‘किस ऑफ लव’ को कबीर सुमन का समर्थन

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कोलकाता: पूर्व सांसद व बांग्ला गायक कबीर सुमन ने किस ऑफ लव मुहिम का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि प्यार चाहे जिस रूप में फैलाया जाये. वह इसका समर्थन करते हैं. आज की पीढ़ी साहस के साथ अपने प्यार का प्रदर्शन कर रही है. उल्लेखनीय है कि नैतिकता का पाठ पढ़ाने वालों के विरोध में […]

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कोलकाता: पूर्व सांसद व बांग्ला गायक कबीर सुमन ने किस ऑफ लव मुहिम का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि प्यार चाहे जिस रूप में फैलाया जाये. वह इसका समर्थन करते हैं.

आज की पीढ़ी साहस के साथ अपने प्यार का प्रदर्शन कर रही है. उल्लेखनीय है कि नैतिकता का पाठ पढ़ाने वालों के विरोध में और महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के लिए कोच्चि के बाद अब कोलकाता के दो विश्वविद्यालयों के छात्रों ने ‘किस ऑफ लव’ का आयोजन किया. केरल में शुरू हुई इस मुहिम के प्रति एकजुटता दिखाते हुए जादवपुर में एक विरोध रैली में कार्यकर्ताओं ने ‘धार्मिक कट्टरपंथ और हठधर्मिता के बढ़ने’ का आरोप लगाया.

प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के छात्र हाथों में तख्तियां लिए हुए कॉलेज स्ट्रीट के इंडियन कॉफी हाउस के सामने एकत्रित हुए. यादवपुर विश्वविद्यालय के मौजूदा और पूर्व छात्रों तथा कुछ बाहरी लोगों सहित 300 से ज्यादा कार्यकर्ता बुधवार की दोपहर यादवपुर पुलिस थाने की ओर गये. वहां जा कर वे गले मिले, चुंबन लिया और ‘आमार शोरीर आमार मोन बोंधो होक राज शासन’ (यह मेरा शरीर है, मेरा दिमाग है, मैं मॉरल पुलिसिंग की अनुमति नहीं दूंगा) जैसे नारे लगाये.

अपनी दोस्त सुचित्र का चुंबन लेने वाली पीएचडी की छात्र सायंतनी ने कहा कि अपनी स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के दमन के खिलाफ विरोध करने का समय आ गया है. मैं आजादी चाहती हूं कि किसे और कहां पर चूम लूं. इससे किसी को मतलब नहीं होना चाहिए. चुंबन विरोध का सर्वोच्च तरीका है.

इसलिए हम नैतिकता का पाठ पढ़ानेवालों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. हम उनके साथ कोई टकराव नहीं चाहते इसलिए हम प्यार का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं. एक और छात्र ने कहा कि कोच्चि से शुरू हुए आंदोलन के प्रति हमारी एकजुटता दिखाने के लिए ऐसा किया गया है. हम दिशा-निर्देश के लिए कोच्चि के आयोजकों के साथ हैं. अंग्रेजी साहित्य की तीसरे वर्ष की छात्र रोनिता सान्याल ने कहा कि हो सकता है कि इससे चीजें नहीं बदलें, लेकिन हम कोशिश करते रहेंगे. हम नफरत और असहिष्णुता की संस्कृति के खिलाफ आगे बढ़ रहे हैं. आयोजकों के मुताबिक यह प्रदर्शन महाराष्ट्र में एक दलित लड़के की उंची जाति की एक लड़की के साथ संबंधों के चलते लड़के और उसके अभिभावकों की कथित हत्या की घटना के विरोध में आयोजित किया गया. प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के पीएचडी के एक छात्र ने कहा कि चुंबन की आजादी की मुहिम राज्य में ऐसी प्रवृतियों के महत्व को रेखांकित करने के लिए है. साफ है कि इस तरह के दमन के खिलाफ तुरंत विरोध की आवश्यकता है.

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