भुगतान : ठेकेदारों का प्रशासन पर नहीं हो रहा भरोसा

सरकारी परियोजनाओं को धरातल पर उतारने वाले ठेकेदारों को कार्य के भुगतान को लेकर सरकार और प्रशासन पर नहीं हो रहा है भरोसा.
शिवशंकर ठाकुर, आसनसोल
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सरकारी परियोजनाओं को धरातल पर उतारने वाले ठेकेदारों को कार्य के भुगतान को लेकर सरकार और प्रशासन पर नहीं हो रहा है भरोसा. जिससे मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट आमादेर पाड़ा, आमादेर समाधान (आपास) अभियान के फंसने का डर बना हुआ है. फरवरी में अंत तक राज्य विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना प्रबल है. ऐसे में अधिसूचना जारी होने से पहले आपास के सभी निविदाओं को फाइनल करके वर्क ऑर्डर मुहैया कराना प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है. अन्यथा सारा कार्य चुनाव के कारण रुक जायेगा, जिसका खामियाजा सत्तारूढ़ पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ सकता है.क्या है आपास परियोजना?
आपास अभियान के तहत हर बूथ में विकास कार्य के लिए सरकार ने 10 लाख रुपये का फंड आवंटन किया है. इस फंड से क्या काम होगा? इसका निर्णय पाड़ा (मोहल्ले) में स्थानीय लोग बैठकर तय करेंगे, उसी के आधार पर कार्य होगा और 90 दिनों के अंदर काम पूरा करना है. इसमें लोगों को अपने जरूरत के आधार पर काम करवाने की आजादी मिल रही है. राज्यभर में 80 हजार बूथों के लिए 8000 करोड़ रुपये आवंटन किया गया है.एएमसी में 3336 योजनाओं के निविदा में 568 ही हुआ मैच्योर
आसनसोल नगर निगम (एएमसी) के 1039 बूथों के लिए आपास योजना के तहत कुल 3638 योजनाओं (कार्य) को जिला से मंजूरी मिली. जिसमें 3336 योजनाओं को लेकर जारी निविदा में 27 जनवरी तक 568 टेंडर ही मैच्योर हुआ और वर्क ऑर्डर जारी हो गया, 120 काम पूरा हुआ है. बाकी के निविदाओं में ठेकेदारों की भागीदारी करवाने को लेकर हर स्तर से उन्हें आश्वासन दिया जा रहा है कि निविदा में भागीदारी करें और काम पकड़े, पैसे का भुगतान जल्द से जल्द हो जाएगा. इसके बावजूद ठेकेदार अपनी रुचि नहीं दिखा रहे हैं. निगम में कुल 1043 बूथ है, चार बूथों की योजना को जल्द जिला में मंजूरी के लिए भेजा जायेगा. दुर्गापुर नगर निगम का हाल इससे थोड़ी बेहतर है, लेकिन परिस्थिति यही है. यहां भी कुल 518 बूथों में 1534 योजनाओं की मंजूरी मिली, 1531 की निविदा जारी हुई और 511 ही मैच्योर हो पाया है.तीसरी बार निविदा जारी होने के बाद भी ठेकेदारों के लाले
रिपोर्ट के अनुसार कुल 215 योजनाओं को लेकर दूसरी बार निविदा जारी होने के बाद भी यह मैच्योर नहीं हुआ, 35 योजनाओं के लिए तीसरी बार निविदा जारी करने के बाद भी ठेकेदारों ने कोई रुचि नहीं दिखायी. नियमतः एक निविदा में न्यूनतम तीन ठेकेदारों की भागीदारी होने पर ही टेंडर मैच्योर होता है, अन्यथा उस निविदा को फिर से करना पड़ता है. तीन से चार बार मैच्योर नहीं होने पर प्रशासन चाहे तो दो ठेकेदारों के भागीदारी में भी टेंडर आवंटित कर सकता है. इसके बाद भी मैच्योर नहीं होने पर टेंडर को नये सिरे से बनाकर फिर डाला जाता है. टेंडर मैच्योर नहीं होने पर वही टेंडर फिर से होने पर दो सप्ताह का समय लग जाता है. चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले सभी योजनाओं का वर्क ऑर्डर जारी करने को लेकर नगर निगम के पास समय की भारी कमी है.काम खत्म करते ही हफ्तेभर में पैसे का होगा भुगतान: डीएम
जिलाधिकारी एस पोन्नमबलम ने कहा कि आपास में आसनसोल नगर निगम के लिए 100 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी मिली है, जिसमें 28 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है. शुरुआत में ठेकेदारों के साथ कुछ समस्या थी, वे काम में रुचि नहीं ले रहे थे. एक माह पहले सिर्फ 100 टेंडर ही मैच्योर हुआ था. मेयर, डिप्टी मेयर, चेयरमैन, निगम आयुक्त ने एजेंसियों के साथ बैठक करके उन्हें भोरसा दिया कि पैसे के भुगतान को लेकर कोई समस्या नहीं होगी. एक महीने के अंदर ही यह आंकड़ा सौ से छह सौ चला गया. जल्द ही सारे स्कीम का टेंडर मैच्योर हो जाएगा. आपास की योजनाओं को मंजूरी मिलते ही फंड आवंटित हो जा रहा है. काम खत्म करने के सात दिनों के अंदर पैसे का भुगतान कर दिया जा रहा है.
ठेकेदारों को भुगतान को लेकर सता रहा है डर
एएमसी के ठेकेदार विश्वजीत मेहरा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि काम का पैसा कब मिलेगा, कोई नहीं जानता है. पिछले दो-तीन साल का पैसा भी बकाया है. अधिकारी हर बार आश्वसन देकर काम करवा लेते हैं, फिर पैसा के लिये दौड़ते रहना पड़ता है. इसलिए कोई भी ठेकेदार काम पकड़ने से हिचकिचा रहे हैं. भुगतान यदि सही रहता तो एक टेंडर निकलते ही उसपर दस ठेकेदार कूद पड़ते, यहां घर से बुलाया जा रहा है, फिर भी कोई नहीं मिल रहा है.
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