पास नहीं हुआ तो बना लिया फरजी सर्टिफिकेट

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 May 2017 8:39 AM

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कॉलेज काउंसिल कर रही जांच मेडिकल काउंसिल से भी की गयी शिकायत कोलकाता : महानगर के कॉलेज स्क्वायर स्थित कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल देश के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेज में से एक है. वर्तमान में इस अस्पताल की उम्र करीब 180 साल है. यहां एमबीबीएस की पढ़ाई करनेवाले एक छात्र पर फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट […]

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कॉलेज काउंसिल कर रही जांच

मेडिकल काउंसिल से भी की गयी शिकायत

कोलकाता : महानगर के कॉलेज स्क्वायर स्थित कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल देश के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेज में से एक है. वर्तमान में इस अस्पताल की उम्र करीब 180 साल है. यहां एमबीबीएस की पढ़ाई करनेवाले एक छात्र पर फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के सहारे प्रैक्टिस करने का आरोप है.

आरोपी छात्र का नाम आशिक कुमार सरकार है. अाशिक कुछ दिन पहले काकुड़गाछी स्थित एक निजी नर्सिंग होम में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत था. जहां वह मरीजों का इलाज भी कर रहा था. उसने नौकरी पाने के लिए अस्पताल को जो बायोडेटा दिया, उसमें फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा. साथ 2015 में एबीबीएस पूरा कर लेने की जानकारी दी.

जबकि वह चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में लगातार चार बार से फेल हो रहा है. गत वर्ष परीक्षा के दौरान वह आरजी कर मेडिकल कॉलेज में चिटिंग करते हुए पकड़ा गया था. आरोपी छात्र के खिलाफ प्रोग्रेसिव जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने एमसीआई की पश्चिम बंगाल शाखा से शिकायत की है. वहीं शिकायत मिलने के बाद कॉलेज काउंसिल भी मामले की छानबीन कर रही है.

एमबीबीएस पाठ्यक्रम चार वर्ष का होता है. इन चार सालों‍ में छात्रों को चार सेमेस्टर से होकर गुजरना पड़ता है. पहले व दूसरे सेमेस्टर के बाद तीसरा सेमेस्टर व चौथा सेमेस्टर उत्तीर्ण करना होता है. इसके बाद एक वर्ष का इंटर्नशिप यानि अस्पताल के इंडोर विभाग में चिकित्सा का प्रशिक्षण लेना होता है.

इस प्रशिक्षण के बाद ही उन्हें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है. उसी रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर वह डॉक्टर के तौर पर सरकारी या किसी निजी अस्पताल में प्रैक्टिस कर सकते हैं, लेकिन जिस छात्र पर फर्जी सर्टिफिकेट प्राप्त कर प्रैक्टिस करने का आरोप है वह अभी एमबीबीएस के चौथे सेमेस्टर को पूरा भी नहीं कर सका है. इस सेमेस्टर में मेडिसीन की पढ़ाई करायी जाती है.

क्या कहते हैं अधिकारी

मुझे भी इसकी जानकारी मिली है. प्रिंसिपल प्रो डॉ तपन लाहिरी के नेत्तृत्व में कॉलेज काउंसिल मामले की छानबीन कर रही है. दोषी साबित होने पर छात्र के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जायेगी.

डॉ निर्मल मांझी, अध्यक्ष, वेस्ट बंगाल मेडिकल काउंसिल.

मैं छुट्टी पर गया हुआ था. शनिवार को ही ज्वाइन किया. इस मामले को विस्तार से समझने की कोशिश कर रहा हूं. इस मामले की पूरी जांच की जायेगी. दोषी सािबत होने पर कड़ी कार्रवाई होगी.

प्रो डॉ तपन लाहिड़, प्रिंसिपल, कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल.

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