राष्ट्र, धर्म की अवधारणा पर सेमिनार सात को

Updated at : 17 Jun 2019 12:44 AM (IST)
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राष्ट्र, धर्म की अवधारणा पर सेमिनार सात को

हिंदी माध्यम स्कूलों में बांग्ला को तृतीय भाषा में पढ़ाने की मांग सभी स्कूलों में अतिरिक्त पूर्णकालिक शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी राज्य शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपने पर सहमति, संवाद पर जोर आसनसोल : संसदीय चुनाव के पहले से शुरू पश्चिम बंगाल में हिंसक घटनाओं की शुरूआत चुनाव के बाद भी जारी रहने, हिंदी भाषियों […]

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  • हिंदी माध्यम स्कूलों में बांग्ला को तृतीय भाषा में पढ़ाने की मांग
  • सभी स्कूलों में अतिरिक्त पूर्णकालिक शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी
  • राज्य शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपने पर सहमति, संवाद पर जोर
आसनसोल : संसदीय चुनाव के पहले से शुरू पश्चिम बंगाल में हिंसक घटनाओं की शुरूआत चुनाव के बाद भी जारी रहने, हिंदी भाषियों के जाने-अनजाने केंद्र में आ जाने तथा हिंदी व बांग्ला पढ़ने आदि मुद्दों को लेकर हिंदीभाषियों के बीच चल रही छटपटाहट के मुद्दे पर रविवार को नगर निगम मुख्यालय के आलोचना सभागार में हिंदीप्रेमियों की बैठक हुई.
इसकी अध्यक्षता सह आयोजन कथाकार सृंजय तथा संचालन शिक्षक नेता मनोज यादव ने किया. बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के बाद आगामी सात जुलाई को ‘राष्ट्र तथा धर्म की अवधारणा तथा उनके संबंधों’ पर सेमिनार करने का निर्णय लिया गया. इसे राष्ट्रीय स्तर के वक्ता संबोधित करेंगे. इसके लिए तैयारी कमेटी गठित करने परसहमति बनी.
आयोजक कथाकार सृंजय ने कहा कि राज्य की मौजूदा स्थिति काफी संवेदनशील तथा खतरनाक दौर से गुजर रही है. संसदीय चुनाव से पहले से ही आसनसोल कोयलांचल में सांप्रदायिक घटनाएं लगातार घट रही हैं. मामूली बातें सांप्रदायिक रूप ले रही है. सौहार्द और भाईचारा समाप्त हो चुका है.
चुनाव बीतने के बाद भी राजनीतिक हिंसा जारी है. मरीज की मौत के बाद चिकित्सकों की पिटाई, मुख्यमंत्री का कचरापाड़ा में बांग्ला बोलने की अनिवार्यता के बयान आदि गंभीर हालात पैदा कर रहे हैं. धर्म और राजनीति का मेल नये संकट पैदा कर रहा है. इस स्थिति में संवेदनशील हिंदी प्रेमियों की पहल बेहद जरूरी है. इन मुद्दों पर संवाददीनता तोड़ने के लिए बैठक बुलाई गई है.
वक्ताओं ने कहा कि राज्य की मौजूदा स्थिति के लिए राजनीति मुख्य रूप से जिम्मेवार है. यह स्थिति वर्ष 2021 में होनेवाले विधानसभा चुनाव तक और अधिक गंभीर होगी. इस स्थिति में हिंदीप्रेमियों को सार्थक हस्तक्षेप करना होगा. उन्होंने कहा कि बांग्ला बोलने और सीखने में हिंदी प्रेमियों को कोई परेशानी नहीं है तथा बांग्ला सीखने से उनकी दक्षता ही बढ़ेगी.
लेकिन कुछ शक्तियां इसे गलत रूप दे रही है. उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह राज्य में भी त्रिभाषा फार्मूला लागू होना चाहिए. छठी से 10वीं तक इसकी पढ़ाई हाई स्कूल में होनी चाहिए तथा सभी हिंदी माध्यम स्कूलों में अतिरिक्त बांग्ला शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए. यह मांग काफी पुरानी है. इस संबंध में राज्य सरकार के शिक्षा विभाग को ज्ञापन देने का प्रस्ताव पारित किया गया.
उन्होंने कहा कि जिले में सांप्रदायिक सौहार्द तथा भाईचारा को बनाये रखने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार सचेतनता अभियान की जरूरत है तथा इसके लिए मोहल्ला स्तरीय जागरण अभियान चलाना चाहिए. इसी परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय सेमिनार सात जुलाई को करने का निर्णय लिया गया.
बैठक में डॉ मीना कुमारी, दिनेश पांडेय, बदरंगबली कहांर, रामनाथ सिंह, जयप्रकाश नारायण, संजय प्रसाद, संजय कुमार पासवान, विमल जालान, मुकेश झा, शुभनाथ चौधरी, रवींद्र प्रसाद, संजय साव, शंभूनाथ झा, आनंद कुमार आनंद, रविशंकर चौबे, गणेश कुमार राजदेव, बीरू रजक, शिव कुमार यादव, निर्मल झा, उमेश चन्द्र कुशवाहा, जयराम कुमार पासवान, उमेश प्रसाद यादव, डॉ संदीप पांडेय, मजफूर आलम, अशोक कुमार झा, संजीव कुमार, ध्रुव नारायण गिरि, जगदीश पंडित, संतोष यादव, छोटे लाल यादव, संजीव सिंह, सोहनराम रजक, उमाशंकर राय. मोती सिंह यादव, सुधीर कुमार वर्मा, राहुल देव पांडेय, सुरेन्द्र सिंह, सीताराम पंडित, महावीर प्रसाद ठाकुर, संजय कुमार साव, संतोष कुमार ठाकुर, रामबाबू साव आदि उपस्थित थे.
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