अस्त्र के साथ शोभायात्रा निकालने पर पाबंदी से गरमायी राजनीति
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सरकार के इस आदेश के विरोध में खुल कर बोलने से कतरा रहे हैं लोग अखाड़ा कमेटियां असमंजस में, सरकार से सहयोग की आस दुर्गापुर. दशहरा के दिन राज्य में किसी को भी हथियार के साथ जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी जायेगी. पुलिस प्रशासन को सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है. राज्य […]
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सरकार के इस आदेश के विरोध में खुल कर बोलने से कतरा रहे हैं लोग
अखाड़ा कमेटियां असमंजस में, सरकार से सहयोग की आस
दुर्गापुर. दशहरा के दिन राज्य में किसी को भी हथियार के साथ जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी जायेगी. पुलिस प्रशासन को सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है. राज्य की तृणमूल कांग्रेस की सरकार द्वारा इस प्रकार के आदेश दिए जाने के बाद एक बार फिर राज्य की राजनीति गरम हो गयी है.
दूसरी ओर, सरकार के इस आदेश से राज्य के साथ–साथ शिल्पांचल की अखाड़ा कमेटियों के सदस्यों में असमंजस की स्थिति देखी जा रही है. गौरतलब है िक बीते दिनों राज्य सचिवालय में प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को साफ कहा कि शस्त्र जुलूस निकालने की अनुमति किसी भी हाल में नही दें. अगर इसके बाद भी ऐसा कोई शस्त्र जुलूस निकालता है तो सख्त कार्रवाई करें.
ज्ञात हो िक शिल्पांचल में छोटे-बड़े मिलाकर आधा दर्जन से अधिक अखाड़ा कमेिटयां हैं. ये दशहरे के दिन पूरे धूमधाम के साथ पारम्परिक तरीके से हथियार के साथ जुलूस िनकालती आयी हैं. सरकार के इस आदेश के बाद अखाड़ा कमिटी के लोग पेशोपेश में है. प्रशासन के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श का दौर चल रहा है.
इस आदेश को लेकर दुर्गापुर के महावीर डंगाल अखाड़ा के अध्यक्ष शिवशंकर प्रसाद का कहना है कि बीते चालीस वर्षों से अधिक समय से दशहरा के दिन शस्त्र को लेकर जुलूस निकाला जाता आया है. सरकार के इस नये आदेश ने उन्हें चिंता में डाल दिया है. कमिटी की ओर से जुलूस की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गयी है. प्रशासन के अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को लेकर कई दफा बैठक की गई है. प्रशासन की ओर से सभी पक्षों को बैठकर हल निकालने का अाश्वासन िदया गया है.
कमेटी के सचिव सूरजदेव यादव का कहना है कि सरकार के आदेश का पालन तो करना ही पड़ेगा. परन्तु दशहरा के दिन िहन्दू धर्म के अनुसार शस्त्र की पूजा की जाती है और शोभायात्रा िनकाली जाती है. कमिटी की ओर से भी इस परम्परा का पालन किया जाता रहा है. सरकार के इस आदेश से परम्परा का निर्वहन करना मुश्किल दिख रहा है.
कमेटी के कोषाध्यक्ष समरित भगत और गोपाल मंडल ने कहा िक विजयदशमी के दिन शास्त्र की पूजा करना और शोभायात्रा निकालने की हमारी वर्षों पुरानी परम्परा रही है. इस दिन हथियार लेकर शोभायात्रा निकाली जाती है. उसका कोई गलत व्यवहार नहीं किया जाता है. सरकार को इस प्रकार के आदेश पारित करने के पहले परम्परा का ख्याल रखना चाहिये था.
कमेटी के सदस्य शैलेन्द्र दुबे ने कहा िक सभी को अपने धर्म के रीति-िरवाजों का पालन करने का मौलिक अधिकार होता है. दशहरा के दिन हथियार लेकर शोभायात्रा निकालना हमारे धर्मं के रिवाज का एक हिस्सा है. लेिकन सरकार के इस आदेश से रिवाज पर तलवार लटकती दिख रही है. बिना शस्त्र के विजयदशमी की शोभायात्रा निकालने का कोई तुक ही नहीं बनता है. अब देखना यह है िक प्रशासन किस प्रकार इसमें सहयोग करता है.
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