किशोरी बनी कुंवारी मां, दुष्कर्मी दादा को 10 साल की सजा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Apr 2017 8:41 AM
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परिवार वालों का अपनाने से इनकार प्रशासन ने सरकारी होम भेजा मालदा : दुष्कर्मी दादा को अदालत ने 10 साल की सजा सुनायी है. दोषी का नाम हरिपद बागची (78) है. उसका घर इंगलिश बाजार थाना अंतर्गत लक्ष्मीपुर गांव है. पेशे से वह किसान है. अदालती सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दुष्कर्म की यह […]
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परिवार वालों का अपनाने से इनकार
प्रशासन ने सरकारी होम भेजा
मालदा : दुष्कर्मी दादा को अदालत ने 10 साल की सजा सुनायी है. दोषी का नाम हरिपद बागची (78) है. उसका घर इंगलिश बाजार थाना अंतर्गत लक्ष्मीपुर गांव है. पेशे से वह किसान है. अदालती सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दुष्कर्म की यह घटना 25 नवंबर 2014 को घटी थी. उसने अपनी ही पोती के साथ दुष्कर्म किया था. तब पोती की उम्र मात्र 14 वर्ष थी.
घर में उस समय कोई नहीं था. इसी का फायदा उठाते हुए कलियुगी दादा ने अपने पोती को हवस का शिकार बनाया. अदालती सूत्रों ने आगे बताया कि वह इतने पर भी नहीं रुका. दुष्कर्म का सिलसिला आगे भी चला. इसका खुलासा तब हुआ जब किशोरी गर्भवती हो गयी. नाबालिग के पिता ने अपने ही पिता हरिपद बागची के खिलाफ इंगलिश बाजार थाने में दुष्कर्म की शिकायत दर्ज करायी. उसके कुछ महीने बाद किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया. परिवार वालों ने किशोरी को अपनाने से इनकार कर दिया.
वह लड़की अपने बच्चे के साथ एक सरकारी होम में रह रही है. करीब दो साल तक इस मुकदमे की सुनवाई चली. कुल पांच लोगों ने अदालत में गवाही दी. सरकारी वकील लोकमान अली ने बताया है कि आरोपी के खिलाफ तमाम सबूत सही पाये जाने के बाद अदालत ने उसे दोषी करार दिया और 10 साल के कारावास की सजा सुनायी. एडिशनल सेशन जज सेकेंड कोर्ट तथा स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के जज देवाशीष हालदार ने यह सजा सुनायी है. हरिपद के खिलाफ 376/1 धारा के तहत 10 साल की सजा सुनायी गयी है.
उसके ऊपर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माने की रकम नहीं देने पर दो साल अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी. पॉक्सो एक्ट के तहत भी उसे सात साल की सजा सुनायी गयी है. पांच हजार रुपये का अलग से जुर्माना भी लगाया गया है. इस बीच, स्थानीय लोग तथा विभिन्न स्वयंसेवी संगठन होम में रह रही पीड़िता को घर वालों के हवाले करने की कोशिश में लगे हुए हैं.
परिवार वालों से कई लोगों ने मुलाकात की. इन लोगों ने अनुरोध किया कि जब किशोरी 18 साल की हो जाये, तो उसेपरिवार के लोग अवश्य अपना लें. दूसरी ओर, बचाओ पक्ष के वकील सुदीप्त गांगुली ने इस सजा का विरोध किया है. उनका कहना है कि गलत दुष्कर्म का आरोप लगाया गया. उनके मुव्वकिल की यौन क्षमता ही नहीं है. इसकी चिकित्सकीय जांच भी की गयी है. नाबालिग ने एक कन्या को जन्म दिया है. उसकी भी डीएनए करायी गयी है. डीएनए रिपोर्ट आने से पहले ही सजा सुना दी गयी.
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