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पूर्व बर्दवान में एचआइवी के 332 मामले, छात्रों में बढ़ता संक्रमण बना स्वास्थ्य विभाग की चुनौती

Updated at : 12 Feb 2026 1:28 AM (IST)
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पूर्व बर्दवान में एचआइवी के 332 मामले, छात्रों में बढ़ता संक्रमण बना स्वास्थ्य विभाग की चुनौती

छात्रों और समलैंगिक समुदाय में बढ़ते मामलों को लेकर विभाग सतर्क है.

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बर्दवान/पानागढ़ पूर्व बर्दवान जिले में एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक जिले में 332 एचआइवी पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 90 समलैंगिक शामिल हैं. संक्रमितों में नाबालिग से लेकर 14 वर्ष से अधिक आयु के किशोर, युवा और 50 वर्ष से अधिक आयु के वयस्क भी शामिल हैं.

छात्रों व विशेष समूहों में वृद्धि

जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 2024 में 24 छात्र एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 37 हो गई. वर्ष 2025 में जिले में कुल 314 संक्रमित मिले थे, जबकि 2024 में 257 और 2023 में 258 मामले सामने आए थे. छात्रों और समलैंगिक समुदाय में बढ़ते मामलों को लेकर विभाग सतर्क है. विभाग का कहना है कि शहरी और शिक्षित वर्ग में भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं, जो नई चुनौती है. जांच में बढ़ोतरी, पहचान तेज

पिछले वित्तीय वर्ष में 1,12,000 एचआईवी जांच की गई थीं, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में यह संख्या बढ़कर 1,45,000 पहुंच गई है.

संक्रमण के कारण व जागरूकता अभियान

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संक्रमण केवल असुरक्षित यौन संबंध से नहीं, बल्कि संक्रमित रक्त चढ़ाने, नशीली दवाओं के लिए एक ही सिरिंज के उपयोग और एचआईवी पॉजिटिव महिला से गर्भस्थ शिशु तक भी फैल सकता है. एचआईवी गाइडलाइन के तहत संक्रमित व्यक्ति की पहचान और निजी जानकारी गोपनीय रखी जाती है. जिले में विभिन्न संस्थाएं और गैर सरकारी संगठन जागरूकता अभियान चला रहे हैं. समलैंगिक समुदाय सहित विभिन्न समूहों तक पहुंच बनाकर परामर्श और जांच की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है, ताकि संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके. क्या कहते हैं सीएमओएच

जिला मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी जयराम हेम्ब्रम ने बताया कि जांच का दायरा बढ़ाने से अधिक संक्रमितों की पहचान हो रही है. संक्रमितों की काउंसेलिंग की जा रही है और उन्हें नियमित उपचार से जोड़ा जा रहा है, जिससे संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके. उनका कहना है कि अधिक जांच समाज के लिए सकारात्मक है, क्योंकि समय पर पहचान और इलाज से संक्रमण का खतरा कम होता है.

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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