कुंभकरणी नींद से जागा प्रशासन, फुलझर में अस्थायी सेतु का निर्माण शुरू

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ग्रामीणों को टूटे पुल से जान जोिखम में डाल कर करनी पड़ती थी आवाजाही प्रभात खबर में सात जुलाई को समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हुआ रेस पानागढ़ : पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा ब्लॉक के विदविहार ग्राम पंचायत के सुदूर ग्राम फुलझर गांव के ग्रामीणों को टूटे सेतु से जान जोिखम में डालकर […]

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ग्रामीणों को टूटे पुल से जान जोिखम में डाल कर करनी पड़ती थी आवाजाही
प्रभात खबर में सात जुलाई को समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हुआ रेस
पानागढ़ : पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा ब्लॉक के विदविहार ग्राम पंचायत के सुदूर ग्राम फुलझर गांव के ग्रामीणों को टूटे सेतु से जान जोिखम में डालकर आवाजाही नहीं करनी पड़ेगी.
सेतु के समानान्तर िजला प्रशासन चार फीट चौड़ा एक अस्थायी सेतु बना रहा है तािक बरसात में ग्रामीणों को िदक्कत न हो. उल्लेखनीय है िक गांव में प्रवेश करने के िलये या फिर गांव से बाहर जाने के िलये टूटे सेतु को पार करना ही होगा. िपछले िदनों प्रभात खबर में इससे संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद िजला प्रशासन हरकत में आया है. जिला प्रशासन के निर्देश के बाद कांकसा ब्लॉक प्रशासन ने फुलझर गांव के लोगों के लिये फिलहाल टुमकी नदी पर पांच लाख रुपये खर्च कर पाइप बिछाकर मोरम वाला अस्थायी रास्ता बनाने का काम शुरू कर दिया है.
इससे बरसात में ग्रामीणों तथा स्कूली बच्चो को टूटे पुल से जान जोखिम में डालकर आवागमन नहीं करना पड़ेगा. कांकसा बीडीओ अरविंद विश्वास ने बताया िक मीडिया के माध्यम से खबर मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुये गांव के लोगों और छात्र-छात्राओं के आवागमन के िलये कांकसा पंचायत समिति और विदविहार पंचायत के संयुक्त रूप से आर्थिक मदद के बाद नदी पर अस्थायी सेतु रूपी रास्ता बनाया जा रहा है. श्री िवश्वास ने बताया िक स्थायी सेतु के निर्माण के िलये एक रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जायेगी. प्राय: 25 लाख रुपये स्थायी सेतु के निर्माण में खर्च आयेगा. जिला परिषद से सहयोग मांगा गया है. िफलहाल चार फुट चौड़ा अस्थायी सेतु तैयार किया जा रहा है ताकि दो पहिया वाहन और छोटी कारें आवागमन कर सके.
गांव के तृणमूल नेता व पंचायत सदस्य गिरिधारी सिन्हा ने कहा कि मीडिया के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ग्रामीणों के िलये टूटे सेतु के पास ही अस्थायी रास्ता बना रहा है. लेकिन यह नदी में पानी भर जाने के बाद कितना टिका रहेगा, इस पर संदेह है. हम लोग चाहते हैं कि प्रशासन स्थायी सेतु का निर्माण करे ताकि स्थायी तौर समस्या का समाधान हो. बीडीओ का कहना है कि स्थायी सेतु के निर्माण में कम से कम एक वर्ष लगेगा. हम लोग इस पर लगे हुये हैं.
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