घर में लगी आग में उलझी है इंटक

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सीआइएल की हर यूनिट से बाहर रहने के कारण हो रही कमजोरी 12 दिसंबर को होनी है सुनवाई, हर गुट अपनी जीत को आश्वस्त आसनसोल : पहले तो कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) प्रबंधन ने जेबीसीसीआइ में इंटक की सीटें कम कर दी और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे जेबीसीसीआइ से ही बाहर कर […]

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सीआइएल की हर यूनिट से बाहर रहने के कारण हो रही कमजोरी
12 दिसंबर को होनी है सुनवाई, हर गुट अपनी जीत को आश्वस्त
आसनसोल : पहले तो कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) प्रबंधन ने जेबीसीसीआइ में इंटक की सीटें कम कर दी और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे जेबीसीसीआइ से ही बाहर कर दिया. अदालती आदेश के कारण फिलहाल इंटक करीब डेढ़ साल से कोल इंडिया की सभी इकाइयों से बाहर है.
बढ़ती महात्वाकांक्षा से उपजी वर्चस्व की जंग के कारण इंटक में कई फाड़ हो चुके हैं. अब इस गुटबाजी का खामियाजा पूरी इंटक को भुगतना पड़ रहा है. सभी गुट अपने को असली दावेदार बता रहे हैं. स्थिति यह है कि जिस जेबीसीसीआइ में इंटक का वर्चस्व होता था, इस समय वह अपने घर की कलह में उलझी हुयी है. बाहर लड़ने से पहले उसे घर के भीतर ही लड़ाई में अधिक समय देना पड़ रहा है. इस स्थिति में उसे श्रमिकों के हित तथा खुद के अस्तित्व को बचाने के लिए अपने अंदर की लड़ाई से उबरना होगा.
याचिकाओं की आस पर टंगी इंटक
इंटक विवाद पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवायी की अगली तिथि आगामी 12 दिसंबर को तय की गयी है. सभी गुट अपनी जीत की आस लगाये बैठे हैं.
श्रम मंत्रलय की ओर से इंटक के रेड्डी गुट को जेबीसीसीआइ से अलग रखने पर बीते 13 जनवरी को अध्यक्ष जी संजीवा रेड्डी ने तथा जेबीसीसीआइ -10 में इंटक की सीटों की संख्या छह से घटा कर चार किये जाने पर दिल्ली हाई कोर्ट में प्रतिद्वंदी ददई दूबे उर्फ चन्द्रशेखर दूबे ने याचिका दायर की थी. इस याचिका को निरस्त करने के लिए इंटक के रेड्डी गुट ने भी याचिका दायर की थी. इसके साछ ही हाई कोर्ट में एक अन्य मामला भी विचाराधीन है. इस याचिका में कोल इंडिया की बैठक में ददई गुट को शामिल नहीं किये जाने का भी विरोध किया गया है.
अदालती कसरत से टूट रही कमर
इधर डॉ जी संजीवा रेड्डी की दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई होनेवाली है. कोर्ट से लगातार पड़ रही तारीख दर तारीख ने इंटक की कमर को धीरे-धीरे तोड़ना शुरू कर दिया है.
इंटक व इससे संबद्ध कोलियरी मजदूर यूनियन हो या राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ का रेड्डी व राजेन्द्र सिंह गुट हो या फिर ददई दूबे गुट. इनके सदस्यों का अपने नेता व संगठन पर विश्वास कायम है. दावा है कि इन यूनियनों की सदस्यता बरकरार है. जेबीसीसीआइ-10 के एग्रीमेंट मं हो रहे विलंब पर लोगों का मानना है कि जेबीसीसीआइ में इंटक के नहीं रहने से श्रमिकों व कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है.
विवाद निपटारे की उठी थी मांग
इंटक से संबद्ध राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन की 72वीं कार्यसमिति की दोदिवसीय बैठक कुछ माह पूर्व बोधगया स्थित आनंद इंटरनेशनल होटल में हुयी थी. इस दौरान इंटक विवाद सुलझाने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से हस्तक्षेप करने की मांग की गयी थी. एक स्वर से इस आश्य का प्रस्ताव पारित किया गया था. निर्णय के अनुसार शीघ्र ही प्रतिनिधिमंडल के दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने की बात थई.
प्रतिनिधिमंडल संगठन में चल रहे विवाद को हल करने के लिए मदद मांगेगा. प्रतिनिधिमंडल का इसपर जोर था कि विवाद खत्म करने में जिसकी दिलचस्पी न हो, उसे यूनियन तथा पार्टी से निकाल दिया जाये. सभी ने माना था कि इससे यूनियन की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है. यह भीमाना गया था कि इससे पार्टी को भी नुकसान हो रही है.
निपटारे की इच्छा का ढोंग
बोधगया में लिये गये प्रस्ताव के बाद इंटक रेड्डी व राजेन्द्र सिंह गुट को राहुल गांधी तक अपनी बात पहुंचाने में तामयाबी नहीं मिल पायी है. दूसरी ओर इंटक नेता ददई दूबे भी सांसद प्रदीप कुमार बालमुचु और पूर्व सांसद फुरकान अंसारी के जरिये कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिल कर इंटक के अंदर जारी विवाद से अवगत कराने को इच्छुक है. लेकिन इन नेताओं को भी दस जनपथ जाने का समय नहीं मिल पा रहा है.
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