डॉन मुन्ना बजरंगी हत्याकांड : पत्नी सीमा ने केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा पर लगाया साजिश का अारोप
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Jul 2018 2:43 PM
बागपत/लखनऊ : पूर्वांचल के कुख्यात माफिया सरगना प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उसकी पत्नी सीमा सिंह ने केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा और पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत कई बड़े नेताओं पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया है. सीमा का कहना है कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह के साथ ही […]
बागपत/लखनऊ : पूर्वांचल के कुख्यात माफिया सरगना प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उसकी पत्नी सीमा सिंह ने केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा और पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत कई बड़े नेताओं पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया है. सीमा का कहना है कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह के साथ ही मनोज सिन्हा और पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने कई लोगों के साथ मिलकर उनके पति की हत्या का षड्यंत्र रचा.
आगे उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन ने कई लोगों के साथ मिलकर उनके पति की हत्या का षड्यंत्र रचा. आरोपी नहीं चाहते थे कि वह राजनीति में आगे जायें. उन्होंने कहा कि जेल में बंद सुनील राठी को किसी ने सुपारी दी या नहीं, इसकी जानकारी फिलहाल उन्हें नहीं है, लेकिन इससे पहले भी उनके पति पर कई बार हमले हो चुके हैं जिसकी शिकायत हमारी ओर से सभी जगह की गयी थी.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यायिक जांच के दिये आदेश
मुन्ना बजरंगी की सोमवार की सुबह बागपत जेल में गैंगस्टर सुनील राठी ने गोली मारकर हत्या कर दी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारागार के अंदर हुई इस वारदात को गंभीरता से लेते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिये हैं. इस मामले में जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, हेड वार्डेन अरजिंदर सिंह और वार्डेन माधव कुमार को निलंबित कर दिया गया है. पुलिस उपमहानिदेशक (कारागार) चंद्र प्रकाश ने बताया कि माफिया बजरंगी (51) को रविवार को झांसी कारागार से बागपत जेल लाया गया था. भाजपा विधायक लोकेश दीक्षित से पिछले साल रंगदारी मांगे जाने के मामले में उसे सोमवार को स्थानीय अदालत में पेश होना था. उन्होंने बताया कि बजरंगी को तन्हाई बैरक में 10 अन्य कैदियों के साथ रखा गया था. उनमें कुख्यात बदमाश सुनील राठी भी शामिल था. राठी ने सुबह किसी बात को लेकर हुई बहस के बाद बजरंगी पर कई गोलियां चलायीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी. हत्या के बाद राठी ने हथियार को सीवर में फेंक दिया. घटनास्थल से 7. 62 बोर के 10 खोखे बरामद हुए. कुछ कारतूस भी बरामद किये गये हैं. जेल में हथियार कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है. बजरंगी पर हत्या, लूट, अपहरण समेत 40 मुकदमे दर्ज थे.
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हत्या की जतायी थी आशंका
सीमा सिंह ने 29 जून को कहा था कि मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक यह बात पहुंचाना चाहती हूं कि मेरे पति की जान को खतरा है. उन्हें उचित सुरक्षा दी जाये. उनके फर्जी एनकाउंटर की साजिश रची जा रही है. यूपी एसटीएफ, पुलिस के अधिकारी और कुछ सफेदपोश षड्यंत्र कर रहे हैं कि उन्हें फर्जी एनकाउंटर में मार दिया जाये.
कम उम्र में ही जुर्म की दुनिया में रखा कदम
यूपी में जौनपुर के पूरेदयाल गांव में जन्मे मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है. उसने पांचवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी. महज 17 साल की उम्र में ही उसके खिलाफ अवैध हथियार रखने के आरोप में पहला केस दर्ज किया गया. 1980 में मुन्ना को माफिया गजराज सिंह का संरक्षण मिला. 1984 में उसने एक कारोबारी को मार डाला. जौनपुर में भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या मामले में भी मुन्ना का नाम सामने आया. 90 के दशक में मुन्ना ने मुख्तार अंसारी का दामन थामा. बजरंगी ने 2012 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में अपना दल के टिकट पर मड़ियाहूं सीट से चुनाव लड़ा था.
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विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में था नामजद
29 नवंबर, 2005 को भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गयी. इस हत्याकांड में मुन्ना बजरंगी को आरोपी बनाया गया. इस मामले में मुख्तार अंसारी और शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा का भी नाम आया. दरअसल, 2004 में बृजेश सिंह गैंग से नजदीकी रखने वाले कृष्णानंद राय ने गाजीपुर में भाजपा के टिकट से विधानसभा का चुनाव जीता था. इससे मुख्तार के वर्चस्व को चुनौती मिलने लगी थी. कहा जाता है कि इसके बाद कृष्णानंद की हत्या कर दी गयी. राय की हत्या के बाद बृजेश सिंह फरार हो गये. जुलाई, 2009 में बृजेश सिंह को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और फिर अक्तूबर में बजरंगी की गिरफ्तारी भी दिल्ली पुलिस के हाथों हुई. गिरफ्तारी के बाद से ही दोनों जेल में हैं.
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