मांगा भूमि और कोयला खदान का पूरा ब्योरा

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केंद्र ने उन कोल ब्लॉक आबंटियों को भूमि और खान का ब्योरा 10 नवंबर तक उपलब्ध कराने को कहा है, जिनके लाइसेंस सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिये थे. इसका उद्देश्य अध्यादेश के तहत आवंटियों को मुआवजा देना है. कोयला मंत्रलय ने पूर्व आवंटियों को लिखे एक पत्र में कहा, ‘भूमि और खान के लिए […]

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केंद्र ने उन कोल ब्लॉक आबंटियों को भूमि और खान का ब्योरा 10 नवंबर तक उपलब्ध कराने को कहा है, जिनके लाइसेंस सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिये थे. इसका उद्देश्य अध्यादेश के तहत आवंटियों को मुआवजा देना है. कोयला मंत्रलय ने पूर्व आवंटियों को लिखे एक पत्र में कहा, ‘भूमि और खान के लिए पूर्व आवंटियों को भुगतान हेतु मुआवजे के मूल्यांकन का एक प्रावधान है. अत: वे एक पखवाड़े के भीतर भूमि और खान ढांचे का ब्योरा उपलब्ध कराएं.’ इस अध्यादेश को 21 अक्तूबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली. मंत्रलय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामले में जहां कोई सूचना प्राप्त नहीं होती है, यह मान लिया जायेगा कि भूमि और खान ढांचे पर किसी प्रकार का कोई खर्च नहीं किया गया है. यहां बताना प्रासंगिक होगा कि कोयला खान (विशेष प्रावधान) अध्यादेश, 2014 के तहत इस तरह के आवंटियों को मुआवजा देने का एक प्रावधान है.

31 को खदानों के निजीकरण के खिलाफ यूनियनों की बैठक
केंद्रीय कोयला क्षेत्र की पांच ट्रेड यूनियनों की संचालन समितियां कोयला क्षेत्र के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ अगली कार्रवाई पर विचार करने के लिए 31 अक्तूबर को कोलकाता में बैठक करने जा रही हैं. इंडियन नेशनल माइन वर्कर्स फेडरेशन के महासचिव एसक्यू जमां ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में यूनियनें, निजी क्षेत्र को वाणिज्यिक खनन की अनुमति दिये जाने के मुद्दे से समझौता नहीं करेंगी. यह पूरी तरह से कोयला खदानों का निजीकरण है, कुछ और नहीं. उन्होंने कहा कि अपनी पूरी ताकत लगा देंगे और लंबी अवधि की हड़ताल सहित जो भी जरूरी होगा, करेंगे. उन्होंने कहा कि अन्य मामलों के साथ इस बात पर भी आम सहमति बनाने का प्रयास करेंगे कि निजी क्षेत्र के कार्यकारियों को चेयरमैन पद की दौड़ में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाये.
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