दम तोड़ रहीं बच्चों को खेल-कूद से जोड़नेवाली संस्थाएं

Updated at : 13 Oct 2019 12:56 AM (IST)
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दम तोड़ रहीं बच्चों को खेल-कूद से जोड़नेवाली संस्थाएं

नीरज श्रीवास्तव, दुर्गापुर : शहर में किसी जमाने में काफी संख्या में सब पेयेछिर आसर (बच्चो को खेल-कूद के लिए प्रेरित करने वाली संस्था) सक्रिय रहती थी. इस दौर में इन संस्थाओं ने दम तोड़ता शुरू कर दिया है. आधुनिक दौर में देशी पारंपरिक खेलों के प्रति बच्चों का इंट्रेस्ट कम हो रहा है. जिसके […]

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नीरज श्रीवास्तव, दुर्गापुर : शहर में किसी जमाने में काफी संख्या में सब पेयेछिर आसर (बच्चो को खेल-कूद के लिए प्रेरित करने वाली संस्था) सक्रिय रहती थी. इस दौर में इन संस्थाओं ने दम तोड़ता शुरू कर दिया है. आधुनिक दौर में देशी पारंपरिक खेलों के प्रति बच्चों का इंट्रेस्ट कम हो रहा है. जिसके कारण संस्था की संख्या में लगातार कमी हो रही है. पहले अधिसंख्य गली-मोहल्ले के मैदानों में संचालित सव पेयेछिर आसर में बच्चों की धमाचौकड़ी के बीच भारतीय पारंपरिक खेलों की झलक दिखती थी. लेकिन भाग-दौड़ की इस ज़िंदगी में बच्चे मैदान से दूर हो रहे हैं. हालांकि कुछ लोग इन संस्थाओ को जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं.

सव पेयछिर आसर दुर्गापुर अंचल के संगठक संजय महापात्र ने कहा कि बीते 70 साल से अधिक समय से इनका संचालन पूरे राज्य में हो रहा है. दुर्गापुर मे इसकी संख्या पहले 42 से अधिक थी. लेकिन बीते 10-15 सालो मे इनकी संख्या घट कर मात्र पांच रह गई हैं.
बच्चो को पारंपरिक खेलो के साथ-साथ विभिन्न खेलो का प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्होने कहा कि खेलों का महत्व धीरे-धीरे कम होने लगा है. खेल सभी के लिए न सिर्फ मनोरंजन का साधन है, बल्कि शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास के लिए भी खेल जरूरी है. भारतीय परंपरा में दर्जनों ऐसे खेल हैं, जिनका सीधा संबंध शारीरिक तथा मानसिक विकास से है.
मौजूदा परिवेश में खेल-कूद धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं. उन्होने इसके लिए बच्चो के साथ-साथ अभिभावकों को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अभिभावकों को भी अपने बच्चो को खेल-कूद के प्रति जागरूक कराना होगा. उन्हें टीवी और मोबाइल फोन की ज़िंदगी से दूर कर मैदान की ओर भेजने की जरूरत है. जिससे बच्चो के शारीरिक व मानसिक विकास में वृद्धि होगी.
उन्होने बताया कि इंटरनेट के इस दौर में शारीरिक विकास वाले खेलों के प्रति बच्चों का रुझान कुछ कम हुआ है, फिर भी प्रयास जारी है. पारंपरिक खेल के प्रति छात्रों का रुझान बढ़ाना होगा. दुर्गा पूजा से कुछ दिन पहले सागरभांगा में सवपेयेछिर आसर की शुरुआत की गई है. दुर्गापूजा के बाद भिरिंगी इलाके मे भी इसकी शुरुआत की जायेगी.
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