प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, श्याम सेल कारखाने के सामने किया विरोध प्रदर्शन

औद्योगिक क्षेत्र जामुड़िया मंडलपुर, इकड़ा मुड़िया में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ स्थानीय निवासियों का धैर्य जवाब दे गया.
जामुड़िया.
औद्योगिक क्षेत्र जामुड़िया मंडलपुर, इकड़ा मुड़िया में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ स्थानीय निवासियों का धैर्य जवाब दे गया. बुधवार सुबह महिषाबुड़ी, चंडीपुर और इकड़ा गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने श्याम सेल कारखाने के गेट नंबर 3 को जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. ग्रामीणों का आरोप है कि कारखाने से निकलने वाली डस्ट और जहरीले धुएं ने इलाके में जनजीवन नारकीय बना दिया है.काली राख की चादर में लिपटे गांव
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि बीती रात कारखाने से भारी मात्रा में प्रदूषण निकला, जिसके कारण सुबह तक पूरे इलाके में काली राख की मोटी परत जम गयी. घरों की छतों, रास्तों और यहां तक कि पीने व स्नान करने वाले तालाबों का पानी भी काला हो चुका है. स्थानीय निवासी राजा घोष ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, ‘हम वर्षों से यह मार झेल रहे हैं, लेकिन अब बर्दाश्त की सीमा पार हो गयी है. सड़कों पर चलना मुश्किल है, कपड़े और घर गंदे हो रहे हैं. यह सिर्फ प्रदूषण नहीं, हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है.’
बाउंसरों के जरिये मारपीट का आरोप
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब सुबह वे अपनी शिकायत लेकर कारखाना प्रबंधन के पास पहुंचे, तो अधिकारियों से बात करने के बजाय वहां तैनात बाउंसरों ने ग्रामीणों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की. ग्रामीणों का कहना है कि कारखाना प्रबंधन प्रदूषण फैलाने के साथ-साथ ””गुंडागर्दी”” के दम पर उनकी आवाज दबाना चाहता है. इसी के विरोध में ग्रामीण एकजुट होकर गेट पर धरने पर बैठ गये.
मशीन खराब होने का प्रबंधन ने दिया हवाला
घटना की सूचना मिलते ही जामुड़िया थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया. पुलिस की मौजूदगी में कारखाना अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्वीकार किया कि प्रदूषण नियंत्रण मशीन में खराबी आने के कारण अचानक प्रदूषण बढ़ा है. वहीं कारखना प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि जब तक मशीन ठीक नहीं होती, उस यूनिट का परिचालन बंद रखा जायेगा. ग्रामीणों की अन्य मांगों पर लिखित पत्र मिलने के बाद नियम अनुसार कार्रवाई की जायेगी. प्रबंधन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद घंटों चला प्रदर्शन समाप्त हुआ, हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाये गये और प्रदूषण पर लगाम नहीं लगी, तो वे भविष्य में इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
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