी माइनॉरिटी फोरम के सदस्यों ने सांसद श्री सिन्हा से मिलकर पूरे मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की और उन्हें ज्ञापन सौंपा. सांसद श्री सिन्हा ने कहा कि प्रभात खबर के माध्यम से इस मुद्दे की जानकारी हुई, जिसके बाद खुद प्रभात खबर अखबार से संपर्क करके पूरे विषय की जानकारी और राज्य के उच्च स्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों पत्र लिखा. बुधवार को ज्ञापन मिलते ही तुरंत उन्होंने राज्य के प्रमुख सचिव स्तर के (1996 बैच के) वरिष्ठ आइएएस अधिकारी को फोन किया और पूरे मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की. ज्ञापन देने वालों में हिंदी माइनॉरिटी फोरम के संयोजक सह राज्य हिंदी अकेडमी के सदस्य व शिक्षक मनोज यादव, जेके नगर हाइस्कूल के शिक्षक प्रभारी शमीम अख्तर व अन्य शामिल थे.

प्रभात खबर का प्रयास जारी, सांसद शत्रुघ्न सिन्हा कूदे मैदान में

डब्ल्यूबीसीएस (एक्जीक्यूटिव) परीक्षा का नया सिलेबस और पैटर्न इस तरह बनाया गया है कि कोई भी गैर बांग्ला माध्यम का छात्र उत्तीर्ण नहीं हो पायेगा. मेन के 300 नंबर का पेपर-ए का उत्तर सिर्फ बांग्ला/नेपाली भाषा में ही देना होगा. जबकि पहले पांच भाषाओं हिंदी/उर्दू/संताली/नेपाली/बांग्ला में देने का प्रावधान था. इस मुद्दे को लेकर 15 मार्च 2023 को गैजेट नोटिफिकेशन जारी हुआ. प्रभात खबर अखबार ने इस खबर का खुलासा किया और पूरे राज्य में आंदोलन शुरू हुआ. वर्ष 2024 चुनाव से पहले 11 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री ने यथास्थिति बहाल रखने की घोषणा की. चुनाव खत्म ही 24 जुलाई 2024 को संशोधित अधिसूचना जारी हुई, लेकिन हिंदी, उर्दू और संताली भाषा को शामिल नहीं किया गया. प्रभात खबर ने पुनः मुहिम शुरू की. सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने उस समय इस खबर को संज्ञान में लिया और प्रभात खबर के तर्क को सही करार दिया और खुद प्रभात खबर से संपर्क करके पूरे मामले की जानकारी ली और दो प्रमुख सचिवों को पत्र लिखा. 25 अप्रैल 2025 को नये सिलेबस की आधिकारिक घोषणा कर दी गयी. जिसकी खबर भी प्रभात खबर अखबार में प्रकाशित होते ही उन्होंने पुनः अखबार से संपर्क किया और राज्य के वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों के साथ मुद्दे पर चर्चा की. जिसकी पूरी जानकारी उन्होंने प्रभात खबर को दी. बुधवार को फोरम के सदस्यों द्वारा ज्ञापन मिलने के बाद उन्होंने इस मुद्दे को अंत तक ले जाने और सकारात्मक परिणाम हासिल करने की उम्मीद जतायी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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