बातचीत जारी, पर विलय में पेच कम नहीं

Updated at : 18 Jul 2018 12:08 AM (IST)
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बातचीत जारी, पर विलय में पेच कम नहीं

आसनसोल : इंटक के राजेंद्र सिंह तथा चन्द्रशेखर दूबे उर्फ ददई दूबे गुट के बीच विलय के बाद लगातार बातचीत तो जारी है, लेकिन रोड़े अभी कम नहीं हुये हैं. ऐसे में सबकुछ बहुत जल्द ठीक-ठाक होने की संभावना कम ही है. 17 जून को रांची से लेकर 22-23 जून को पुरी तथा 12-15 जुलाई […]

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आसनसोल : इंटक के राजेंद्र सिंह तथा चन्द्रशेखर दूबे उर्फ ददई दूबे गुट के बीच विलय के बाद लगातार बातचीत तो जारी है, लेकिन रोड़े अभी कम नहीं हुये हैं. ऐसे में सबकुछ बहुत जल्द ठीक-ठाक होने की संभावना कम ही है. 17 जून को रांची से लेकर 22-23 जून को पुरी तथा 12-15 जुलाई दिल्ली तक की मैराथन बैठकों के बावजूद सुलह की रफ्तार जिस तेजी से चलनी चाहिए थी, वह नहीं दिखती. तय तिथि पर न तो दोनों पक्षों के वकीलों में कोई वार्ता ही हुई और न ही कोर्ट में सुलह की अर्जी ही दाखिल हो सकी. यही नहीं कार्यकारिणी का एलान भी नहीं हो सका. दूसरी तरफ श्री दूबे अध्यक्ष जी संजीवा रेड्डी के रुख को लेकर बहुत सहज नहीं. वे रेड्डी को इंटक के एचएमएस में मर्ज करने को ले प्रयासरत देखते हैं.
कार्यकारिणी गठन में महाधिवेशन का पेच
सूत्रों की मानें तो आगामी 27-28 अगस्त को राजस्थान के उदयपुर में आहूत इंटक वर्किंग कमेटी की बैठक से पहले इंटक में ददई दुबे व उनके समर्थकों की सूची को अंतिम रूप देकर वर्किंग कमेटी में पदों की घोषणा की जानी थी. सूत्रों की मानें तो अब तक पदों के एलान न होने से ददई दुबे नाराज चल रहे हैं. वे हर हाल में केंद्रीय इंटक में अपने समर्थकों को देखना चाहते हैं. चर्चा यह भी थी कि ददई दुबे को केंद्रीय इंटक का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जायेगा, लेकिन इस बीच संजीवा रेड्डी ने तकनीकी पेच लगा दी. रेड्डी के हवाले से कहा गया कि इंटक महाधि‍वेशन से पहले पद की घोषणा संविधान विरुद्ध है. जहां तक कोल फेडरेशन, सेंट्रल आरसीएमएस व झारखंड इंटक की बात है तो इसके पदों के बंटवारा के लिए राजेंद्र सिंह व ददई दुबे अधिकृत हैं.
दिल्ली की बैठक पर लगी टकटकी
तय तिथि पर दोनों पक्ष के वकील के साथ ना तो बात हुई और ना ही दिल्ली उच्च न्यायालय में सुलह समझौते की अरजी ही फाइल हो सकी. ददई दुबे वापस झारखंड लौट आये तो राजेंद्र सिंह टाटा बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के एक कार्यक्रम में भाग लेने मुंबई चले गये. जानकारी के अनुसार फिर से एक बार दोनों गुट के नेता 24-25 जुलाई को दिल्ली में बैठेंगे तथा सुलह का प्रयास होगा. अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तभी ददई दुबे 27-28 अगस्त को उदयपुर में आयोजित इंटक वर्किंग कमेटी की बैठक में हिस्सा लेने अपने समर्थकों के साथ जायेंगे अन्यथा नहीं जायेंगे.
रेड्डी का रुख ददई को कर रहा परेशान
ददई दुबे ने बातचीत में कहा कि राजेंद्र प्रसाद सिंह के साथ जुलाई में दिल्ली में लगातार सौहार्दपूर्ण बैठकें हुईं. राजेंद्र सिंह बधाई के पात्र हैं जिन्होंने विवाद को सलटाने का हरसंभव प्रयास किया और अभी भी कर रहे हैं. बैठक में संजीवा रेड्डी की ओर से कोई नहीं था. इसलिए अभी कुछ ठोस नहीं हो पाया है. 24-25 जुलाई को फिर से बैठक होगी, लेकिन अब रेड्डी बुलायेंगे तभी दिल्ली जायेंगे. समझौता होने पर पदों का बंटवारा ऊपर से ही पहले करना होगा. इसलिए इंटक में भी पदों की घोषणा होनी चाहिए. श्री दुबे ने कहा कि संजीवा रेड्डी ऐसे भी इंटक के धड़ों के विलय की बजाय इंटक का एचएमएस में विलय को लेकर ज्यादा परेशान हैं. वे अभी भी चाहते हैं कि सब कुठ ठीकठाक हो जाये, लेकिन कोई नहीं चाह रहे तो इसमें वे क्या कर सकते हैं ?
मुझे अब पद की कोई लालसा नहीं : राजेंद्र
इंटक के राष्ट्रीय महामंत्री व पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह ने मंगलवार को दिल्ली से बातचीत में कहा कि ददई दुबे के साथ दिल्ली में बैठे थे. वार्ता जारी है. कुछ बिंदु पर जिच है. एक बार फिर 24-25 को दिल्ली में बैठेंगे. जहां तक इंटक में ददई दुबे व उनके समर्थकों के पदों की बात है तो इस पर मंथन चल रहा है. इंटक वर्किंग कमेटी को यह तय करना था. ऐसे भी दिसंबर में होनेवाले इंटक महाधिवेशन में पदों की घोषणा की बात कही जा रही है. प्रयास होगा कि मिल-बैठकर मामले को खत्म किया जाये. ऐसे उन्हें अब किसी पद की कोई लालसा नहीं है.
एचएमएस के साथ विलय में हर्ज क्या : रेड्डी
इंटक अध्यक्ष डॉ जी संजीवा रेड्डी ने मंगलवार को दूरभाष पर कहा कि इंटक का एचएमएस के साथ विलय को लेकर प्रयासरत हैं. क्यों नहीं विलय होना चाहिए, जब विश्व के सभी देशों में एक ही ट्रेड यूनियन है तो भारत में भी एक ही ट्रेड यूनियन क्यों नहीं चलनी चाहिए. इंटक व एचएमएस के विलय को लेकर पांच-पांच लोगों की कमेटी भी गठित हुई है. इंटक के दोनों गुटों के विलय का स्वागत है. अब सभी लोग एक साथ मिल कर काम करेंगे. जहां तक केंद्रीय इंटक में पदों का सवाल है तो सबकुछ इंटक संविधान के आलोक में ही होगा. इंटक के संविधान से बाहर हम नहीं जा सकते.
एक अगस्त को होगी कोर्ट में सुनवाई
इधर दिल्ली उच्च न्यायालय में इंटक राजेंद्र व ददई गुट द्वारा दायर अलग-अलग मामलों की सुनवाई की तिथि आगामी एक अगस्त को होगी. अगर विलय पर पूरी तरह से मुहर नहीं लग पायी तो फिर दोनों गुट की नजर कोर्ट के फैसले पर होगी. मालूम हो कि ददई दुबे की ओर से उच्च न्यायालय में चार अलग-अलग रिट दाखिल किये गये हैं. कोर्ट ने सभी को एक साथ टैग कर दिया है. सितंबर 2016 से यह मामला चल रहा है और इसके बाद से ही कोर्ट के आदेश पर इंटक का दोनों गुट कोल इंडिया की सभी कमेटियों से बाहर है.
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