रानीगंज पुस्तक मेले में हिंदी पुस्तकों की खरीदारी में रुचि दिखा रहे पुस्तक प्रेमी

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हिंदी पुस्तक के स्टालों के समक्ष उमड़ रही भीड़ रानीगंज : रानीगंज पुस्तक मेला में मेयर जितेंद्र तिवारी की पहल पर इस वर्ष हिंदी पुस्तकों के खासे स्टाल लगे हैं. स्टाल बढ़ने से हिंदी पुस्तकों में रुचि रखने वाले खरीदारों की भीड़ मेले में उमड़ रही है. लोगों को उनकी पंसदीदा किताबें उपलब्ध कराने का […]

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हिंदी पुस्तक के स्टालों के समक्ष उमड़ रही भीड़

रानीगंज : रानीगंज पुस्तक मेला में मेयर जितेंद्र तिवारी की पहल पर इस वर्ष हिंदी पुस्तकों के खासे स्टाल लगे हैं. स्टाल बढ़ने से हिंदी पुस्तकों में रुचि रखने वाले खरीदारों की भीड़ मेले में उमड़ रही है. लोगों को उनकी पंसदीदा किताबें उपलब्ध कराने का प्रकाशक भरसक प्रयास कर रहे हैं.
कोलकाता बैंटिक स्ट्रीट के मशहूर प्रकाशन ‘प्रतिश्रुति’ ने इस वर्ष मेले में अपना स्टाल लगाया है. मालिक लक्ष्मण केडिया ने बताया िक 1985 के बाद इस बार उन्होंने रानीगंज पुस्तक मेले में स्टाल लगाया है. पुस्तक मेला के सांगठनिक सचिव निर्मल झा के आग्रह पर वे हिंदी साहित्यकारों की प्रमुख पुस्तकें लेकर यहां पहुंचे हैं. उनके खुद के प्रकाशन की लगभग 50 पुस्तकें हैं. ध्रुवदेव मिश्रा िलखित ‘धारदार शीशा’, भवानी प्रसाद मिश्रा रचित ‘कुछ नीति, कुछ राजनीति’ तथा स्वामीनाथ पांडे रचित ‘राधा’ के अलावा बुजुर्गों पर लिखी गई ‘ढलती शाम’ की अच्छी खासी बिक्री हो रही है.
अजीत नारायण मिश्र की ‘नैतिक और मानवीय मूल्य’ की खरीदारी में पुस्तक प्रेमी रुचि दिखा रहे हैं. उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यक्रम में पुरस्कृत ‘एक शिक्षक की संघर्ष यात्रा’ की भी अच्छी मांग है. उन्होंने कहा िक पुस्तकों की बिक्री उनके लिये मायने नहीं रखती है. पुस्तकों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ाना ही उनका मुख्य उद्देश्य है. उन्होंने बताया कि इसके पूर्व वह िदल्ली के प्रगति मैदान में आयोिजत विश्व पुस्तक मेला तथा गोरखपुर में गोरखपुर पुस्तक मेला में स्टॉल लगा चुके हैं. देवघर में आयोिजत पुस्तक मेला में जाने की बात थी लेकिन रानीगंज पुस्तक मेला के आयोजकों के आग्रह को देखते हुये यहां स्टाल लगाने का फैसला किया.
उन्होंने बताया कि इस वर्ष ज्यादा पुस्तकें लेकर वे नहीं आ सके लेकिन अगले वर्ष से पुस्तकों की संख्या में बढ़ोत्तरी करेंगे. दो लाख की पुस्तकें बेचना का लक्षअय है. उन्होंने कहा कि बड़े ही दुख का विषय है कि आज पुस्तकों की खरीदारी सिर्फ संस्थाओं द्वारा लाइब्रेरी में रखने के लिए की जाती है. लोगों का पुस्तकों के प्रति अनुराग बढ़ाने पर ही प्रकाशक जिंदा रह पायेंगे. बांग्ला पुस्तक स्टॉल रियो बुक हाउस के मालिक अक्षय चटर्जी ने बताया िक वह कोई प्रकाशक नहीं बल्कि कॉलेज स्ट्रीट के बुकसेलर हैं. 28 वर्षों से पुस्तक व्यवसाय से जुड़े है. रानीगंज पुस्तक मेला में 2015 में आये थे. लेकिन बीच के दो वर्षों में वह नहीं आ पाये.
पुन: इस वर्ष आये हैं. उन्होंने बताया कि उनके स्टाल में हर किस्म की पुस्तकें उपलब्ध हैं. धर्म, समाज, राजनीति, अर्थ से लेकर घर परिवार से जुड़ी बांग्ला किताबें मौजूद हैं. बंकिमचंद्र, शरदचंद्र, रवीन्द्रनाथ ठाकुर की पुस्तकों की खासी मांग है. ₹40 हजार की पुस्तकें बिक जाए तो उन्हें खुशी होगी. खरीदारों को 10 से 20 फीसदी की छूट दी जा रही है.
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