शिवाजी, शुभजीत को मिला भूमध्यसागर सम्मान

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विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ कार्य करनेवालों को सम्मानित किया गया समारोह में पर्यावरण का संबंध संस्कृति तथा रोजगार से जुड़ा है नया चिंतन जया मित्र का आसनसोल : साहित्य तथा पेंटिंग के क्षेत्र में बेहतर तथा जनपक्षीय कार्य करने के लिए आर्टिस्ट शिवाजी बसु तथा कवि शुभजीत सुलेखापात्र को शनिवार को भूमध्यसागर सम्मान अवार्ड से […]

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विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ कार्य करनेवालों को सम्मानित किया गया समारोह में

पर्यावरण का संबंध संस्कृति तथा रोजगार से जुड़ा है नया चिंतन जया मित्र का
आसनसोल : साहित्य तथा पेंटिंग के क्षेत्र में बेहतर तथा जनपक्षीय कार्य करने के लिए आर्टिस्ट शिवाजी बसु तथा कवि शुभजीत सुलेखापात्र को शनिवार को भूमध्यसागर सम्मान अवार्ड से सम्मानित किया गया. इसके लिए पर्यावरण को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका ‘भूमध्यसागर’ ने स्थानीय आश्रममोड़ के पास स्थित शिक्षण संस्थान परिसर में समारोह आयोजित किया. संपादक सह पर्यावरणविद जया मित्र ने इसका संचालन किया. पर्यावरणविद सुश्री मित्र ने कहा कि वर्ष 1995 में इस पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया गया था. इस पत्रिका के प्रकाशन का तात्पर्य उन लेखों का प्रकाशन था, जिन्हें पढ़ना पसंद करते हैं.
उन्होंने कहा कि समाजमुखी होकर ही व्यक्ति का अस्तित्व बच सकता है. इसे बचाने के क्रम में ही समाज के विभिन्न समाजमुखी शख्सियतों से जुड़ना हुआ है. 22 वर्षो में पत्रिका ने कई मंजिलें हासिल की है. उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करनेवालों को सम्मानित तथा अन्य लोगों को प्रोत्साहित करने क लिए यह अवार्ड दिया जाता है. इस वर्ष यह अवार्ड आर्टिस्ट शिवाजी बसु तथा कवि शुभजीत सुलेखापात्र को दिया गया. इसके साथ ही अनुजित रायचौधरी, डॉ रामदुलाल बसु, सत्येन गंगोपाध्याय, स्वप्न विश्वास, विकास गायन, वासुदेव मंडल, मुक्तिराय चौधरी, शीतल गंगोपाध्याय , अरूणाभ सेनगुप्ता, विश्वदेव भट्टाचार्या, प्रदीप सुमन, देवजानी सिंहा, दीपा राय, अरूणिमा दत्त, मणिदीपा भट्टाचार्या, दीपश्री सेन, सुतपा प्रतिहार, बर्ना मुखोपाध्याय, विकास बर्मन, रोबिन प्रमाणिक, भास्कर चक्रवर्ती , मीना कुमारी सिंह, पारामिता, अमलेश, आंतिक आदि को सम्मानित किया गया.
शिक्षाविद डॉ बसु ने कहा कि इस दौर में विश्वास पर सर्वाधिक खतरा उत्पन्न हो रहा है. सभी पापोंमें सबसे बड़ा पाप विश्वासघात ही है. उन्होंने कहा कि मानव को मानव से जोड़े रखने की संस्कृति विकसित करनी होगी. उन्होंने कहा कि पहली बार जया मित्र ने स्थापित किया है कि पर्यावरण सिर्फ परिवेश से नहीं जुड़ा है बल्कि सामग्रिक रूप में यह संस्कृति तथा रोजगार से जुड़ा मामला है. यह अपने किस्म का नया चिंचन है तथा इस पर गहन चर्चा की जरूरत है.
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