धान की पराली से बनेगी ईंट

पानागढ़ : कृषि के क्षेत्र में नये संसाधनों के प्रयोग से खेती जहां सहज हुई है. वहीं, नए संसाधनों के कारण पैदावार भी बड़ा है. लेकिन इन सबके बावजूद धान, गेहूं कटाई के बाद पराली ( पैडी स्ट्रा ) का क्या किया जाये, यह किसानों के लिए चिंता की बात है. फसल काटने के बाद […]
पानागढ़ : कृषि के क्षेत्र में नये संसाधनों के प्रयोग से खेती जहां सहज हुई है. वहीं, नए संसाधनों के कारण पैदावार भी बड़ा है. लेकिन इन सबके बावजूद धान, गेहूं कटाई के बाद पराली ( पैडी स्ट्रा ) का क्या किया जाये, यह किसानों के लिए चिंता की बात है. फसल काटने के बाद किसान इन पैडी स्ट्रा को खेतों में ही जला देते हैं. इससे पर्यावरण को दोहरा नुकसान होता है.
पहला, इससे प्रदूषण फैसला है और दूसरा, इससे जमीन की उर्वरक क्षमता कम होती जाती है. ऐसे में पूर्व बर्दवान जिला प्रशासन द्वारा आइआइटी के युवकों को लेकर इस समस्या से निजात पाने के लिए नया वैकल्पिक योजना तैयार किया गया है, जिससे पर्यावरण को नुकसान भी नहीं होगा, ना ही जमीन की उर्वरक क्षमता कम होगी. सिर्फ यही नहीं, इससे किसानों की आमदनी भी होगी.
आइआइटी खड़गपुर ने धान के पराली से पैडी स्ट्रा ब्रिकेट्स (धान के पुआल की बनी ईंट) बनाने की योजना बनायी है, यह ब्रिकेट्स जलावन के काम में आयेगा और इसे कोयला के वैकल्पिक ईंधन के रूप में प्रयोग किया जा सकता है. सबसे अहम बात यह है कि इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी. इस योजना को पूर्व बर्दवान जिला प्रशासन जिले के कृषि विभाग व आइआइटी खड़गपुर के साथ मिल कर क्रियान्वित करना चाहती है.
पूर्व बर्दवान के जिलाधिकारी विजय भारती द्वारा जिले के तीन ब्लॉक रायना 1-2 तथा गलसी ब्लॉक में सबसे पहले इसे लेकर काम शुरू किया गया है. इन ब्लॉक में ‘पैडी स्ट्रा ब्रिकेट्स ‘ का कारखाना लगाया जायेगा. जिला कृषि विभाग ने इस संबंध में किसानों को जागरूक करने का काम शुरू कर दिया है. इस कार्य में नाबार्ड के अधीन विभिन्न सेल्फ हेल्प ग्रुप, फार्मर प्रोड्यूसर क्लब द्वारा पैडी स्ट्रा ब्रिकेट्स ईट को लेकर काम शुरू कर दिया गया है.
पूर्व बर्दवान जिला कृषि विभाग के मुख्य अधिकारी जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने बताया कि कृषि क्षेत्र में संसाधनों तथा मशीनों के बढ़ने के कारण जहां कृषकों तथा कृषि क्षेत्र में विकास हुआ है. वहीं, कंबाइन मशीनों द्वारा धान तथा गेहूं कटाई के बाद खेतों में पराली अथवा पैडी स्ट्रा के बचने के बाद किसानों द्वारा खेतों में ही जला दिए जाने से एक ओर जहां प्रदूषण बढ़ रहा है. वहीं मिट्टी की उर्वरक शक्ति भी नष्ट हो रही है. इस समस्या को दूर करने के उद्देश्य से ही पैडी स्ट्रा को खेतों से निकाल ब्रिकेट तैयार किया जाएगा.
खड़गपुर आईआईटी के साथ मिलकर पैडी स्ट्रा ब्रिकेट ईट तैयार करने की योजना है. कृषि अधिकारी ने बताया कि फार्मर्स क्लब के लोग यदि कारखाना स्थापित करते हैं तो उन्हें हर संभव मदद की जाएगी. कृषि अधिकारी ने बताया कि उक्त ब्रिकेट ईट का प्रयोग मुख्य रूप से ताप विद्युत केंद्रों में प्रयोग में लाया जायेगा.
उक्त कारखाने को लेकर सरकारी संस्थाएं भी आगे आ सकती हैं. जिला प्रशासन इस दिशा में हरसंभव मदद करेगा. जिला प्रशासन द्वारा बताया गया कि फिलहाल जिले के तीन ब्लॉक में पैडी स्ट्रॉ ब्रिकेट्स के उत्पादन के लिए कारखाना लगाया जायेगा. भविष्य में जिले के सभी ब्लॉक में इस योजना को शुरू किया जायेगा.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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