वेतन समझौते पर 10 को हस्ताक्षर संभव

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जेबीसीसीआइ तथा सब-कमेटियों की कई बैठकों के बाद भी दसवें वेतन समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो रहा है. आश्रित के नियोजन, संडे डय़ूटी, महिला वीआरएस जैसे मुद्दे विवादास्पद बने हुए है. एपेक्स जेसीसी की बैठक में इन पर बीच का रास्ता तो दोनों पक्षों ने निकाला, लेकिन एचएमएस ने हस्ताक्षर करने से इंकार करते हुए […]

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जेबीसीसीआइ तथा सब-कमेटियों की कई बैठकों के बाद भी दसवें वेतन समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो रहा है. आश्रित के नियोजन, संडे डय़ूटी, महिला वीआरएस जैसे मुद्दे विवादास्पद बने हुए है. एपेक्स जेसीसी की बैठक में इन पर बीच का रास्ता तो दोनों पक्षों ने निकाला, लेकिन एचएमएस ने हस्ताक्षर करने से इंकार करते हुए प्रबंधन की नीयत पर सवाल खड़ा कर दिया है.
आसनसोल : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) एपेक्स जेसीसी की कोलकाता में हुयी दोदिवसीय बैठक में दसवें वेतन समझौते की राह में बाधा बने मुद्दों पर सहमति बन गयी है. इससे वेतन समझौता की राह आसान हो गयी है.
इसी बैठक में जेबीसीसीआई-10 की दसवीं बैठक दस अक्तूबर को तय की गयी है. इसमें वेतन समझौते होने की पूरी संभावना जतायी जा रही है. इस बैठक से एक दिन पहले नौ अक्तूबर को वेज ड्रॉफ्ट कमेटी की बैठक होगी.
एचएमएस के प्रतिनिधि नत्थू लाल पांडेय के इन मुद्दों पर बनी सहमति पर हस्ताक्षर न किये जाने से समझौते में पेंच फंसता दिखने लगा है. श्री पांडेय का कहना है कि आश्रित के नियोजन के मुद्दे पर जो कमेटी बनी है, उसके साथ कुछ जरूरी शत्तरे का नहीं जोड़ना प्रबंधन के पक्ष में ही जाता है.
उन्होंने कहा कि नौवें वेतन समझौते में प्रबंधन ने सेवाकाल के दौरान मृत या मेडिकल अनफिट श्रमिक के आश्रित के नियोजन के मुद्दे पर सहमति बनी थी. इन पर दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर भी किये थे.
लेकिन इसे लागू करने में प्रबंधन के स्तर से काफी आनाकानी की जाती है. किसी न किसी बहाने फाइल लंबित कर दी जाती है. इसके कारण नियोजन का मामला लटक जाता है. आवेदक कोलियरी, क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर कंपनी मुख्यालय का चक्कर लगाते रह जाता है.
यूनियनों ने लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन की मांग शुरूआत में की थी. लेकिन प्रबंधन ने इस मद मेंनियोजन से साफ मना कर दिया है. अब इस मामले में कमेटी गठित कर दी गयी है. लेकिन उसमें यह शर्त्त नहीं जोड़ा गया है कि जब तक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती और उस पर दोनों पक्षों की सहमति नहीं बन जाती, तब तक पुराने प्रावधान को जारी रखा जायेगा. इस मद में नियुक्ति समय पर की जायेगी. इस शर्त्त के नहीं रहने पर प्रबंधन प्रतिनिधि लगातार इसे लंबित रखते रहेंगे तथा नियोजन पर परोक्ष रूप से रोक लग जायेगी. प्रबंधन यही नीति अपना रहा है.
यूनियन का संडे डय़ूटी को लेकर भी विवाद है. उसके प्रतिनिधि का कहना है कि बड़े-बड़े प्रोजेक्ट में संडे डय़ूटी करने से कर्मियों को एक बड़ी राशि प्राप्त होती है. यदि नये वेतन समझौते में संडे डय़ूटी बंद कर समझौता होता है तो नये वेतन समझौते से उनके वेतन में जो वृद्धि होगी, उससे अधिक राशि की कटौती संडे मद में हो जायेगी. उनके लिए इस नये वेतन समझौते का औचित्य ही नहीं है.
उन्होंने कहा कि भूमिगत खदानों में दुर्घटना में घायल होने पर चिकित्सा के दौरान भी श्रमिक को भूमिगत भत्ता मिलता था. लेकिन नये वेतन समझौते में प्रबंधन भूमिगत भत्ते की कटौती करना चाहता है. उसका तर्क है कि जब श्रमिक भूमिगत खदान मेंजाता ही नहीं तो भत्ता का भुगतान क्यो? जबकि एचएमएस का तर्क है कि इस राशि की भुगतान दशकों से होता रहा है.
हालांकि यूनियन ने वेतन समझौते के मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है. जेबीसीसीआइ की बैठक से पहले यूनियन की अपनी बैठक होगी, जिसमें इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा. जरूरत पड़ने पर यूनियन इसके खिलाफ श्रमिकों के बीच जाने का भी फैसला ले सकती है. या फिर उसके बिना हस्ताक्षर के भी वेतन समझौता हो सकता है.
इसके पहले बी कई वेतन समझौतों पर किसी न किसी यूनियन ने समझौता नहीं किया लेकिन वेतन समझौता प3भावी हो गया. इस बार स्थिति बदली हुयी है. दिल्ली हाइ कोर्ट के निर्देश पर इंटक इस वेतन समझौते से बाहर है. एचएमएस के भी अलग हो जाने के बाद मामला तीन व दो यूनियनों का हो जायेगा.
आश्रितों का नियोजन
आश्रितों के नियोजन का मसला कोल इंडिया के कार्मिक निदेशक आरआर मिश्र की अध्यक्षता में एक कमेटी गठन कर उसके हवाले कर दिया गया है.
कमेटी में एसइसीएल के सीएमडी बीआर रेड्डी, एमसीएल के कार्मिक निदेशक एलएन मिश्र, सिंगरैनी कोल कंपनी के निदेशक (कार्मिक, प्रशसन व कल्याण) जे पवित्रण, कोल इंडिया के मुख्य कार्मिक प्रबंधक एके सक्सेना तथा यूनियन प्रतिनिधियों में डॉ बीके राय (बीएमएस), रमेन्द्र कुमार (एटक), नत्थूलाल पांडेय (एचएमएस) तथा डीडी रामानंदन (सीटू) शामिल हैं.
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) के सवाल पर एसइसीएल के सीएमडी बीआर रेड्डी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया.
इसमें इसीएल के कार्मिक निदेशक केएस पात्र, एमसीएल के कार्मिक निदेशक एलएन मिश्र, सीसीएल के वित्त निदेशक डीके घोष, कोल इंडिया के मुख्य कार्मिक प्रबंधक एके सक्सेना, यूनियन प्रतिनिधियों में वाईएन सिंह (बीएमएस), डीडी रामानंदन (सीटू), नत्थूलाल पांडेय (एचएमएस), लखनलाल महतो (एटक) तथा वीपी सिंह (कोल इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) शामिल हैं.
साप्ताहिक अवकाश
साप्ताहिक अवकाश माइंस एक्ट 1952 के अनुसार मिलेगा. साप्ताहिक अवकाश के दिन काम करने से प्रबंधन को वेतन दोगुना करना होगा. इन मुद्दों पर सहमति बनने के बाद 10 अक्तूबर को होनेवाली जेबीसीसीआइ-10 की बैठक में कोयला मजदूरों के दसवें वेतन समझौते की संभावना जतायी जा रही है. जानकार सूत्रों के अनुसार विवादित मुद्दों को पेंडिंग में रख दिया गया है.
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