सरकारी शिक्षकों के प्राइवेट ट्यूशन पर रोक का विरोध, अभिभावकों ने बीडीओ और विधायक से की मुलाकात
बरजोरा क्षेत्र के सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी के छात्र-छात्राओं के अभिभावक सोमवार को राज्य सरकार के जन कल्याण शिविर में पहुंचे.
बांकुड़ा.
बरजोरा क्षेत्र के सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी के छात्र-छात्राओं के अभिभावक सोमवार को राज्य सरकार के जन कल्याण शिविर में पहुंचे. वे यहां सरकार द्वारा घोषित 54 जनहितकारी योजनाओं का लाभ उठाने नहीं, बल्कि एक विशेष अनुरोध लेकर आए थे कि सरकारी स्कूल के शिक्षकों द्वारा पढ़ाए जाने वाले प्राइवेट ट्यूशन को फिलहाल बंद न किया जाए. हाल ही में राज्य सरकार ने आदेश जारी किया था कि सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों का कोई भी शिक्षक सशुल्क (पेड) प्राइवेट ट्यूशन नहीं पढ़ा सकेगा.एजुकेशन सिस्टम में ट्यूटर्स पर निर्भर हैं छात्र
विगत ढाई दशकों से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में छात्र पूरी तरह से निजी ट्यूटर्स पर निर्भर हो गये हैं. अभिभावकों के एक वर्ग का कहना है कि जो शिक्षक स्कूलों में नियमित विषय पढ़ाते हैं और सरकार से वेतन लेते हैं, वे घर पर ट्यूशन के जरिए छात्रों को अलग से गाइड करते हैं. यह पश्चिम बंगाल की शिक्षा प्रणाली में एक आम बात बन चुकी है. ऐसे में सरकार द्वारा अचानक ट्यूशन बंद करने की घोषणा से माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षा के परीक्षार्थियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसी समस्या को लेकर अभिभावक ब्लॉक व जिला स्तरीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलने पहुंचे थे.
छह महीने की मोहलत देने की मांग
शिविर में बरजोरा के विधायक बिल्लेश्वर सिंह और बीडीओ कार्तिक चंद्र रॉय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिनसे अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की. मनिका कुंडू नामक एक अभिभावक ने कहा कि स्कूल शिक्षकों की प्राइवेट टीचिंग रोकने के सरकारी आदेश को इस चालू सत्र में लागू नहीं किया जाना चाहिए और छात्रों के भविष्य को देखते हुए कम से कम छह महीने की मोहलत दी जानी चाहिए.
सत्र के बीच में ट्यूटर बदलने से बिगड़ेगी पढ़ाई
एक अन्य अभिभावक भोलानाथ गरई ने आगामी परीक्षाओं की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि माध्यमिक परीक्षा पूजा के बाद और मुख्य परीक्षा अगले साल की शुरुआत में है. वहीं हायर सेकेंडरी के छात्रों का थर्ड सेमेस्टर सितंबर में और फाइनल परीक्षा फरवरी में होनी तय है. इस स्थिति में यदि छात्र नए ट्यूटर के पास जाते हैं, तो उनकी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सरकार के इस नीतिगत फैसले का समर्थन करते हैं, लेकिन वर्तमान सत्र के परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए इस बार शिक्षकों को रियायत दी जानी चाहिए.
विधायक ने दिया सकारात्मक आश्वासन
अभिभावकों की मांग सुनने के बाद बीडीओ कार्तिक चंद्र रॉय ने उन्हें चार-पांच दिनों के बाद दोबारा मिलने का समय दिया है. दूसरी ओर, स्थानीय विधायक बिल्लेश्वर सिंह ने आश्वासन देते हुए कहा कि वह इस व्यावहारिक समस्या को लेकर उच्च शिक्षा विभाग और पश्चिम बंगाल मध्य शिक्षा बोर्ड (बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन) से लगातार बातचीत कर रहे हैं. उम्मीद है कि छात्रों के हित में इस मसले का समाधान बहुत जल्द निकाल लिया जायेगा.
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